{"_id":"6a7dabcb36754c337b020e13","slug":"tmc-holds-government-accountable-monsoon-session-questions-data-2026-08-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"हंगामे की भेंट चढ़ा मानसून सत्र: TMC का दावा- हमने पूछे 180 से ज्यादा सवाल; सरकार से इन मुद्दों पर मांगा जवाब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
हंगामे की भेंट चढ़ा मानसून सत्र: TMC का दावा- हमने पूछे 180 से ज्यादा सवाल; सरकार से इन मुद्दों पर मांगा जवाब
Thu, 13 Aug 2026 05:04 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 13 Aug 2026 05:04 PM IST
सार
संसद के मानसून सत्र में भारी हंगामे के बीच टीएमसी सांसदों ने 180 से अधिक सवाल पूछकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। बैंक फ्रॉड, बेरोजगारी, मनरेगा बकाया और निर्भया फंड में कटौती जैसे आंकड़ों ने सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टीएमसी ने क्या-क्या दावे किए हैं? जानिए...
विज्ञापन
संसद का मानसूुन सत्र
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
संसद का मानसून सत्र भले ही हंगामे की भेंट चढ़ गया हो, लेकिन तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि उसके सांसदों ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पार्टी का कहना है कि सत्र बाधित होने के बावजूद उन्होंने जनता से जुड़े कड़े सवाल पूछकर केंद्र सरकार की जवाबदेही तय की है।
टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि विपक्षी दल जंतर-मंतर और बिहार में छात्रों पर हुए हमलों पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे। सरकार ने जब यह मांग नहीं मानी, तो सत्र की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। इसके बावजूद, टीएमसी और इंडिया गठबंधन ने एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाई।
TMC सांसदों के सवालों का क्या हुआ असर?
पार्टी का दावा है कि संसद सत्र के दौरान टीएमसी सांसदों ने दोनों सदनों में मिलाकर 180 से ज्यादा सवाल पूछे। पार्टी का कहना है कि सरकार के आधिकारिक जवाबों ने ही कई अहम मुद्दों पर स्थिति साफ कर दी है।
विज्ञापन
तृणमूल कांग्रेस के दावे के मुताबिक, कल्याण बनर्जी के सवाल पर सरकार ने बताया कि 2025-26 तक का बकाया साफ कर दिया गया है। हालांकि, पश्चिम बंगाल का ₹1,457 करोड़ का मजदूरी बकाया अभी भी पेंडिंग है। सागरिका घोष के सवाल पर आरबीआई का डाटा सामने आया। इसके मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में ₹1.42 लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड हुआ। वहीं, वसूली सिर्फ ₹6,400 करोड़ की हो सकी। महुआ मोइत्रा के सवाल पर सरकार ने स्वीकार किया कि देश में युवाओं की बेरोजगारी दर 8.3 प्रतिशत है।
वहीं, कीर्ति आजाद के सवाल पर सामने आया कि शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) घटकर एक अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है। सरकार ने इसका कारण भारतीय निवेश का बाहर जाना और पूंजी की वापसी बताया।
यह भी पढ़ें: AAP छोड़ने पर हरभजन का बड़ा खुलासा: बोले- मेरी बात नहीं सुनी गई; 'गद्दार' कहने वालों से पूछा- मैंने क्या किया?
किन अन्य बड़े मुद्दों पर घिरी सरकार?
पार्टी के अनुसार, टीएमसी सांसदों ने देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई अन्य संवेदनशील मुद्दे भी संसद में उठाए। नदीमुल हक के सवाल पर सरकार ने माना कि 2019 में कारपोरेट टैक्स में दी गई छूट से सालाना ₹75,000 करोड़ से ₹98,000 करोड़ का राजस्व प्रभाव पड़ा।
मेनका गुरुस्वामी के सवाल पर सरकार ने बताया कि कुल व्यापार में व्यापार घाटा 2023-24 में 4.5 प्रतिशत था, जो 2024-25 में 5.4 प्रतिशत और 2025-26 में बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गया। वहीं, सौगत रॉय के सवाल पर खुलासा हुआ कि देश के बिजली प्रोजेक्ट्स में चीन की सात कंपनियों की हिस्सेदारी है। इनमें गुजरात में तीन, आंध्र प्रदेश में दो, महाराष्ट्र में एक और मध्य प्रदेश में एक प्रोजेक्ट शामिल है।
निर्भया फंड में कटौती?
