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Telangana: करीमनगर में 66 तोला सोना और 21 लाख की लूट, हथियारबंद गिरोह ने कैसे दिया वारदात को अंजाम?
Wed, 22 Jul 2026 03:07 PM IST
निर्मल कांत
आईएएनएस, हैदराबाद।
आईएएनएस, हैदराबाद।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 22 Jul 2026 03:07 PM IST
सार
Telangana: तेलंगाना के करीमनगर में हथियारबंद लुटेरों ने एक घर में घुसकर 66 तोला सोना, 21 लाख रुपये नकद और चांदी लूट ली। जानिए कैसे बुजुर्ग परिवार को बंधक बनाकर वारदात को अंजाम दिया गया और जांच में सुबोध सिंह गिरोह का नाम कैसे सामने आया।
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जांच में जुटी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तेलंगाना के करीमनगर कस्बे में हुई एक बड़ी लूट की घटना में हथियारबंद गिरोह ने घर के सदस्यों को चाकू और रिवॉल्वर से धमकाकर 66 तोला सोने के आभूषण, नकदी और अन्य कीमती सामान लूट लिया। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात भगत नगर इलाके में करीब आठ अज्ञात लोगों के एक गिरोह ने इस लूट की वारदात को अंजाम दिया।
नकाबपोश लुटेरे उस समय घर में घुस आए, जब मकान मालिक अजमत अली सोने से पहले लाइट बंद करने के लिए पहली मंजिल से नीचे आए थे। लुटेरों ने बुजुर्ग अजमत अली को पकड़ लिया और उनका मुंह टेप से बांध दिया। इसके बाद वे उन्हें घर के अंदर ले गए और उनकी जमकर पिटाई की।
परिवार को कैसे बनाया बंधक?
अपराधियों ने अली की पत्नी और उनकी दो बेटियों के साथ भी मारपीट की। चाकू और रिवॉल्वर से लैस लुटेरों ने धमकी दी कि अगर किसी ने शोर मचाया तो वे उन्हें मार डालेंगे। सभी लोगों को बांधने के बाद गिरोह ने 66 तोला सोने के आभूषण, 21 लाख रुपये नकद और 10 तोला चांदी लूट ली।
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भागने से पहले उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को एक कमरे में बंद कर दिया। उन्होंने परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन भी छीन लिए, ताकि वे पुलिस को सूचना न दे सकें और किसी से मदद न मांग सकें। गिरोह भूतल पर खड़ी दो मोटरसाइकिलें भी चोरी कर ले गया।
पुलिस को शक है कि लुटेरे वेमुलावाड़ा बाईपास के रास्ते फरार हुए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि लुटेरे नकाब पहने हुए थे और उत्तर भारतीय लहजे में हिंदी बोल रहे थे।
लुटेरों ने इसी घर को क्यों बनाया निशाना?
लुटेरों ने इस घर को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वहां रहने वाले ज्यादातर लोग बुजुर्ग और महिलाएं थीं। ऐसा लगता है कि उन्हें घर के मालिक की दिनचर्या और घर में रखे सोने के आभूषणों और नकदी के बारे में पहले से जानकारी थी। करीमनगर में तीन महीने से भी कम समय में यह दूसरी बड़ी लूट की घटना है।
करीमनगर में पहले कब हुई थी बड़ी लूट?
3 मई को दिनदहाड़े लुटेरों के एक गिरोह ने पीएमजे ज्वैलरी शॉप में लूटपाट की और गोलीबारी की, जिसमें चार कर्मचारी घायल हो गए। लुटेरे 161 तोला सोने के आभूषण और 112 कैरेट के हीरे लेकर फरार हो गए।
ये भी पढ़ें: कल्याण बनर्जी पूरे मानसून सत्र के लिए लोकसभा से निलंबित, TMC सांसद पर क्या लगे हैं आरोप?
सुबोध सिंह गिरोह का नाम कैसे आया?
गहन जांच के बाद पुलिस को पता चला कि इस वारदात में बिहार के कुख्यात सुबोध सिंह गिरोह की संलिप्तता है। पुलिस ने गिरोह के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।
गिरोह कितना बड़ा नेटवर्क चलाता था?
पुलिस के अनुसार, सुबोध सिंह ने पूर्णिया जेल में रहते हुए ही डकैती की योजना बनाई थी। सुबोध सिंह गिरोह बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड में लूट की कई घटनाओं में शामिल रहा है। यह गिरोह सुनियोजित तरीके से डकैती करने के लिए कुख्यात है।
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पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात भगत नगर इलाके में करीब आठ अज्ञात लोगों के एक गिरोह ने इस लूट की वारदात को अंजाम दिया।
नकाबपोश लुटेरे उस समय घर में घुस आए, जब मकान मालिक अजमत अली सोने से पहले लाइट बंद करने के लिए पहली मंजिल से नीचे आए थे। लुटेरों ने बुजुर्ग अजमत अली को पकड़ लिया और उनका मुंह टेप से बांध दिया। इसके बाद वे उन्हें घर के अंदर ले गए और उनकी जमकर पिटाई की।
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परिवार को कैसे बनाया बंधक?
अपराधियों ने अली की पत्नी और उनकी दो बेटियों के साथ भी मारपीट की। चाकू और रिवॉल्वर से लैस लुटेरों ने धमकी दी कि अगर किसी ने शोर मचाया तो वे उन्हें मार डालेंगे। सभी लोगों को बांधने के बाद गिरोह ने 66 तोला सोने के आभूषण, 21 लाख रुपये नकद और 10 तोला चांदी लूट ली।
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भागने से पहले उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को एक कमरे में बंद कर दिया। उन्होंने परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन भी छीन लिए, ताकि वे पुलिस को सूचना न दे सकें और किसी से मदद न मांग सकें। गिरोह भूतल पर खड़ी दो मोटरसाइकिलें भी चोरी कर ले गया।
पुलिस को शक है कि लुटेरे वेमुलावाड़ा बाईपास के रास्ते फरार हुए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि लुटेरे नकाब पहने हुए थे और उत्तर भारतीय लहजे में हिंदी बोल रहे थे।
लुटेरों ने इसी घर को क्यों बनाया निशाना?
लुटेरों ने इस घर को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वहां रहने वाले ज्यादातर लोग बुजुर्ग और महिलाएं थीं। ऐसा लगता है कि उन्हें घर के मालिक की दिनचर्या और घर में रखे सोने के आभूषणों और नकदी के बारे में पहले से जानकारी थी। करीमनगर में तीन महीने से भी कम समय में यह दूसरी बड़ी लूट की घटना है।
करीमनगर में पहले कब हुई थी बड़ी लूट?
3 मई को दिनदहाड़े लुटेरों के एक गिरोह ने पीएमजे ज्वैलरी शॉप में लूटपाट की और गोलीबारी की, जिसमें चार कर्मचारी घायल हो गए। लुटेरे 161 तोला सोने के आभूषण और 112 कैरेट के हीरे लेकर फरार हो गए।
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सुबोध सिंह गिरोह का नाम कैसे आया?
गहन जांच के बाद पुलिस को पता चला कि इस वारदात में बिहार के कुख्यात सुबोध सिंह गिरोह की संलिप्तता है। पुलिस ने गिरोह के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।
गिरोह कितना बड़ा नेटवर्क चलाता था?
पुलिस के अनुसार, सुबोध सिंह ने पूर्णिया जेल में रहते हुए ही डकैती की योजना बनाई थी। सुबोध सिंह गिरोह बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड में लूट की कई घटनाओं में शामिल रहा है। यह गिरोह सुनियोजित तरीके से डकैती करने के लिए कुख्यात है।