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Railways: 100 रुपये की ट्रेन यात्रा, जेब से देने पड़ते हैं सिर्फ 57 रुपये, जानिए पूरा गणित

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Thu, 12 Mar 2026 06:55 PM IST
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सार

सरकार के अनुसार चार श्रेणियों के दिव्यांगजन, 11 प्रकार के मरीजों और आठ श्रेणियों के छात्रों को टिकट में अलग से रियायत का लाभ मिलता है। रेल किराया तय करते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।

Railways: Train journey of Rs 100, you have to pay only Rs 57 from your pocket, know the complete math
एनसीआर रेलवे ट्रेन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

देश में आम लोगों के लिए रेल यात्रा को किफायती बनाए रखने के लिए सरकार हर साल बड़ी राशि सब्सिडी के रूप में खर्च करती है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2024-25 में यात्रियों के टिकट पर 60,239 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है। केंद्रीय रेल मंत्री ने लोकसभा में बताया कि टिकट की वास्तविक लागत के मुकाबले यात्रियों को औसतन करीब 43 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है। लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया अगर किसी यात्रा की वास्तविक लागत 100 रुपये है तो यात्री से औसतन केवल 57 रुपये ही लिए जाते हैं, जबकि बाकी राशि सरकार की ओर से सब्सिडी के रूप में वहन की जाती है
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रेल मंत्रालय ने जानकारी दी यह सब्सिडी सभी यात्रियों को मिलती है। इसके अलावा कुछ श्रेणियों को टिकट में अतिरिक्त रियायत भी दी जाती है। इनमें दिव्यांगजन, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज और छात्रों की कई श्रेणियां शामिल हैं। सरकार के अनुसार चार श्रेणियों के दिव्यांगजन, 11 प्रकार के मरीजों और आठ श्रेणियों के छात्रों को टिकट में अलग से रियायत का लाभ मिलता है। रेल किराया तय करते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। इसमें सेवा की लागत, अन्य परिवहन साधनों से प्रतिस्पर्धा और आम लोगों की भुगतान क्षमता जैसे कारक शामिल होते हैं।
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मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि, टिकट किराए की जानकारी कोई व्यापारिक रहस्य नहीं है और यह पूरी तरह सार्वजनिक है। टिकट पर किराए के अलग-अलग हिस्सों जैसे मूल किराया, आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट शुल्क और टैक्स की जानकारी स्पष्ट रूप से दिखाई जाती है। वहीं, बुजुर्ग यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ विशेष व्यवस्था भी लागू की हैं। इसके तहत बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिला यात्रियों को उपलब्धता के आधार पर निचली बर्थ देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा स्लीपर और एसी कोच में कुछ निचली बर्थ इन श्रेणियों के यात्रियों के लिए आरक्षित रखी जाती हैं, ताकि यात्रा के दौरान उन्हें अधिक सुविधा मिल सके।

वंदे भारत का ऐसा तय होता किराया
मंत्रालय ने तय कि वंदे भारत स्लीपर का किराया प्रति यात्री प्रति किलोमीटर के आधार पर तय किया गया है। तीसरी वातानुकूलित श्रेणी के लिए यह दर 2.40 रुपये प्रति किलोमीटर रखी गई है, जिसमें कर शामिल नहीं है। उदाहरण के तौर पर यदि दूरी 1000 किलोमीटर है तो तीसरी एसी श्रेणी का किराया करीब 2400 रुपये होगा, जिस पर कर अलग से जोड़ा जाएगा।
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