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पीएम मोदी के दर पर पहुंचे रतन टाटा और साइरस मिस्त्री
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Sun, 30 Oct 2016 04:00 AM IST
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टाटा संस के अध्यक्ष पद से साइरस मिस्त्री के हटाये जाने के बाद साइरस मिस्त्री और टाटा संस के अंतरिम अध्यक्ष रतन टाटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अलग-अलग मुलाकात के लिए संपर्क किया है। मिस्त्री ने मुलाकात कर भी ली है। इससे पहले रतन टाटा ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिख कर स्थिति स्पष्ट की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी से जब मोदी की रतन टाटा से मुलाकात के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी बताने से इंकार किया।
टाटा संस के प्रवक्ता से भी अमर उजाला ने इस बारे में जानने का प्रयास किया तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से मना किया। लेकिन बताया जाता है कि प्रधानमंत्री ने दीपावली की वजह से फिलहाल उन्हें वक्त देने से मना किया है। हो सकता है कि उनसे अगले सप्ताह मुलाकात हो जाए। हालांकि इसी सप्ताह मंगलवार को मिस्त्री की मोदी की मुलाकात होने की खबर है। उस दिन साइरस मिस्त्री शपूरजी पलोनजी के निजी जेट विमान से दिल्ली आए थे और उसी दिन वापस लौट गए थे।
अमर उजाला ने बीते दिनों ही पाठकों को बताया था कि टाटा संस के प्रकरण पर सरकार की सतर्क निगाह है। इसकी पुष्टि केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने भी की थी। ऐसा होना भी लाजिमी है क्योंकि टाटा समूह देश के 6.5 लाख से भी अधिक लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार देता है जबकि अप्रत्यक्ष रूप से यह समूह एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को रोजी-रोटी देता है। यही नहीं, यह समूह सरकारी खजाने में भी साल में 40 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का राजस्व देता है।
बीते मंगलवार को ही रतन टाटा ने प्रधानमंत्री के साथ साथ अपने कर्मचारियों को भी एक भाव भरा पत्र लिखा था। प्रधानमंत्री को ट्विटर पर लिखे पत्र में टाटा ने कहा था, आपको सूचित कर रहा हूं कि टाटा संस ने अपनी बैठक में सायरस मिस्त्री को तुरंत प्रभाव से अध्यक्ष पद से हटा दिया है। मिस्त्री के स्थान पर एक नया प्रबंधन बनाया गया है और एक चयन समिति का गठन किया गया है, जो नये अध्यक्ष का चुनाव करेगी। समिति चार माह में इस प्रक्रिया को पूरा करेगी।
उन्होंने लिखा था कि इस दौरान प्रबंधन ने मुझसे कंपनी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा है और मैं टाटा समूह की स्थिरता और उसके प्रति विश्वास को बनाए रखने के लिए यह जिम्मेदारी उठाने को तैयार हूं। टाटा इससे पहले 1991 से 2012 तक, 21 साल समूह के अध्यक्ष रहे हैं।
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टाटा संस के प्रवक्ता से भी अमर उजाला ने इस बारे में जानने का प्रयास किया तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से मना किया। लेकिन बताया जाता है कि प्रधानमंत्री ने दीपावली की वजह से फिलहाल उन्हें वक्त देने से मना किया है। हो सकता है कि उनसे अगले सप्ताह मुलाकात हो जाए। हालांकि इसी सप्ताह मंगलवार को मिस्त्री की मोदी की मुलाकात होने की खबर है। उस दिन साइरस मिस्त्री शपूरजी पलोनजी के निजी जेट विमान से दिल्ली आए थे और उसी दिन वापस लौट गए थे।
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अमर उजाला ने बीते दिनों ही पाठकों को बताया था कि टाटा संस के प्रकरण पर सरकार की सतर्क निगाह है। इसकी पुष्टि केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने भी की थी। ऐसा होना भी लाजिमी है क्योंकि टाटा समूह देश के 6.5 लाख से भी अधिक लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार देता है जबकि अप्रत्यक्ष रूप से यह समूह एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को रोजी-रोटी देता है। यही नहीं, यह समूह सरकारी खजाने में भी साल में 40 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का राजस्व देता है।
बीते मंगलवार को ही रतन टाटा ने प्रधानमंत्री के साथ साथ अपने कर्मचारियों को भी एक भाव भरा पत्र लिखा था। प्रधानमंत्री को ट्विटर पर लिखे पत्र में टाटा ने कहा था, आपको सूचित कर रहा हूं कि टाटा संस ने अपनी बैठक में सायरस मिस्त्री को तुरंत प्रभाव से अध्यक्ष पद से हटा दिया है। मिस्त्री के स्थान पर एक नया प्रबंधन बनाया गया है और एक चयन समिति का गठन किया गया है, जो नये अध्यक्ष का चुनाव करेगी। समिति चार माह में इस प्रक्रिया को पूरा करेगी।
उन्होंने लिखा था कि इस दौरान प्रबंधन ने मुझसे कंपनी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा है और मैं टाटा समूह की स्थिरता और उसके प्रति विश्वास को बनाए रखने के लिए यह जिम्मेदारी उठाने को तैयार हूं। टाटा इससे पहले 1991 से 2012 तक, 21 साल समूह के अध्यक्ष रहे हैं।