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Tamil Nadu: 'विकसित भारत गारंटी' योजना का सीएम विजय ने किया विरोध, पीएम मोदी को लिखा पत्र; जानें क्या है वजह
Thu, 02 Jul 2026 01:55 AM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 02 Jul 2026 01:55 AM IST
सार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने प्रस्तावित 'विकसित भारत गारंटी' योजना का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से राज्य पर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और इससे अन्य योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित 'विकसित भारत गारंटी' योजना का कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस नए ढांचे को लागू करने से राज्य सरकार पर 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर योजना के नियमों में बदलाव की मांग की है।
फंडिंग के बोझ पर उठाई चिंता
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में कहा कि 'विकसित भारत गारंटी' (VB G RAMG) अधिनियम, 2025 के कुछ प्रावधानों में सुधार की जरूरत है। उन्होंने बताया कि वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार, मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक खर्चों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का अनुपात तय किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले दो दशकों से ग्रामीण रोजगार योजना (MGNREGS) एक अलग ढांचे पर चल रही थी। अचानक किए गए इस बदलाव से राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ेगा। इससे या तो लोगों को मिलने वाले रोजगार के दिन कम हो जाएंगे या फिर अन्य जरूरी कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
फंडिंग के नए फॉर्मूले का सुझाव
मुख्यमंत्री ने मांग की है कि मजदूरी और प्रशासनिक खर्चों के लिए केंद्र सरकार 100 प्रतिशत फंडिंग जारी रखे। वहीं, निर्माण सामग्री से जुड़े खर्चों को केंद्र और राज्य के बीच 75:25 के अनुपात में साझा किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि बिना इन बदलावों के ग्रामीण आबादी को रोजगार देने में काफी मुश्किलें आएंगी।
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केंद्रीकरण और खेती से जुड़ी चुनौतियां
मुख्यमंत्री ने पंचायतों के वर्गीकरण और फंड के वितरण के लिए अपनाई जा रही केंद्रीय पद्धति की भी आलोचना की। उन्होंने इसे 'माइक्रोमैनेजमेंट' करार देते हुए कहा कि पूरे देश के लिए एक जैसा फॉर्मूला सही नहीं है। हर क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिति अलग होती है, इसलिए राज्यों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से फंड बांटने की आजादी मिलनी चाहिए।
ये भी पढ़ें: इस महीने कब आएगा पीएम-सीएम को पद से हटाने वाला बिल?: संसदीय समिति की मुहर जल्द संभव, जानें क्या है मामला
इसके अलावा, उन्होंने खेती के पीक सीजन के दौरान 60 दिनों तक काम बंद रखने के नियम पर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और 'अल नीनो' के कारण खेती का समय अब निश्चित नहीं रहता। ऐसे में पहले से तय 60 दिनों के लिए काम रोकना सही नहीं है, क्योंकि मजदूरों को कभी भी रोजगार की जरूरत पड़ सकती है।
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फंडिंग के बोझ पर उठाई चिंता
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में कहा कि 'विकसित भारत गारंटी' (VB G RAMG) अधिनियम, 2025 के कुछ प्रावधानों में सुधार की जरूरत है। उन्होंने बताया कि वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार, मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक खर्चों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का अनुपात तय किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले दो दशकों से ग्रामीण रोजगार योजना (MGNREGS) एक अलग ढांचे पर चल रही थी। अचानक किए गए इस बदलाव से राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ेगा। इससे या तो लोगों को मिलने वाले रोजगार के दिन कम हो जाएंगे या फिर अन्य जरूरी कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
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फंडिंग के नए फॉर्मूले का सुझाव
मुख्यमंत्री ने मांग की है कि मजदूरी और प्रशासनिक खर्चों के लिए केंद्र सरकार 100 प्रतिशत फंडिंग जारी रखे। वहीं, निर्माण सामग्री से जुड़े खर्चों को केंद्र और राज्य के बीच 75:25 के अनुपात में साझा किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि बिना इन बदलावों के ग्रामीण आबादी को रोजगार देने में काफी मुश्किलें आएंगी।
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केंद्रीकरण और खेती से जुड़ी चुनौतियां
मुख्यमंत्री ने पंचायतों के वर्गीकरण और फंड के वितरण के लिए अपनाई जा रही केंद्रीय पद्धति की भी आलोचना की। उन्होंने इसे 'माइक्रोमैनेजमेंट' करार देते हुए कहा कि पूरे देश के लिए एक जैसा फॉर्मूला सही नहीं है। हर क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिति अलग होती है, इसलिए राज्यों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से फंड बांटने की आजादी मिलनी चाहिए।
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इसके अलावा, उन्होंने खेती के पीक सीजन के दौरान 60 दिनों तक काम बंद रखने के नियम पर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और 'अल नीनो' के कारण खेती का समय अब निश्चित नहीं रहता। ऐसे में पहले से तय 60 दिनों के लिए काम रोकना सही नहीं है, क्योंकि मजदूरों को कभी भी रोजगार की जरूरत पड़ सकती है।