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SC Updates: महिला वकीलों के प्रतिनिधित्व पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; सिख धार्मिक संपत्तियों पर PIL सुनने से इनकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 20 May 2026 03:02 PM IST
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Supreme Court, representation by women lawyers; refuses to hear PIL on Sikh religious properties, Updates
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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महिला वकीलों को सरकारी कानूनी पैनलों और लॉ ऑफिसर पदों में 30 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट की याचिका पर नोटिस जारी किए।

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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि महिला वकीलों की स्थिति पर SCBA के सर्वे के बाद यह याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि महिलाओं की कानून की पढ़ाई में भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन सरकारी पैनलों और उच्च पदों पर उनकी हिस्सेदारी बेहद कम है।

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याचिका के अनुसार, स्वतंत्रता के 75 वर्षों में अब तक कोई महिला अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल नहीं बनी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या लगभग 5.88 प्रतिशत और हाई कोर्ट में 13.76 प्रतिशत है। याचिका में केंद्र, राज्यों और पीएसयू को निर्देश देने की मांग की गई है कि सभी सरकारी कानूनी पैनलों में महिलाओं को कम से कम 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

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धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, सिख संपत्तियों पर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर में सिख धार्मिक और विरासत संपत्तियों की सुरक्षा, ऑडिट और नियमन को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता चरणजीत सिंह को अपनी मांग संसद की याचिका समिति के सामने उठाने की सलाह दी।

याचिकाकर्ता चरणजीत सिंह, जो एक दिल्ली स्थित सिख संस्था से जुड़े बताए गए, ने खुद अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत से नोटिस जारी करने की अपील करते हुए पीठ के सामने नतमस्तक भी हुए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत के दरवाजे हमेशा खुले हैं, लेकिन याचिका में उठाए गए मुद्दे कानून में संशोधन और नीतिगत फैसलों से जुड़े हैं, जो संसद के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

पीठ ने कहा कि यदि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करती है तो इसे धार्मिक मामलों में दखल के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि यदि संसदीय समिति से संतोषजनक समाधान नहीं मिलता है तो वह दोबारा सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं।

याचिका में राष्ट्रीय खालसाई सिख विरासत संरक्षण प्राधिकरण गठित करने, सिख धार्मिक संपत्तियों की सूची तैयार करने, सीएजी से विशेष ऑडिट कराने तथा कथित अवैध लेनदेन की जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग की गई थी।

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