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SC Updates: 18 मार्च को बलवंत सिंह की याचिका पर सुनवाई; यौन अपराध मामलों में जजों के लिए बनेंगी नई गाइडलाइन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 18 Feb 2026 03:00 PM IST
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Supreme Court Updates, Beant Singh assassination case, National Judicial Academy, Updates in Hindi
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या मामले में दोषी बलवंत सिंह राजोआना की याचिका पर 18 मार्च को सुनवाई की जाएगी। राजोआना ने अपनी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की है। उसका कहना है कि उसकी दया याचिका पर फैसला करने में बहुत ज्यादा देरी हुई है।
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राजोआना करीब 29 साल से जेल में बंद है और 15 साल से ज्यादा समय से डेथ रो में है। उसके वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए। वहीं केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें जवाब देने के लिए थोड़ा समय चाहिए। यह मामला 31 अगस्त 1995 के बम धमाके से जुड़ा है, जिसमें बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हुई थी। 2007 में एक विशेष अदालत ने राजोआना को फांसी की सजा सुनाई थी। राजोआना की दया याचिका 2012 में दायर की गई थी, लेकिन अभी तक उस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसी देरी को आधार बनाकर उसने अब सजा कम करने की मांग की है।
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यौन अपराध मामलों में जजों के लिए बनेंगी नई गाइडलाइन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यौन अपराध जैसे संवेदनशील मामलों में जजों का रवैया ज्यादा संवेदनशील और मानवीय होना चाहिए। इसी वजह से अदालत ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का निर्देश दिया है। यह समिति जजों के लिए नई गाइडलाइन तैयार करेगी। कोर्ट ने कहा कि इन दिशा-निर्देशों में यह बताया जाएगा कि जज ऐसे मामलों में पीड़ितों, गवाहों और शिकायतकर्ताओं के साथ कैसे व्यवहार करें। अदालत ने यह भी कहा कि रिपोर्ट सरल भाषा में बनाई जाए ताकि आम लोग भी उसे आसानी से समझ सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में अलग-अलग भाषाएं और बोलियां हैं, इसलिए कई बार लोग अपमानजनक शब्दों को समझ नहीं पाते। समिति से ऐसे शब्दों की सूची बनाने को भी कहा गया है, ताकि पीड़ित अपनी बात साफ तरीके से रख सकें। यह निर्देश उस मामले की सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने गलत मानते हुए रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि न्याय प्रणाली में संवेदनशीलता और इंसानियत बहुत जरूरी है।
 
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