SC: 'जीवन के अधिकार के दायरे में किए गए खास विस्तार', न्यायमूर्ति गवई ने संविधान के पिछले 75 साल को किया याद
संविधान के 75 वर्षों की उपलब्धियों पर बातचीत करते हुए न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि अब तक सुप्रीम कोर्ट ने जीवन के अधिकार के दायरे में कई सुधार किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में रोज़ाना सैकड़ों नागरिक न्याय की तलाश में आते हैं, जो न्यायालय की ओर उनके विश्वास का साक्ष्य है।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई ने बुधवार को पिछले सालों में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जीवन अधिका के दायरो काे विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) के दायरे का विस्तार किया है और इसमें कई नए अधिकारों को शामिल किया है, जैसे कि मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार, स्वच्छ हवा या पानी का अधिकार, भोजन का अधिकार, और जलवायु परिवर्तन से सुरक्षा का अधिकार।
न्यायमूर्ति गवई ने 75वर्षों की उपलब्धियों पर की बात
संविधान के 75 वर्षों की उपलब्धियों पर बातचीत करते हुए न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि अब तक सुप्रीम कोर्ट ने जीवन के अधिकार के दायरे में कई सुधार किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में रोज़ाना सैकड़ों नागरिक न्याय की तलाश में आते हैं, जो इस संस्था में उनके विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि संविधान ने हर नागरिक को सशक्त बनाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से कई बदलाव किए। न्यायमूर्ति गवई ने भारतीय संविधान को सामाजिक लोकतंत्र का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह संविधान सामाजिक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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संविधान के फैसले का किया जिक्र
न्यायमूर्ति गवाई ने संविधान के महत्वपूर्ण फैसलों का भी जिक्र किया, जिनमें केशवानंद भारती और मिनर्वा मिल्स जैसे ऐतिहासिक मामले शामिल हैं। इन फैसलों में संविधान के मूल सिद्धांतों को बनाए रखने की बात की गई थी, जिनमें संविधान की सर्वोच्चता और सरकार के गणतांत्रिक स्वरूप का संरक्षण शामिल है।
साथ ही न्यायमूर्ति गवई ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा संविधान के अनुसार न्याय करने की कोशिश की और यह सिद्धांत कि मौलिक अधिकार और राज्य नीति के सिद्धांतों के बीच संतुलन होना चाहिए, भारत के संविधान के बुनियादी ढांचे की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
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सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं की सराहना की
अंत में न्यायमूर्ति गवई ने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं की सराहना की। साथ ही उन्होंने कहा कि उनके योगदान से न्यायपालिका के कर्तव्यों को निभाने में मदद मिलती है। साथ ही, एससीएओआरए द्वारा शुरू किए गए ई-जर्नल और वेबसाइट को कानूनी ज्ञान के प्रसार में मदद करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बताया।