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'अलग-अलग झंडे, एक ही तरीका': भाजपा और कांग्रेस पर क्यों भड़कीं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि? जानें पूरी बात
Mon, 27 Jul 2026 09:59 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 27 Jul 2026 09:59 PM IST
सार
गीतांजलि आंगमो ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर आलोचकों को फर्जी टैग देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि देश को सिर्फ सरकार बदलने की नहीं, बल्कि राजनीति का तरीका बदलने की जरूरत है। वहीं 26 दिन का अनशन खत्म करने के बाद वांगचुक ने राजघाट जाकर गांधीवादी रास्ते को सबसे प्रभावी बताया।
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गीतांजलि जे आंगमो
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो ने देश की वर्तमान राजनीति पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों को आड़े हाथों लिया। गीतांजलि ने कहा कि दोनों ही राजनीतिक दल अपने आलोचकों को दबाने के लिए एक जैसी तरकीब अपनाते हैं।
सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि अलग-अलग झंडे होने के बावजूद दोनों पार्टियों का तरीका एक जैसा ही है। देश की पूरी राजनीतिक संस्कृति में खराबी आ चुकी है। भारत को केवल सरकार बदलने की जरूरत नहीं है, बल्कि राजनीति का व्याकरण बदलने की जरूरत है।
क्या है नेताओं की ट्रोलिंग का पूरा सच?
गीतांजलि ने दोनों राजनीतिक दलों के समर्थकों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, तब भाजपा के समर्थकों ने उन्हें देशद्रोही, चीनी एजेंट और विदेशी फंडिंग पाने वाला बता दिया था।
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उन्होंने आगे कहा कि जब मैंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन को दिखावटी और गैर-गंभीर बताया, तो कांग्रेस के समर्थकों ने मुझे 'संघी' और 'भाजपा का चमचा' कहना शुरू कर दिया। गीतांजलि का कहना है कि असहमति का जवाब बातचीत से मिलना चाहिए, न कि किसी को बदनाम करके। देशभक्ति को पार्टी के प्रति वफादारी से नहीं, बल्कि ईमानदारी से मापा जाना चाहिए।
यह भी पढ़ें: केस लड़ेंगे कपिल सिब्बल, फंड जुटाने के लिए वेबसाइट: सीजेपी ने शुरू किया नया अभियान, क्या है पूरी योजना?
अनशन खत्म होने के बाद राजघाट क्यों पहुंचे वांगचुक?
दूसरी ओर, 26 दिनों का अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक को 27 जुलाई (सोमवार) को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। वे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती थे, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर उन्हें निजी अस्पताल स्थानांतरित किया गया था।
अस्पताल से बाहर आते ही वांगचुक सबसे पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट पहुंचे। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि सौ साल पहले गांधी जी द्वारा दिखाया गया सत्याग्रह का रास्ता आज भी उतना ही सच और प्रासंगिक है। वांगचुक ने जोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसका सम्मान होना चाहिए।
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सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि अलग-अलग झंडे होने के बावजूद दोनों पार्टियों का तरीका एक जैसा ही है। देश की पूरी राजनीतिक संस्कृति में खराबी आ चुकी है। भारत को केवल सरकार बदलने की जरूरत नहीं है, बल्कि राजनीति का व्याकरण बदलने की जरूरत है।
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क्या है नेताओं की ट्रोलिंग का पूरा सच?
गीतांजलि ने दोनों राजनीतिक दलों के समर्थकों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, तब भाजपा के समर्थकों ने उन्हें देशद्रोही, चीनी एजेंट और विदेशी फंडिंग पाने वाला बता दिया था।
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उन्होंने आगे कहा कि जब मैंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन को दिखावटी और गैर-गंभीर बताया, तो कांग्रेस के समर्थकों ने मुझे 'संघी' और 'भाजपा का चमचा' कहना शुरू कर दिया। गीतांजलि का कहना है कि असहमति का जवाब बातचीत से मिलना चाहिए, न कि किसी को बदनाम करके। देशभक्ति को पार्टी के प्रति वफादारी से नहीं, बल्कि ईमानदारी से मापा जाना चाहिए।
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अनशन खत्म होने के बाद राजघाट क्यों पहुंचे वांगचुक?
दूसरी ओर, 26 दिनों का अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक को 27 जुलाई (सोमवार) को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। वे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती थे, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर उन्हें निजी अस्पताल स्थानांतरित किया गया था।
अस्पताल से बाहर आते ही वांगचुक सबसे पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट पहुंचे। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि सौ साल पहले गांधी जी द्वारा दिखाया गया सत्याग्रह का रास्ता आज भी उतना ही सच और प्रासंगिक है। वांगचुक ने जोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसका सम्मान होना चाहिए।