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VB G RAM G: संसदीय समिति ने वीबी जी राम जी पर की चर्चा, विपक्ष की मांग- नियम बनाते समय सिफारिशों को...
Mon, 29 Dec 2025 04:30 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 29 Dec 2025 04:30 PM IST
सार
सूत्रों ने बताया कि दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर, मनरेगा 741 जिलों में लागू किया गया है, जिसमें 2.69 लाख ग्राम पंचायतें और 12.15 करोड़ सक्रिय श्रमिक शामिल हैं।इनमें से 57 प्रतिशत महिलाएं, 36 प्रतिशत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के श्रमिक और 48 लाख दिव्यांगजनों को रोजगार प्रदान किया गया है।
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संसदीय समिति (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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विस्तार
एक संसदीय समिति ने सोमवार को यूपीए सरकार में लागू हुई ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के विभिन्न पहलुओं की जांच की। इस योजना को अब मोदी सरकार ने अधिनियम के जरिये विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) में बदल दिया है। संसदीय समिति ने यह भी विचार किया कि नए कानून में सुचारू रूप से परिवर्तन के लिए अगले छह महीनों में क्या किया जाए।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसदीय स्थायी समिति के ज्यादातर सदस्य इस बात को लेकर चिंतित थे कि अगले छह महीनों में सरकार की ओर मनरेगा से वीबी-जी राम जी अधिनियम में कार्य नीतियों को स्थानांतरित करने के दौरान यह परिवर्तन कैसे होगा। इस अवधि के दौरान लाभार्थियों को भुगतान कैसे किया जाएगा और अतिरिक्त बजटीय सहायता की व्यवस्था कैसे की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान किसी भी सदस्य ने वीबी-जी राम जी अधिनियम का विरोध नहीं किया। हालांकि उनमें से कई ने चिंता जताई की कि पुराने कानून के तहत कई राज्यों में नामांकन केवल लगभग 50 प्रतिशत था। सदस्यों ने यह भी कहा कि विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम को लागू करने में कम से कम छह महीने लगेंगे, क्योंकि इसे नियमों के तैयार होने के बाद ही लागू किया जाएगा।
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विपक्ष ने दिया था कार्यदिवसों को 150 दिन करने का सुझाव
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2005 में पारित किया था। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) विधेयक को हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच संसद में पारित किया गया। नए अधिनियम में ग्रामीण श्रमिकों के लिए 125 दिनों के मजदूरी रोजगार का प्रावधान है।
सोमवार को हुई संसदीय समिति की बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि नई प्रणाली और ढांचा कैसा होगा। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के कुछ सदस्यों ने स्वीकार किया कि मनरेगा में कुछ कमियां थीं, जिनके लिए समिति ने पहले कुछ सिफारिशें की थीं। कुछ विपक्षी सदस्यों ने कहा कि उन्होंने पहले कार्य दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 करने का सुझाव दिया था। सूत्रों के अनुसार उन्होंने यह भी मांग की कि वीबी जी राम जी अधिनियम के नियम तैयार करते समय समिति की ओर से पहले की गई सभी सिफारिशों पर विचार किया जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें: Sabarimala Row: एसआईटी की गिरफ्त में पूर्व TDB सदस्य; CM संग फोटो विवाद पर कांग्रेस नेता सुब्रमण्यम से पूछताछ
भाजपा सांसदों ने बताया क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत?
