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CAPF: 'सत्ता में आए तो रद्द होगा सीएपीएफ कानून', बोले राहुल गांधी; साझा किया दिव्यांग जवान के साथ वीडियो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 02 Apr 2026 02:57 PM IST
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सार
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 बुधवार को राज्यसभा में पारित हो चुका है। इसे आज लोकसभा में पेश किया गया है। यहां से भी इसके आसानी से पारित होने की संभावना है। वहीं, सीएपीएफ बिल को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार इस बिल के जरिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट रही है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि अगर आगामी आम चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आती है, तो सीएपीएफ विधेयक 2026 को रद्द कर दिया जाएगा। राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक से मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अजय मलिक ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान आईईडी धमाके में अपना एक पैर खो दिया था देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया।
राहुल गांधी ने सीएपीएफ बिल पर खड़े किए सवाल
राहुल गांधी ने कहा, ''15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद - प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं। क्योंकि सभी शीर्ष पद आईपीएस अफसरों के लिए आरक्षित हैं। यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं - यह लाखों सीएपीएफ जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है।''
ये भी पढ़ें: कर्नाटक: लेक्चरर से नाम जोड़े जाने की अफवाहों से परेशान छात्रा ने दी जान, सुसाइड नोट में प्रोफेसर-पत्नी का नाम
उन्होंने आगे कहा, ''ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं। आतंक और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, लोकतंत्र के उत्सव चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं। लेकिन जब इनके अधिकार और सम्मान की बात आती है, तो व्यवस्था मुंह फेर लेती है।'' लोकसभा में नेता विपक्ष ने कहा, ''खुद सीएपीएफ के जवान इस भेदभाव के विरुद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। फिर भी वर्तमान सरकार इसी अन्याय को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर आमादा है।''
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट रही सरकार : राहुल गांधी
सीएपीएफ विधेयक पर कांग्रेस सांसद ने कहा, ''आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में किसी भी अर्धसैनिक बल का नेतृत्व ऐसे अधिकारी ने नहीं किया है जो अपने ही अर्धसैनिक बलों में निचले पदों से ऊपर उठा हो। ऐसा कोई अर्धसैनिक बल नहीं है जिसका नेतृत्व बल के भीतर से उभरा हो। शीर्ष नेतृत्व अर्धसैनिक बलों पर थोपा जाता है। यह पूरी तरह गलत है। हमने इसका विरोध किया है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसका विरोध किया है।''
उन्होंने कहा, ''सरकार एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को पलट रही है। यह सीएपीएफ के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है। मुझे समझ नहीं आता कि आप किसी ऐसे संगठन के मनोबल की रक्षा कैसे कर सकते हैं जो अपने ही किसी व्यक्ति को नेतृत्व के पद पर नहीं बिठा सकता। सरकार ने जो किया है वह अन्यायपूर्ण है। मुझे समझ नहीं आता कि सरकार ऐसा क्यों कर रही है।''
ये भी पढ़ें: मालदा की घटना पर भड़कीं सीएम ममता: बोलीं- 'मेरी सारी शक्तियां छीन लीं', चुनाव आयोग और भाजपा पर भी साधा निशाना
सरकार नहीं चाहती, मैं इस विधेयक पर बोलूं : कांग्रेस सांसद
उन्होंने कहा, ''इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं; शायद आजकल चुनाव हैं। वे यह विधेयक उसी दिन लाए जब मैं असम के दौरे पर था। मैंने सरकार को संदेश भेजकर इस विधेयक को एक-दो दिन के लिए टालने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। वे नहीं चाहते कि मैं संसद में इस विधेयक पर बोलूं। कांग्रेस का रुख सभी अर्धसैनिक बलों के साथ, और सत्ता में आने पर हम उन्हें न्याय दिलाएंगे।''
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राहुल गांधी ने कहा, ''15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद - प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं। क्योंकि सभी शीर्ष पद आईपीएस अफसरों के लिए आरक्षित हैं। यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं - यह लाखों सीएपीएफ जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है।''
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उन्होंने आगे कहा, ''ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं। आतंक और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, लोकतंत्र के उत्सव चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं। लेकिन जब इनके अधिकार और सम्मान की बात आती है, तो व्यवस्था मुंह फेर लेती है।'' लोकसभा में नेता विपक्ष ने कहा, ''खुद सीएपीएफ के जवान इस भेदभाव के विरुद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। फिर भी वर्तमान सरकार इसी अन्याय को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर आमादा है।''
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट रही सरकार : राहुल गांधी
सीएपीएफ विधेयक पर कांग्रेस सांसद ने कहा, ''आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में किसी भी अर्धसैनिक बल का नेतृत्व ऐसे अधिकारी ने नहीं किया है जो अपने ही अर्धसैनिक बलों में निचले पदों से ऊपर उठा हो। ऐसा कोई अर्धसैनिक बल नहीं है जिसका नेतृत्व बल के भीतर से उभरा हो। शीर्ष नेतृत्व अर्धसैनिक बलों पर थोपा जाता है। यह पूरी तरह गलत है। हमने इसका विरोध किया है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसका विरोध किया है।''
उन्होंने कहा, ''सरकार एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को पलट रही है। यह सीएपीएफ के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है। मुझे समझ नहीं आता कि आप किसी ऐसे संगठन के मनोबल की रक्षा कैसे कर सकते हैं जो अपने ही किसी व्यक्ति को नेतृत्व के पद पर नहीं बिठा सकता। सरकार ने जो किया है वह अन्यायपूर्ण है। मुझे समझ नहीं आता कि सरकार ऐसा क्यों कर रही है।''
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उन्होंने कहा, ''इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं; शायद आजकल चुनाव हैं। वे यह विधेयक उसी दिन लाए जब मैं असम के दौरे पर था। मैंने सरकार को संदेश भेजकर इस विधेयक को एक-दो दिन के लिए टालने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। वे नहीं चाहते कि मैं संसद में इस विधेयक पर बोलूं। कांग्रेस का रुख सभी अर्धसैनिक बलों के साथ, और सत्ता में आने पर हम उन्हें न्याय दिलाएंगे।''
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