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जोधपुर की बेटी की बड़ी जीत: 12 की उम्र में हुआ था विवाह, अब पाई आजादी; अदालत ने कुप्रथा के खिलाफ दिया संदेश
एजेंसी, जोधपुर
Published by: Shivam Garg
Updated Mon, 23 Mar 2026 05:40 AM IST
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जोधपुर की बेटी की बड़ी जीत
- फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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राजस्थान के जोधपुर की एक बेटी खुशबू ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ साहसिक लड़ाई लड़ते हुए समाज के लिए मिसाल पेश की है। परिवार न्यायालय ने करीब एक दशक पुराने इस विवाह को रद्द कर दिया।
खुशबू ने कहा अब वह आगे अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी। बीते सप्ताह खुशबू के विवाह को रद्द करते हुए परिवार न्यायालय के न्यायाधीश वरुण तलवार ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के वर्तमान और भविष्य दोनों को प्रभावित करता है और इसे समाप्त करने के लिए समाज को सामूहिक प्रयास करने होंगे।
खुशबू का विवाह वर्ष 2016 में हुआ था, उस समय वह महज 12 वर्ष की थी। बिश्नोई समुदाय से संबंध रखने वाली खुशबू ने बताया कि उस समय वह स्कूल में पढ़ती थी और उसे इस विवाह की गंभीरता का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था। उसने कहा कि यह निर्णय सामाजिक परंपराओं के दबाव में लिया गया, जिसमें उनके माता-पिता की भूमिका भी सीमित थी। जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, इस रिश्ते के मायने समझ में आने लगे और इसे स्वीकार न करने का फैसला किया। और कोर्ट की शरण में पहुंची।
ससुराल पक्ष से वैवाहिक जीवन शुरू करने का था दबाव
ससुराल पक्ष से वैवाहिक जीवन शुरू करने का दबाव बढ़ने पर खुशबू ने पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद उसकी मुलाकात सामाजिक कार्यकर्ता कृति भारती से हुई, जिन्होंने इस लड़ाई में उनका साथ दिया। करीब डेढ़ साल पहले खुशबू ने पारिवारिक न्यायालय में विवाह निरस्तीकरण की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान खुशबू ने उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश किए और बताया कि यह विवाह उनकी सहमति के बिना हुआ था। हालांकि, ससुराल पक्ष ने दावा किया कि विवाह बालिग होने के बाद हुआ, लेकिन अदालत ने उनके दावों को खारिज कर दिया।
आसान नहीं थी कानूनी लड़ाई
सामाजिक कार्यकर्ता कृति भारती ने बताया कि वर पक्ष को विवाह निरस्त करने के लिए राजी करना आसान नहीं था, क्योंकि यह परंपराओं और सामाजिक दबाव से जुड़ा मामला है। यह मामला उन कुप्रथाओं पर भी रोशनी डालता है, जिनके कारण आज भी बाल विवाह जैसी घटनाएं सामने आती हैं। मौसर (मृत्युभोज) जैसी रस्मों के दौरान कई बार सामूहिक विवाह कराए जाते हैं, जहां कानून की अनदेखी होती है और परिवार सामाजिक बहिष्कार के डर से विरोध नहीं कर पाते।
माध्यमिक परीक्षा की कर रही तैयारी
वहीं, खुशबू ने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर दी है और ओपन स्कूलिंग के माध्यम से माध्यमिक परीक्षा की तैयारी कर रही है। खुशबू का कहना है कि वह आत्मनिर्भर बनना चाहती है और अपनी बड़ी बहन के सपने को पूरा करना चाहती हैं।
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खुशबू ने कहा अब वह आगे अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी। बीते सप्ताह खुशबू के विवाह को रद्द करते हुए परिवार न्यायालय के न्यायाधीश वरुण तलवार ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के वर्तमान और भविष्य दोनों को प्रभावित करता है और इसे समाप्त करने के लिए समाज को सामूहिक प्रयास करने होंगे।
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खुशबू का विवाह वर्ष 2016 में हुआ था, उस समय वह महज 12 वर्ष की थी। बिश्नोई समुदाय से संबंध रखने वाली खुशबू ने बताया कि उस समय वह स्कूल में पढ़ती थी और उसे इस विवाह की गंभीरता का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था। उसने कहा कि यह निर्णय सामाजिक परंपराओं के दबाव में लिया गया, जिसमें उनके माता-पिता की भूमिका भी सीमित थी। जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, इस रिश्ते के मायने समझ में आने लगे और इसे स्वीकार न करने का फैसला किया। और कोर्ट की शरण में पहुंची।
ससुराल पक्ष से वैवाहिक जीवन शुरू करने का था दबाव
ससुराल पक्ष से वैवाहिक जीवन शुरू करने का दबाव बढ़ने पर खुशबू ने पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद उसकी मुलाकात सामाजिक कार्यकर्ता कृति भारती से हुई, जिन्होंने इस लड़ाई में उनका साथ दिया। करीब डेढ़ साल पहले खुशबू ने पारिवारिक न्यायालय में विवाह निरस्तीकरण की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान खुशबू ने उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश किए और बताया कि यह विवाह उनकी सहमति के बिना हुआ था। हालांकि, ससुराल पक्ष ने दावा किया कि विवाह बालिग होने के बाद हुआ, लेकिन अदालत ने उनके दावों को खारिज कर दिया।
आसान नहीं थी कानूनी लड़ाई
सामाजिक कार्यकर्ता कृति भारती ने बताया कि वर पक्ष को विवाह निरस्त करने के लिए राजी करना आसान नहीं था, क्योंकि यह परंपराओं और सामाजिक दबाव से जुड़ा मामला है। यह मामला उन कुप्रथाओं पर भी रोशनी डालता है, जिनके कारण आज भी बाल विवाह जैसी घटनाएं सामने आती हैं। मौसर (मृत्युभोज) जैसी रस्मों के दौरान कई बार सामूहिक विवाह कराए जाते हैं, जहां कानून की अनदेखी होती है और परिवार सामाजिक बहिष्कार के डर से विरोध नहीं कर पाते।
माध्यमिक परीक्षा की कर रही तैयारी
वहीं, खुशबू ने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर दी है और ओपन स्कूलिंग के माध्यम से माध्यमिक परीक्षा की तैयारी कर रही है। खुशबू का कहना है कि वह आत्मनिर्भर बनना चाहती है और अपनी बड़ी बहन के सपने को पूरा करना चाहती हैं।
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