भाजपा सांसदों ने कहा कि नए कानून की जरूरत थी क्योंकि मौजूदा कानून गांवों की मौजूदा समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का समाधान नहीं कर पा रहा था। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान कुछ सांसदों ने वीबी-जी राम जी अधिनियम लाने के कारणों के बारे में बात की।
सूत्रों ने बताया कि उन्होंने राय व्यक्त की कि मनरेगा को ग्रामीण रोजगार प्रदान करने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को विकसित करने के दोहरे उद्देश्यों के साथ लाया गया था। लेकिन उन उद्देश्यों को हासिल नहीं किया जा सका और इसीलिए सरकार की ओर से वीबी-जी राम जी अधिनियम लाया गया।
ये भी पढ़ें: Kerala: माकपा विधायक-भाजपा पार्षद के बीच कार्यालय को लेकर विवाद में कूदी कांग्रेस, दिया ये सुझाव
वर्तमान योजना में 26 करोड़ लाभार्थी शामिल
भाजपा सदस्यों ने यह भी कहा कि कई राज्यों से ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां मनरेगा निधि का 50 प्रतिशत भी वहां की सरकारों की ओर से इस्तेमाल नहीं किया जा सका है। समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता सप्तगिरि उलका ने कहा कि सदस्यों ने मनरेगा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों में इस पर कैसे आगे बढ़ा जाए, इस पर विचार-विमर्श किया, क्योंकि नया कानून तभी लागू होगा जब नियम तैयार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सदस्य बजट सत्र में भी मनरेगा पर चर्चा करने का इरादा रखते हैं और इन सभी के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से एक ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया था। बैठक के दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव ने मनरेगा पर एक प्रस्तुति दी। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत 15 करोड़ से अधिक परिवार और 26 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं।
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पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसदीय स्थायी समिति के ज्यादातर सदस्य इस बात को लेकर चिंतित थे कि अगले छह महीनों में सरकार की ओर मनरेगा से वीबी-जी राम जी अधिनियम में कार्य नीतियों को स्थानांतरित करने के दौरान यह परिवर्तन कैसे होगा। इस अवधि के दौरान लाभार्थियों को भुगतान कैसे किया जाएगा और अतिरिक्त बजटीय सहायता की व्यवस्था कैसे की जाएगी।
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सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान किसी भी सदस्य ने वीबी-जी राम जी अधिनियम का विरोध नहीं किया। हालांकि उनमें से कई ने चिंता जताई की कि पुराने कानून के तहत कई राज्यों में नामांकन केवल लगभग 50 प्रतिशत था। सदस्यों ने यह भी कहा कि विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम को लागू करने में कम से कम छह महीने लगेंगे, क्योंकि इसे नियमों के तैयार होने के बाद ही लागू किया जाएगा।
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विपक्ष ने दिया था कार्यदिवसों को 150 दिन करने का सुझाव
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2005 में पारित किया था। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) विधेयक को हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच संसद में पारित किया गया। नए अधिनियम में ग्रामीण श्रमिकों के लिए 125 दिनों के मजदूरी रोजगार का प्रावधान है।
सोमवार को हुई संसदीय समिति की बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि नई प्रणाली और ढांचा कैसा होगा। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के कुछ सदस्यों ने स्वीकार किया कि मनरेगा में कुछ कमियां थीं, जिनके लिए समिति ने पहले कुछ सिफारिशें की थीं। कुछ विपक्षी सदस्यों ने कहा कि उन्होंने पहले कार्य दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 करने का सुझाव दिया था। सूत्रों के अनुसार उन्होंने यह भी मांग की कि वीबी जी राम जी अधिनियम के नियम तैयार करते समय समिति की ओर से पहले की गई सभी सिफारिशों पर विचार किया जाना चाहिए।
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भाजपा सांसदों ने बताया क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत?
भाजपा सांसदों ने कहा कि नए कानून की जरूरत थी क्योंकि मौजूदा कानून गांवों की मौजूदा समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का समाधान नहीं कर पा रहा था। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान कुछ सांसदों ने वीबी-जी राम जी अधिनियम लाने के कारणों के बारे में बात की।
सूत्रों ने बताया कि उन्होंने राय व्यक्त की कि मनरेगा को ग्रामीण रोजगार प्रदान करने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को विकसित करने के दोहरे उद्देश्यों के साथ लाया गया था। लेकिन उन उद्देश्यों को हासिल नहीं किया जा सका और इसीलिए सरकार की ओर से वीबी-जी राम जी अधिनियम लाया गया।
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वर्तमान योजना में 26 करोड़ लाभार्थी शामिल
भाजपा सदस्यों ने यह भी कहा कि कई राज्यों से ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां मनरेगा निधि का 50 प्रतिशत भी वहां की सरकारों की ओर से इस्तेमाल नहीं किया जा सका है। समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता सप्तगिरि उलका ने कहा कि सदस्यों ने मनरेगा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों में इस पर कैसे आगे बढ़ा जाए, इस पर विचार-विमर्श किया, क्योंकि नया कानून तभी लागू होगा जब नियम तैयार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सदस्य बजट सत्र में भी मनरेगा पर चर्चा करने का इरादा रखते हैं और इन सभी के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से एक ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया था। बैठक के दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव ने मनरेगा पर एक प्रस्तुति दी। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत 15 करोड़ से अधिक परिवार और 26 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं।
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