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क्या जेल से बाहर आएगा अबू सलेम?: समय पूर्व रिहाई की लगाई गुहार, सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
Mon, 27 Jul 2026 02:15 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 27 Jul 2026 02:15 PM IST
सार
साल 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी अबू सलेम ने जेल में 25 साल पूरे होने का हवाला देकर समय से पहले रिहाई की गुहार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब कोर्ट यह तय करेगा कि उसे जेल में बिताई अवधि का लाभ मिलेगा या नहीं। पढ़िए रिपोर्ट-
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अबू सलेम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने 1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अबू सलेम जेल में 25 साल पूरे कर चुका है। इसी आधार पर उसने समय से पहले रिहाई की मांग की।
अबू सलेम के वकील ने क्या दलील दी?
ये भी पढ़ें: ऑनलाइन होगी नीट परीक्षा?: सुप्रीम कोर्ट को हाई पॉवर्ड टास्क फोर्स की सिफारिश का इंतजार, 3 अगस्त को अगली सुनवाई
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सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया था इनकार
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। साथ ही उसे बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की अनुमति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट यह देखे कि पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार अबू सलेम ने जेल में कितनी अवधि पूरी की है और उसी के आधार पर उसकी सजा की अवधि की गणना की जाए।
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अबू सलेम के वकील ने क्या दलील दी?
- सुनवाई के दौरान अबू सलेम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि जेल प्रशासन ने उसे विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बिताई अवधि का लाभ नहीं दिया।
- उन्होंने कहा कि टाडा अदालत ने साफ निर्देश दिया था कि विचाराधीन कैदी के रूप में बिताए गए पूरे समय को उसकी सजा में जोड़ा जाए।
- वकील ने कहा, टाडा अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद जेल प्रशासन मुझे उस अवधि का लाभ नहीं दे रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया था इनकार
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। साथ ही उसे बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की अनुमति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट यह देखे कि पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार अबू सलेम ने जेल में कितनी अवधि पूरी की है और उसी के आधार पर उसकी सजा की अवधि की गणना की जाए।