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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, कर्नाटक सरकार पर लगाया मनामानी करने का आरोप

Mon, 03 Aug 2026 03:32 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, चेन्नई
एएनआई, चेन्नई Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 03 Aug 2026 03:32 PM IST
सार

कावेरी जल विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तमिलनाडु ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक ने CWMA और CWRC के आदेशों के बावजूद निर्धारित मात्रा में पानी नहीं छोड़ा। राज्य का दावा है कि कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद उसे उसका उचित हिस्सा नहीं दिया जा रहा है। इसी आधार पर तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप कर समयबद्ध तरीके से पानी दिलाने की मांग की है।
 

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Tamil Nadu moves Supreme Court on  Cauvery Water Dispute accuses Karnataka government of acting arbitrarily
तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच कावेरी विवाद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए कर्नाटक सरकार को कावेरी नदी का निर्धारित जल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है। राज्य का आरोप है कि कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के स्पष्ट आदेशों का पालन नहीं किया, जिससे तमिलनाडु को उसका तय जल हिस्सा नहीं मिल सका।

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आखिर सुप्रीम कोर्ट जाने की नौबत क्यों आई?
तमिलनाडु मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्देश दिया। सरकार का कहना है कि CWMA और CWRC के निर्देशों के बावजूद कर्नाटक ने कावेरी जल का निर्धारित हिस्सा नहीं छोड़ा, जिसके कारण न्यायालय की शरण लेना आवश्यक हो गया।
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CWRC ने कर्नाटक को क्या निर्देश दिए थे?
28 जुलाई 2026 को हुई CWRC की 139वीं बैठक में कावेरी बेसिन की जल-विज्ञान और मौसम संबंधी परिस्थितियों की समीक्षा की गई। इसके बाद समिति ने कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह कृष्णराज सागर (KRS) और काबिनी जलाशयों से पानी छोड़कर 29 जुलाई से 12 अगस्त 2026 के बीच बिलिगुंड्लु में 3,500 क्यूसेक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करे। इस फैसले को 30 जुलाई को आयोजित CWMA की 54वीं आपात बैठक में भी मंजूरी दे दी गई।
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आदेश के बावजूद कितना पानी पहुंचा?
तमिलनाडु सरकार का दावा है कि 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंड्लु में वास्तविक जल प्रवाह केवल 158 से 550 क्यूसेक के बीच रहा, जो CWRC और CWMA द्वारा तय मात्रा से काफी कम था। सरकार का आरोप है कि कर्नाटक ने प्राधिकरणों के निर्देशों का पालन नहीं किया।

क्या कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त पानी मौजूद है?
विज्ञप्ति के अनुसार, अगस्त 2026 की शुरुआत तक कर्नाटक के प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण उपलब्ध था। इसमें कृष्णराज सागर (KRS) में 23.078 TMC, काबिनी में 18.610 TMC, हरंगी में 7.827 TMC और हेमावती में 28.022 TMC पानी मौजूद था। इस प्रकार कुल जल भंडारण 77.537 TMC था, जिसमें से 67.517 TMC उपयोग योग्य बताया गया। तमिलनाडु का कहना है कि ऐसे में कर्नाटक के सामने पानी छोड़ने में कोई व्यावहारिक कठिनाई नहीं है।

तमिलनाडु ने अपने हिस्से के पानी को लेकर क्या दावा किया है?
राज्य सरकार का कहना है कि KRS और काबिनी जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश होने के कारण तमिलनाडु को आनुपातिक आधार पर बिलिगुंड्लु में 26.954 TMC पानी मिलना चाहिए। सरकार के मुताबिक यह मात्रा CWMA द्वारा निर्धारित 4.536 TMC से भी काफी अधिक है।

मुख्यमंत्री ने क्या निर्देश दिए?
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कर्नाटक लगातार तमिलनाडु को उसका उचित जल हिस्सा देने में विफल रहा है। वरिष्ठ कानूनी सलाहकारों की राय लेने के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में उचित कानूनी राहत मांगने का निर्देश दिया।


ये भी पढ़ें: Explainer: क्या है कावेरी जल विवाद, जिसके लिए बड़ी तैयारी में कर्नाटक सीएम शिवकुमार; तमिलनाडु से टकराव क्यों?

सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की गई है?
3 अगस्त को तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अदालत से अनुरोध किया है कि इस विवाद के समाधान के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि तमिलनाडु को निर्धारित समयसीमा के भीतर कावेरी नदी के पानी में उसका वैधानिक और उचित हिस्सा प्राप्त हो।

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