खनिज टैक्स पर राज्यों को झटका?: लोकसभा ने बिना बहस पारित हुआ MMDR बिल, केंद्र के हाथ आएगी कमान
लोकसभा ने बुधवार को खनिज एवं खनन संशोधन विधेयक, 2026 को बिना बहस के पारित कर दिया। बिल में खनिज अधिकारों पर राज्य सरकारों की ओर से अतिरिक्त टैक्स, सेस या अन्य शुल्क लगाने पर रोक का प्रस्ताव है। क्या राज्यों की वित्तीय शक्तियां प्रभावित होंगी? विपक्ष ने इसका विरोध क्यों किया? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
लोकसभा ने बुधवार को खनिज और खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को बिना बहस के पारित कर दिया। इस विधेयक का प्रमुख प्रावधान खनिज अधिकारों पर राज्य सरकारों की ओर से अतिरिक्त टैक्स, सेस या अन्य शुल्क लगाने पर रोक से जुड़ा है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने विपक्षी सदस्यों के विभिन्न मुद्दों पर विरोध के बीच विधेयक पेश किया।
क्या खनिज अधिकारों पर राज्य कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं लगा सकेंगे?
विधेयक में प्रस्ताव है कि राज्य सरकारें खनिज अधिकारों पर किसी भी नाम से टैक्स, सेस या अन्य शुल्क नहीं लगा सकेंगी। यह प्रावधान खनिज वाले क्षेत्रों पर भी लागू होगा, चाहे उनका आकलन खनिज की मात्रा, मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर किया गया हो। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से तय शर्तों और प्रतिबंधों के अनुसार ही ऐसे मामलों में प्रावधान लागू किए जाएंगे। इसके लिए MMDR कानून में एक नया प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव है।
क्या पहले से वसूले गए टैक्स वापस नहीं होंगे?
विधेयक के मुताबिक, 2026 के संशोधन कानून के लागू होने से पहले यदि ऐसा कोई टैक्स, सेस या अन्य शुल्क राज्य सरकार को जमा नहीं किया गया है या उसकी वसूली नहीं हुई है, तो उसे हर दृष्टि से अमान्य माना जाएगा। वहीं, जो राशि संशोधन कानून लागू होने से पहले राज्य सरकार को जमा हो चुकी है या वसूल की जा चुकी है, उसे वापस करने की जिम्मेदारी नहीं होगी।
क्या केंद्र खनिज वाले क्षेत्रों के नियमन पर भी नियंत्रण बढ़ाएगा?
विधेयक में केंद्र सरकार के नियंत्रण का दायरा बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इसके तहत निर्धारित मानकों के अनुसार खनिज सामग्री वाले क्षेत्रों के नियमन को केंद्र के नियंत्रण में लाने की बात कही गई है। विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि यह मौजूदा प्रावधान के अतिरिक्त होगा, जिसके तहत खदानों के नियमन और खनिजों के विकास पर केंद्र का नियंत्रण घोषित किया गया है।
सरकार ने बिल को आर्थिक विकास से क्यों जोड़ा?
जी. किशन रेड्डी ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में वित्तीय व्यवस्था को स्थिर, स्पष्ट और अनुमान योग्य बनाना है। उनके मुताबिक इससे राष्ट्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत तथा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि खनिजों पर अलग-अलग क्षेत्रों में असमान कर व्यवस्था सार्वजनिक हित को प्रभावित करती है। अधिक टैक्स और शुल्क से स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने, बाजार के विकास में कमी आने और परिवहन लागत बढ़ने की स्थिति पैदा हो सकती है।
क्या अधिक टैक्स से खनिज और महंगे होने की आशंका है?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खनिजों पर असमान कर व्यवस्था से घरेलू आपूर्ति महंगी हो सकती है और पर्याप्त स्थानीय संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद खनिजों के आयात का जोखिम बढ़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि खनिज अधिकारों या खनिज वाले क्षेत्रों पर अत्यधिक टैक्स का बोझ वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ा सकता है, जिसका असर आम नागरिक के जीवन-यापन की लागत पर पड़ सकता है।
क्या विपक्ष ने बिल को संघवाद के खिलाफ बताया?
विधेयक के विरोध में आरएसपी नेता एन.के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह संघवाद के खिलाफ है। उन्होंने बिल को पेश किए जाने का विरोध किया। विधेयक ऐसे समय लोकसभा में पारित हुआ, जब विपक्षी सदस्य विभिन्न मुद्दों को लेकर सदन में विरोध कर रहे थे और बिल पर बहस नहीं हो सकी।