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संसद में थरूर: कांग्रेस सांसद ने संविधान में संशोधनों के प्रति आगाह किया, परिसीमन पर कहा- बिगड़ सकता है संतुलन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:48 AM IST
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सार
Shashi Tharoor On Constitutional Amendments: लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संविधान संशोधन के प्रति सदन को आगाह किया और इस दौरान उन्होंने परिसीमन को लेकर कहा कि इससे राज्यों का संतुलन बिगड़ सकता है। शशि थरूर ने आगे कहा कि परिसीमन 'राजनीतिक विमुद्रीकरण' साबित होगा।
शशि थरूर, कांग्रेस सांसद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
लोकसभा में संविधान संशोधन पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सदन को आगाह किया। इस दौरान उन्होंने परिसीमन पर कहा कि इससे संतुलन बिगड़ सकता है। शशि थरूर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि सरकार ने नारी शक्ति को न्याय का तोहफा दिया है। लेकिन उन्होंने इसे कांटेदार तार में लपेट दिया है, महिला आरक्षण को संसद के विस्तार, 2011 की जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ दिया है। हमें एक नैतिक जरूरत को डेमोग्राफिक माइनफील्ड से क्यों उलझाना चाहिए? महिला आरक्षण फसल काटने के लिए तैयार है... इसे परिसीमन से जोड़ना भारतीय महिलाओं की उम्मीदों को हमारे देश के इतिहास के सबसे विवादित और मुश्किल प्रशासनिक कामों में से एक का बंधक बनाना है।'
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'यह राजनीतिक नोटबंदी जैसा साबित हो सकता है'
कांग्रेस सांसद ने महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने के सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोकसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह कदम राजनीतिक नोटबंदी जैसा साबित हो सकता है और इससे देश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा। लोकसभा में चल रही बहस के दौरान उन्होंने कहा कि आज लगभग सभी राजनीतिक दल महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में हैं और यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वास्तविक भागीदारी दी जाए। लेकिन सरकार ने इस कानून को लागू करने के लिए परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से जोड़कर महिलाओं की उम्मीदों को बंधक बना दिया है।
पीएम मोदी के नारी शक्ति संदेश का किया जिक्र
शशि थरूर ने प्रधानमंत्री के नारी शक्ति के संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने महिलाओं को न्याय का वादा तो किया है, लेकिन उसे कई शर्तों में बांध दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिलाओं को आरक्षण देने का फैसला हो चुका है, तो इसे तुरंत लागू क्यों नहीं किया जा सकता। इसके लिए संसद की सीटों का विस्तार, 2011 की जनगणना के आंकड़े और परिसीमन जैसी कठिन प्रक्रिया का इंतजार क्यों जरूरी बनाया जा रहा है।
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'परिसीमन से बदल सकता है राजनीतिक ताकत का संतुलन'
उन्होंने चेतावनी दी कि परिसीमन केवल नक्शे बदलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे राजनीतिक ताकत का संतुलन बदल सकता है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है जो देश के संघीय ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है। थरूर ने कहा कि सरकार इस मामले में जल्दबाजी कर रही है, ठीक उसी तरह जैसे पहले नोटबंदी के समय किया गया था, जिसका नुकसान देश ने देखा। बता दें कि सरकार ने महिलाओं के आरक्षण कानून में बदलाव के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया है। इसके अलावा परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी पेश किए गए हैं, जिनका उद्देश्य दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में इस कानून को लागू करना है।
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#WATCH लोकसभा में कांग्रेस MP शशि थरूर ने कहा, "... प्रधानमंत्री कहते हैं कि सरकार ने नारी शक्ति को न्याय का तोहफ़ा दिया है। लेकिन उन्होंने इसे कांटेदार तार में लपेट दिया है, महिला रिज़र्वेशन को पार्लियामेंट के विस्तार, 2011 की जनगणना के आंकड़ों और डिलिमिटेशन की प्रक्रिया से जोड़… pic.twitter.com/cuNCvaeAkk
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 17, 2026
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'यह राजनीतिक नोटबंदी जैसा साबित हो सकता है'
कांग्रेस सांसद ने महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने के सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोकसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह कदम राजनीतिक नोटबंदी जैसा साबित हो सकता है और इससे देश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा। लोकसभा में चल रही बहस के दौरान उन्होंने कहा कि आज लगभग सभी राजनीतिक दल महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में हैं और यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वास्तविक भागीदारी दी जाए। लेकिन सरकार ने इस कानून को लागू करने के लिए परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से जोड़कर महिलाओं की उम्मीदों को बंधक बना दिया है।
पीएम मोदी के नारी शक्ति संदेश का किया जिक्र
शशि थरूर ने प्रधानमंत्री के नारी शक्ति के संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने महिलाओं को न्याय का वादा तो किया है, लेकिन उसे कई शर्तों में बांध दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिलाओं को आरक्षण देने का फैसला हो चुका है, तो इसे तुरंत लागू क्यों नहीं किया जा सकता। इसके लिए संसद की सीटों का विस्तार, 2011 की जनगणना के आंकड़े और परिसीमन जैसी कठिन प्रक्रिया का इंतजार क्यों जरूरी बनाया जा रहा है।
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'परिसीमन से बदल सकता है राजनीतिक ताकत का संतुलन'
उन्होंने चेतावनी दी कि परिसीमन केवल नक्शे बदलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे राजनीतिक ताकत का संतुलन बदल सकता है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है जो देश के संघीय ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है। थरूर ने कहा कि सरकार इस मामले में जल्दबाजी कर रही है, ठीक उसी तरह जैसे पहले नोटबंदी के समय किया गया था, जिसका नुकसान देश ने देखा। बता दें कि सरकार ने महिलाओं के आरक्षण कानून में बदलाव के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया है। इसके अलावा परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी पेश किए गए हैं, जिनका उद्देश्य दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में इस कानून को लागू करना है।
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