इतना ही नहीं, टीएमसी ने दावा किया कि राजीव कुमार के सवाल के जवाब में पता चला कि निर्भया फंड का वार्षिक आवंटन 2020-21 के ₹1,355 करोड़ से घटकर 2025-26 में ₹278 करोड़ रह गया है। अन्य प्रमुख सवालों में अभिषेक बनर्जी ने ई20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान की चिंता जताई। डेरेक ओ'ब्रायन ने सीवर सफाईकर्मियों का ब्योरा मांगा। साजिदा अहमद ने कृषि सब्सिडी और समीरुल इस्लाम ने कुरमी समाज की भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मुद्दा उठाया।
विज्ञापन
टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि विपक्षी दल जंतर-मंतर और बिहार में छात्रों पर हुए हमलों पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे। सरकार ने जब यह मांग नहीं मानी, तो सत्र की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। इसके बावजूद, टीएमसी और इंडिया गठबंधन ने एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाई।
विज्ञापन
TMC सांसदों के सवालों का क्या हुआ असर?
पार्टी का दावा है कि संसद सत्र के दौरान टीएमसी सांसदों ने दोनों सदनों में मिलाकर 180 से ज्यादा सवाल पूछे। पार्टी का कहना है कि सरकार के आधिकारिक जवाबों ने ही कई अहम मुद्दों पर स्थिति साफ कर दी है।
विज्ञापन
तृणमूल कांग्रेस के दावे के मुताबिक, कल्याण बनर्जी के सवाल पर सरकार ने बताया कि 2025-26 तक का बकाया साफ कर दिया गया है। हालांकि, पश्चिम बंगाल का ₹1,457 करोड़ का मजदूरी बकाया अभी भी पेंडिंग है। सागरिका घोष के सवाल पर आरबीआई का डाटा सामने आया। इसके मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में ₹1.42 लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड हुआ। वहीं, वसूली सिर्फ ₹6,400 करोड़ की हो सकी। महुआ मोइत्रा के सवाल पर सरकार ने स्वीकार किया कि देश में युवाओं की बेरोजगारी दर 8.3 प्रतिशत है।
वहीं, कीर्ति आजाद के सवाल पर सामने आया कि शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) घटकर एक अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है। सरकार ने इसका कारण भारतीय निवेश का बाहर जाना और पूंजी की वापसी बताया।
यह भी पढ़ें: AAP छोड़ने पर हरभजन का बड़ा खुलासा: बोले- मेरी बात नहीं सुनी गई; 'गद्दार' कहने वालों से पूछा- मैंने क्या किया?
किन अन्य बड़े मुद्दों पर घिरी सरकार?
पार्टी के अनुसार, टीएमसी सांसदों ने देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई अन्य संवेदनशील मुद्दे भी संसद में उठाए। नदीमुल हक के सवाल पर सरकार ने माना कि 2019 में कारपोरेट टैक्स में दी गई छूट से सालाना ₹75,000 करोड़ से ₹98,000 करोड़ का राजस्व प्रभाव पड़ा।
मेनका गुरुस्वामी के सवाल पर सरकार ने बताया कि कुल व्यापार में व्यापार घाटा 2023-24 में 4.5 प्रतिशत था, जो 2024-25 में 5.4 प्रतिशत और 2025-26 में बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गया। वहीं, सौगत रॉय के सवाल पर खुलासा हुआ कि देश के बिजली प्रोजेक्ट्स में चीन की सात कंपनियों की हिस्सेदारी है। इनमें गुजरात में तीन, आंध्र प्रदेश में दो, महाराष्ट्र में एक और मध्य प्रदेश में एक प्रोजेक्ट शामिल है।
निर्भया फंड में कटौती?
इतना ही नहीं, टीएमसी ने दावा किया कि राजीव कुमार के सवाल के जवाब में पता चला कि निर्भया फंड का वार्षिक आवंटन 2020-21 के ₹1,355 करोड़ से घटकर 2025-26 में ₹278 करोड़ रह गया है। अन्य प्रमुख सवालों में अभिषेक बनर्जी ने ई20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान की चिंता जताई। डेरेक ओ'ब्रायन ने सीवर सफाईकर्मियों का ब्योरा मांगा। साजिदा अहमद ने कृषि सब्सिडी और समीरुल इस्लाम ने कुरमी समाज की भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मुद्दा उठाया।