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Pune Porsche Accident: सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता को दी जमानत, महाराष्ट्र सरकार का विरोध

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 10 Mar 2026 06:26 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पोर्श दुर्घटना मामले में आरोपी पिता विशाल अग्रवाल को जमानत दे दी है। उन पर बेटे को बचाने के लिए ब्लड सैंपल बदलवाने की साजिश का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि वे लंबे समय से जेल में हैं और अन्य सह-आरोपियों को भी राहत मिल चुकी है। कोर्ट ने उन्हें गवाहों से दूर रहने की हिदायत दी है।

Pune Porsche Accident Supreme Court grants bail to father of minor accused Maharashtra government opposes
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने पुणे के चर्चित पोर्श कार दुर्घटना मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मंगलवार को उस नाबालिग के पिता को जमानत दे दी, जिस पर 2024 में पुणे में शराब के नशे में पोर्श कार चलाकर दो लोगों की मौत का आरोप है। यह घटना 19 मई, 2024 की है, जब कथित तौर पर 17 वर्षीय लड़के द्वारा शराब के नशे में चलाई जा रही पोर्श कार ने पुणे के कल्याणी नगर इलाके में दो आईटी पेशेवरों को कुचल दिया था।
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आरोपी को मिली राहत
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने विशाल अग्रवाल को राहत दी है। विशाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए ब्लड सैंपल बदलवाने की साजिश रची थी। वे चाहते थे कि मेडिकल रिपोर्ट में शराब की पुष्टि न हो सके। टॉप कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले के दूसरे सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है। कोर्ट ने यह भी देखा कि आरोपी पिछले 22 महीनों से जेल में बंद है। बेंच ने आदेश दिया कि ट्रायल कोर्ट जो नियम और शर्तें तय करेगा, उनके आधार पर विशाल अग्रवाल को बेल दी जाए।
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सरकार ने किया विरोध
महाराष्ट्र सरकार ने इस जमानत का विरोध किया। सरकार का तर्क है कि विशाल अग्रवाल का मामला दूसरे आरोपियों जैसा नहीं है, इसलिए उन्हें बराबरी के आधार पर राहत नहीं मिलनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने विशाल अग्रवाल पर कुछ पाबंदियां भी लगाई हैं। कोर्ट ने उन्हें आदेश दिया है कि वे इस मामले के किसी भी गवाह से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। अगर वे किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो राज्य सरकार उनकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए।

इससे पहले 27 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ससून जनरल हॉस्पिटल के पूर्व मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अजय टावरे को भी जमानत दी थी। उन पर ब्लड सैंपल के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप था। कोर्ट ने 2 फरवरी को तीन अन्य आरोपियों-अमर सतीश गायकवाड़, आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल को भी जमानत दी थी। ये लोग करीब 18 महीनों से हिरासत में थे। आदित्य सूद और आशीष मित्तल पर अपने ब्लड सैंपल देने का आरोप था ताकि उनके बच्चों को बचाया जा सके, जो दुर्घटना के समय कार में मौजूद थे।

दस को भेजा गया था जेल
इस मामले की शुरुआत में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को बहुत आसान शर्तों पर जमानत दी थी। उसे सड़क सुरक्षा पर सिर्फ 300 शब्दों का निबंध लिखने को कहा गया था। इस फैसले के बाद पूरे देश में भारी गुस्सा देखा गया। इसके बाद पुणे पुलिस ने बोर्ड से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा। फिर नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, ब्लड सैंपल बदलने के मामले में विशाल अग्रवाल, उनकी पत्नी शिवानी अग्रवाल और डॉक्टरों समेत 10 लोगों को जेल भेजा गया था।

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