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Sabarimala Temple: केरल चुनाव से पहले सबरीमाला का मुद्दा फिर गरमाया, वाम सरकार ने रुख साफ करने से किया इंकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Tue, 17 Feb 2026 06:12 PM IST
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सार

केरल में सबरीमाला मंदिर का मुद्दा चुनावी मुद्दे के रूप में बनकर उभर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मुद्दे पर फिर से सुनवाई शुरु की है।

Sabarimala issue resurfaces ahead of Kerala elections with Left government refusing to clarify its stand
सबरीमाला मंदिर - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

केरल सरकार ने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे अपना रुख साफ करने से मना कर दिया। कानून मंत्री पी राजीव और देवस्वओम मंत्री वी एन वासवन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कल को रिव्यू याचिकाओं पर विचार करने के लिए एक बेंच बनाई थी। लेकिन अभी तक सरकार से उसका रुख नहीं पूछा है। लेफ्ट के मंत्रियों ने कहा उन्होंने हमेशा भक्तों का साथ दिया है।

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वासवन ने कहा हम हमेशा भक्तों के साथ रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है। हम कभी भी भक्तों के खिलाफ नहीं खड़े होंगे। हालांकि, वासवन ने मीडिया के बार-बार पूछे गए सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया कि सरकार सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म वाली उम्र की महिलाओं के प्रवेश का समर्थन करेगी या विरोध करेगी।

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आगे पी राजीव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अब यह देखेगा कि क्या कोर्ट को खुद पूजा की जगहों पर पारंपरिक रीति-रिवाजों में दखल देने का कोई अधिकार है। इसलिए, इस समय सरकार से अपना पक्ष बताने के लिए कहना विसंगत है।

उन्होंने कहा हम लोकतंत्र के विशेषज्ञों और दूसरे जानकारों से सलाह करने के बाद फैसला लेंगे। उन्होंने महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर विपक्षी कांग्रेस की हां या ना में जवाब देने की मांग को खारिज कर दिया।

माकपा के महासचिव एम ए बेबी ने कहा कि अगर राज्य सरकार महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सफाई देना चाहती है, तो वह बातचीत करेगी और सही फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर पार्टी का मत नहीं मांगा है और कहा कि राज्य सरकार इसे देखेगी। पहाड़ी मंदिर में युवतियों की एंट्री को लेकर राज्य में पहले शुरू हुए विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूरी बातचीत के बाद फैसला लिया जाना चाहिए।

केरल में महिलाओं के सबरिमाला में प्रवेश का मुद्दा चुनावी मुद्दे के तौर पर फिर से केंद्र पर आ गया है, विपक्षी पार्टियां वाम सरकार से सफाई की मांग कर रही हैं, जिसने पहले इस कदम का समर्थन किया था, जिससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।

इस मुद्दे पर तब ज्यादा ध्यान गया जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केस फिर से खोला, जिसमें घोषणा की गई कि नौ जजों की बेंच सबरीमाला समेत धर्मों और पूजा की जगहों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़ी कई याचिकाओं पर आखिरी सुनवाई शुरू करेगी।

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