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Reservation Bill: 'महिला आरक्षण की आड़ में देश का राजनीतिक नक्शा बदलने की कोशिश', संजय राउत का सरकार पर आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Riya Dubey
Updated Wed, 15 Apr 2026 11:47 AM IST
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सार
संजय राउत ने प्रस्तावित परिसीमन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर देश का राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश हो रही है और इससे दक्षिण भारत में असंतोष बढ़ सकता है। उन्होंने इस पर जल्दबाजी न करने और सर्वदलीय चर्चा की मांग की।
संजय राउत
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
उद्धव गुट के सांसद संजय राउत ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर देश का राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश की जा रही है, जिससे पूरे देश का राजनीतिक नक्शा प्रभावित हो सकता है।
इस मुद्दे पर उन्होंने एन चंद्रबाबू नायडू और एमके स्टालिन का जिक्र करते हुए कहा कि अगर आत्मसम्मान बचा है तो ऐसे परिसीमन का विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आरक्षण को ऐतिहासिक बताने का दावा भी नया नहीं है, क्योंकि देश पहले ही इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने औरप्रतिभा पाटिल के राष्ट्रपति बनने जैसे ऐतिहासिक क्षण देख चुका है।
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा और सोनिया गांधी के रुख का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर गुमराह कर रही है और इसकी मंशा सही नहीं है।
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प्रस्ताव के पीछे सरकार की मंशा साफ नहीं
राउत ने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने और राज्यों को 815 व केंद्र शासित प्रदेशों को 35 सीटें देने के प्रस्ताव के पीछे सरकार की मंशा साफ नहीं है। उनका कहना है कि यह कदम केवल महिलाओं के सशक्तिकरण तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है।
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दक्षिण राज्यों में हो सकता है अंसतोष
उन्होंने दक्षिण भारतीय राज्यों में संभावित असंतोष को लेकर भी चेतावनी दी। राउत के मुताबिक, जिस तरह दक्षिण के राज्यों ने केंद्र को संकेत दिए हैं, उससे भविष्य में वहां अस्थिरता की स्थिति बन सकती है।इस मुद्दे पर उन्होंने एन चंद्रबाबू नायडू और एमके स्टालिन का जिक्र करते हुए कहा कि अगर आत्मसम्मान बचा है तो ऐसे परिसीमन का विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आरक्षण को ऐतिहासिक बताने का दावा भी नया नहीं है, क्योंकि देश पहले ही इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने औरप्रतिभा पाटिल के राष्ट्रपति बनने जैसे ऐतिहासिक क्षण देख चुका है।
सभी दलों की बैठक बुलाने पर जोर
वहीं, विपक्ष की रणनीति पर बात करते हुए राउत ने कहा कि इस बिल को जल्दबाजी में लाने के बजाय सभी दलों की बैठक बुलाई जानी चाहिए और संयुक्त संसदीय समिति (JPC) बनाकर इस पर चर्चा होनी चाहिए।ईडी की छापेमारी पर उठाए सवाल
इस बीच, आप नेता अशोक मित्तल के घर पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी पर भी राउत ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है।दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा और सोनिया गांधी के रुख का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर गुमराह कर रही है और इसकी मंशा सही नहीं है।
महिला आरक्षण का विचार 2013 में ही आ चुका था
तिवारी ने कहा कि महिला आरक्षण का विचार पहले ही 2013 में सामने आ चुका था और राजीव गांधी ने पंचायत और नगर निकायों में आरक्षण लागू कर इसकी नींव रखी थी। उन्होंने सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया और कहा कि इस पर व्यापक संसदीय चर्चा जरूरी है।
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