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आरजी कर अस्पताल में 'सिस्टम का कत्ल': नशे में धुत थे लिफ्ट ऑपरेटर, जांच में बड़ा खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 27 Mar 2026 11:31 AM IST
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सार

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल लिफ्ट हादसे की जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हादसे के वक्त ड्यूटी पर तैनात तीनों लिफ्ट ऑपरेटर शराब के नशे में धुत थे। बिना किसी ट्रेनिंग के भर्ती किए गए इन ऑपरेटरों की लापरवाही ने एक कीमती जान ले ली। 
 

rg kar lift death investigation operators drunk on duty
आरजी कर अस्पताल में लिफ्ट हादसा - फोटो : @IANS
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विस्तार

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुए लिफ्ट हादसे ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 मार्च की उस काली रात को जब अरूप बंदोपाध्याय अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब उनकी मदद के लिए तैनात तीनों लिफ्ट ऑपरेटर नशे में इस कदर चूर थे कि उन्हें अपनी सुध-बुध तक नहीं थी।
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नशे में धुत्त था स्टाफ, गायब थे पहरेदार
कोलकाता पुलिस की जांच के मुताबिक, हादसे के वक्त ड्यूटी पर तैनात तीनों कर्मचारी पूरी तरह से नशे में थे। वे इस स्थिति में भी नहीं थे कि लिफ्ट का बटन दबा सकें, रेस्क्यू करना तो दूर की बात है। सीसीटीवी फुटेज ने इस लापरवाही पर मुहर लगा दी है। फुटेज से पता चला है कि आधी रात के बाद एक भी ऑपरेटर अपनी पोस्ट पर मौजूद नहीं था। जब पीड़ित लिफ्ट में फंसा था, तब ये लोग कहीं और शराब के नशे में मदहोश पड़े थे।
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बिना ट्रेनिंग के थमा दी गई जिम्मेदारी
हैरत की बात यह है कि इन तीनों ऑपरेटरों को काम पर रखने से पहले कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई। महज एक महीने पहले ही एक नई एजेंसी के जरिए इनकी भर्ती हुई थी। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुद कबूल किया कि उन्हें आपातकालीन स्थिति से निपटना नहीं आता था। अगर उनको ट्रेनिंग दी गई होती, तो बेसमेंट का ताला तोड़कर पीड़ित को बाहर निकाला जा सकता था।

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अस्पताल के भीतर का कल्चर
गिरफ्तार लिफ्ट ऑपरेटरों ने पुलिस को बताया कि आरजी कर अस्पताल में सहायक कर्मचारियों के बीच नाइट ड्यूटी के दौरान शराब पीना आम बात है। इस खुलासे के बाद से आरजी कर अस्पताल के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या मरीजों की जान ऐसे लोगों के भरोसे छोड़ी जा सकती है जो ड्यूटी को 'नशे का अड्डा' समझते हैं?

आउटसोर्सिंग का खेल 
बताया गया है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) ने लिफ्ट के रखरखाव और ऑपरेटरों का जिम्मा अलग-अलग निजी एजेंसियों को दे रखा है। फरवरी में ही पुरानी एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर नई एजेंसी को काम मिला था। इसी फेरबदल के चक्कर में सुरक्षा को ताक पर रखकर अनुभवहीन लोगों को भर्ती कर लिया गया। इसका नतीजा हुआ क्या? एक बेगुनाह की मौत। फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।

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