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Supreme Court: पुलिस पर CJP प्रदर्शन में छात्रों से ज्यादती के आरोप, याचिकाओं पर सोमवार को अदालत करेगी सुनवाई
Sun, 26 Jul 2026 09:06 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 26 Jul 2026 09:06 PM IST
सार
नीट पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है। इससे पहले अदालत ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने पर सहमति दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कथित ज्यादती से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट की 27 जुलाई की कार्यसूची के अनुसार, इन याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ सुनवाई करेगी।
24 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले का जिक्र किए जाने के बाद इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी। याचिकाओं का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ से कहा था, "पुलिस छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल कर रही है।" उन्होंने बताया था कि देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं।
नीट प्रदर्शन के दौरान क्यों हुई थी झड़प?
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि इन याचिकाओं को 27 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। नीट पेपर लीक के विरोध में छात्र कई राज्यों में प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी।
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संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद सीजेपी ने अपना 36 दिनों से जारी आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा था कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें "गहरा दुख पहुंचाया" है और यह मामला "व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं" है।
22 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया था। इनमें सीसीटीवी फुटेज और घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी शामिल है।
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24 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले का जिक्र किए जाने के बाद इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी। याचिकाओं का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ से कहा था, "पुलिस छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल कर रही है।" उन्होंने बताया था कि देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं।
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नीट प्रदर्शन के दौरान क्यों हुई थी झड़प?
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि इन याचिकाओं को 27 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। नीट पेपर लीक के विरोध में छात्र कई राज्यों में प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी।
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संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद सीजेपी ने अपना 36 दिनों से जारी आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा था कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें "गहरा दुख पहुंचाया" है और यह मामला "व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं" है।
22 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया था। इनमें सीसीटीवी फुटेज और घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी शामिल है।