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Supreme Court: तेलंगाना के विधानसभा स्पीकर को कोर्ट की फटकार; 2019 के अवमानना मामले में वकील की याचिका खारिज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 06 Feb 2026 04:22 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तेलंगाना के विधानसभा अध्यक्ष को अंतिम चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी, अगर वह तीन हफ्ते के भीतर कांग्रेस में बीआरएस के 10 विधायकों के दलबदल से जुड़ी शेष अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में विफल रहता है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एजी मसील की बेंच ने सुनवाई की। बेंच ने विधायकों की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी पेश हुए। जस्टिस करोल ने सिंघवी से कहा, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप इसकी रील न बनाएं। यही हो रहा है। ऐसा मत कीजिए। असल में यह एक नया उद्योग है।
सिंघवी ने कहा कि एक (अयोग्यता याचिका पर) मामले फैसला लिया गया है, जबकि विधानसभा अध्यक्ष के दो अन्य मामलों में फैसला लेने के करीब हैं। वरिष्ठ वकील सिंघवी ने देरी का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में निगम चुनाव हैं। उन्होंने सभी लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने के लिए समय मांगा। इस पर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायकों के वकील ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने पहले भी समय मांगा था और इस संबंध में अब तक उनकी ओर से केवल एक ही बैठक की गई है। जस्टिस करोल ने कहा कि पिछली सुनवाई में अध्यक्ष ने तीन हफ्ते का समय मांगा था। लेकिन कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते का समय दिया था, ताकि वे स्थिति को देख सकें। जज ने कहा, हम विधानसभा अध्यक्ष से सकारात्मक फैसले की अपेक्षा करते हैं, अन्यथा हम अवमानना की कार्रवाई करेंगे।
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जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एजी मसील की बेंच ने सुनवाई की। बेंच ने विधायकों की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी पेश हुए। जस्टिस करोल ने सिंघवी से कहा, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप इसकी रील न बनाएं। यही हो रहा है। ऐसा मत कीजिए। असल में यह एक नया उद्योग है।
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सिंघवी ने कहा कि एक (अयोग्यता याचिका पर) मामले फैसला लिया गया है, जबकि विधानसभा अध्यक्ष के दो अन्य मामलों में फैसला लेने के करीब हैं। वरिष्ठ वकील सिंघवी ने देरी का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में निगम चुनाव हैं। उन्होंने सभी लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने के लिए समय मांगा। इस पर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायकों के वकील ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने पहले भी समय मांगा था और इस संबंध में अब तक उनकी ओर से केवल एक ही बैठक की गई है। जस्टिस करोल ने कहा कि पिछली सुनवाई में अध्यक्ष ने तीन हफ्ते का समय मांगा था। लेकिन कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते का समय दिया था, ताकि वे स्थिति को देख सकें। जज ने कहा, हम विधानसभा अध्यक्ष से सकारात्मक फैसले की अपेक्षा करते हैं, अन्यथा हम अवमानना की कार्रवाई करेंगे।
शीर्ष कोर्ट ने वकील की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने आज 2019 के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसकी समकक्ष बेंच ने एक वकील को कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका विचार करने योग्य नहीं है।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने याचिकाकर्ता और स्वयं पेश हुए वकील मैथ्यूज जे. नेदुम्पारा से पूछा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत समान बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की जा सकती है। बेंच ने यह भी पूछा कि किस आधार पर यह याचिका सुनवाई योग्य है। नेदुम्पारा ने कहा कि कोर्ट का कर्तव्य है कि वह किसी भी गलत फैसले में सुधार करे।
इस पर बेंच ने कहा, हमें इसे केवल इस आधार पर खारिज करना होगा कि यह विचार के योग्य नहीं है। एक बार जब यह विचार के योग्य नहीं है, तो हम मामले के गुण-दोष पर नहीं जा सकते। इसके बाद बेंच ने नेदुम्पारा से पूछा कि क्या उन्होंने मार्च 2019 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। नेदुम्पारा ने कहा, मैंने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट से उसका रिकॉर्ड गायब है। इस पर सीजेआई ने कहा, यह मत कहिए कि रिकॉर्ड गायब है। क्या आपने कभी सीजेआई से इसकी शिकायत की? याचिका को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता यह स्पष्ट नहीं कर सकता कि याचिका किस तरह विचार के योग्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने आज 2019 के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसकी समकक्ष बेंच ने एक वकील को कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका विचार करने योग्य नहीं है।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने याचिकाकर्ता और स्वयं पेश हुए वकील मैथ्यूज जे. नेदुम्पारा से पूछा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत समान बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की जा सकती है। बेंच ने यह भी पूछा कि किस आधार पर यह याचिका सुनवाई योग्य है। नेदुम्पारा ने कहा कि कोर्ट का कर्तव्य है कि वह किसी भी गलत फैसले में सुधार करे।
इस पर बेंच ने कहा, हमें इसे केवल इस आधार पर खारिज करना होगा कि यह विचार के योग्य नहीं है। एक बार जब यह विचार के योग्य नहीं है, तो हम मामले के गुण-दोष पर नहीं जा सकते। इसके बाद बेंच ने नेदुम्पारा से पूछा कि क्या उन्होंने मार्च 2019 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। नेदुम्पारा ने कहा, मैंने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट से उसका रिकॉर्ड गायब है। इस पर सीजेआई ने कहा, यह मत कहिए कि रिकॉर्ड गायब है। क्या आपने कभी सीजेआई से इसकी शिकायत की? याचिका को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता यह स्पष्ट नहीं कर सकता कि याचिका किस तरह विचार के योग्य है।
सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश- वकील की पेशी सुनिश्चित करें
सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह वकील मुकुट नाथ वर्मा की अदालत में पेशी सुनिश्चित करें। आरोप है कि वकील वर्मा ने शीर्ष कोर्ट के जजों और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) चुनाव कराने के लिए गठित चुनाव समिति के सदस्यों के खिलाफ आपत्तिजनक औऱ बेबुनिया आरोप लगाए हैं।
सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को एससीबीए अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह व ससीबीए की चुनाव समिति के प्रमुख वरिष्ठ वकील विजय हंसरिया ने बताया कि दिल्ली पुलिस वकील के खिलाफ पहले जारी किए गए जमानती वारंट को तामील कराने और उनका पता लगाने में असमर्थ रही है। कोर्ट एससीबीए में सुधारों को लेकर दायर 2023 की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह वकील मुकुट नाथ वर्मा की अदालत में पेशी सुनिश्चित करें। आरोप है कि वकील वर्मा ने शीर्ष कोर्ट के जजों और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) चुनाव कराने के लिए गठित चुनाव समिति के सदस्यों के खिलाफ आपत्तिजनक औऱ बेबुनिया आरोप लगाए हैं।
सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को एससीबीए अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह व ससीबीए की चुनाव समिति के प्रमुख वरिष्ठ वकील विजय हंसरिया ने बताया कि दिल्ली पुलिस वकील के खिलाफ पहले जारी किए गए जमानती वारंट को तामील कराने और उनका पता लगाने में असमर्थ रही है। कोर्ट एससीबीए में सुधारों को लेकर दायर 2023 की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
