'गाली नहीं, गोली का जवाब दो': आइसा अध्यक्ष बोलीं- भाषा को मुद्दा बना पैलेट गन के सवालों से क्यों बच रही सरकार?
आइसा अध्यक्ष नेहा ने जंतर-मंतर पर चले आंदोलन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सेना के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर माफी मांगने या उसकी निंदा करने से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि इस विवाद को जानबूझकर उछालकर 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर हुई पुलिस कार्रवाई, पेलेट गन के इस्तेमाल और जवाबदेही के मुद्दे से ध्यान भटकाया जा रहा है।
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विस्तार
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद तेज हो गया है। इस बीच वामपंथी छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा ने आंदोलन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर माफी मांगने या उसकी निंदा करने से साफ इनकार कर दिया। जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाली नेहा का आरोप है कि भाषा के विवाद को जानबूझकर उछालकर पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही, प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग और उससे जुड़े गंभीर सवालों से लोगों का ध्यान भटकाया जा रहा है।
क्या भाषा का विवाद असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है?
पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में नेहा ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों की भाषा को लेकर पैदा किया गया विवाद पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही से बचने का माध्यम बन गया है। आंदोलन के दौरान कुछ लोगों द्वारा इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया है। जबकि प्रदर्शन समाप्त होने के बाद कई लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी की जा रही है।
रुचिका सिंह पर एफआईआर को लेकर नेहा ने क्या कहा?
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा 15 वर्षीय प्रदर्शनकारी रुचिका सिंह की हुई, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। नेहा ने इसे 'चुनिंदा आक्रोश'करार देते हुए कहा कि केवल एक पक्ष की भाषा पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा,'आपको हमारी भाषा इतनी आपत्तिजनक लगती है। लेकिन जब धर्मेंद्र प्रधान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को 'आतंकवादी' कहा था, तब क्या वह आपको आपत्तिजनक नहीं लगा? क्या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई? जब नितिन नवीन ने हमें 'वायरस' कहा, तब किसी ने कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की?'नेहा ने आगे कहा कि चर्चा प्रदर्शनकारियों की भाषा पर नहीं, बल्कि उनके साथ हुई कथित हिंसा पर होनी चाहिए।
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन क्यों चलाई गई?
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने नेहा ने कहा कि सबसे पहले मैं उन लोगों से कहना चाहती हूं जो हमसे इस भाषा की निंदा करने को कहते हैं कि हम आपका यह खेल नहीं खेलेंगे। आप इसलिए यह मुद्दा उठा रहे हैं क्योंकि हम अमित शाह और पुलिस आयुक्त से जवाब मांग रहे हैं। आपको लगता है कि छात्रों पर पेलेट गन चलाना छोटा मुद्दा है और रुचिका का बयान बड़ा मुद्दा है। हम आज भी जवाब चाहते हैं कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन क्यों चलाई गई? सुरक्षा बलों को पेलेट गन क्यों दी गई? जिन डंडों से प्रदर्शनकारियों को मारा गया, उन पर कीलें क्यों लगी थीं?"
क्या नेताओं की टिप्पणी पर भी समान कार्रवाई हुई?
नेहा ने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों के खिलाफ नेताओं द्वारा दिए गए कथित अपमानजनक बयानों पर वैसी प्रतिक्रिया नहीं हुई जैसी प्रदर्शनकारियों की भाषा पर देखने को मिली। जब संसद के भीतर आपके लोग हमारे खिलाफ अपमानजनक भाषा बोलते हैं और जब RSS के एक विचारक कहते हैं कि 'जंतर-मंतर पर दुष्कर्म पसंद करने वाली महिलाएं प्रदर्शन कर रही थीं', तब वह आपको अशोभनीय नहीं लगता?
क्या प्रदर्शनकारी महिलाओं को अलग तरह से निशाना बनाया जा रहा है?
नेहा ने आरोप लगाया कि उन्हें और रुचिका सिंह को सोशल मीडिया पर कई दुष्कर्म की धमकियां मिलीं। यह दमन लैंगिक स्वरूप का है। रुचिका के खिलाफ छह एफआईआर दर्ज की गई हैं और उन्हें दुष्कर्म की धमकियां मिल रही हैं। यह महिला प्रदर्शनकारियों को अलग तरीके से निशाना बनाने का उदाहरण है।' नेहा का दावा है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए प्रदर्शनकारियों के बीच जाति, धर्म और लिंग के आधार पर विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
क्या आंदोलन हर प्रदर्शनकारी की भाषा का समर्थन करता है?
नेहा ने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी भी प्रदर्शनकारी द्वारा बोले गए हर शब्द का समर्थन नहीं करता, लेकिन पूरे आंदोलन को केवल भाषा के विवाद तक सीमित कर देना उचित नहीं है। देश के सामने असली सवाल यह नहीं है कि किसी ने कोई अपशब्द कहा या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे आम नागरिकों पर पेलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया जा सकता है? लोगों को इसी बात से विचलित होना चाहिए।
20 जुलाई की कार्रवाई को लेकर दोनों पक्ष क्या कह रहे हैं?
पेपर लीक विरोधी आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिसमें पेलेट गन और अन्य बल प्रयोग शामिल थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि सुरक्षा बलों ने कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की।
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रुचिका सिंह के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
इस सप्ताह रुचिका सिंह के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें नोएडा में दर्ज एक जीरो एफआईआर भी शामिल है, जिसे आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए हैं, जो जानबूझकर अपमान करने, लोक शांति भंग करने वाले बयान देने और मानहानि से संबंधित हैं।