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Supreme Court: बैंक खाते फ्रीज करने के नियमों पर आज सुनवाई, सीजेआई की पीठ के समक्ष रखी गई याचिका
ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 19 Jan 2026 07:14 AM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट साइबर अपराध के मामलों में बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने की प्रक्रिया पर एक समान नियम बनाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगी। पूरा मामला क्या है, पढ़िए-
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने की प्रक्रिया से जुड़ी एक अहम याचिका को चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष रखने का निर्देश दिया है। यह याचिका केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से इस विषय पर एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की मांग करती है।
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ को केंद्र की ओर से बताया गया कि इसी मुद्दे पर सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ पहले से ही एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है, जो डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़ा है। इसके बाद अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह चीफ जस्टिस सूर्यकांत से निर्देश लेकर मामला उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करे। सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी के आदेश में कहा था कि याचिका की प्रार्थना ‘बी’ और ‘सी’ पहले से ही दूसरे मामले में विचाराधीन हैं।
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बिना कारणयुक्त आदेश के बैंक खाता फ्रीज न करने की मांग
प्रार्थना ‘बी’ में मांग की गई है कि बिना लिखित और कारणयुक्त आदेश के किसी भी बैंक खाते को फ्रीज न किया जाए और 24 घंटे के भीतर खाताधारक को इसकी सूचना दी जाए। वहीं, प्रार्थना ‘सी’ में पूरे देश में लागू होने वाली एसओपी बनाने की मांग की गई है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के बैंक खाते केंद्र सरकार ने फ्रीज नहीं किए हैं। इससे पहले 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की प्रति केंद्र को देने और मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया था।
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बिना कारणयुक्त आदेश के बैंक खाता फ्रीज न करने की मांग
प्रार्थना ‘बी’ में मांग की गई है कि बिना लिखित और कारणयुक्त आदेश के किसी भी बैंक खाते को फ्रीज न किया जाए और 24 घंटे के भीतर खाताधारक को इसकी सूचना दी जाए। वहीं, प्रार्थना ‘सी’ में पूरे देश में लागू होने वाली एसओपी बनाने की मांग की गई है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के बैंक खाते केंद्र सरकार ने फ्रीज नहीं किए हैं। इससे पहले 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की प्रति केंद्र को देने और मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया था।