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Unmute Bharat: 'चढ़ावा चोरी सनातन समाज के साथ छल, यह चूक नहीं, बड़ा पाप', बोले स्वामी अवधेशानंद गिरी

Tue, 07 Jul 2026 05:31 AM IST
Rajkishor राजकिशोर
Updated Tue, 07 Jul 2026 05:31 AM IST
सार

जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद को श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल दोषियों की पहचान पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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Unmute Bharat Ram Mandir Donation Theft Swami Avdheshanand Giri says grave sin deception Sanatan society
अयोध्या से जुड़े विवाद पर जूना पीठाधीश्वर क्या बोले - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने राम मंदिर के चंदे और ट्रस्ट से जुड़े हालिया विवाद पर अब तक की सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता या चोरी का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज की आस्था और विश्वास के साथ छल का है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल चूक नहीं, बड़ा पाप है। दोषियों को कठोरतम दंड मिलना चाहिए और जिन लोगों की निगरानी में यह सब हुआ, उन्हें भी अपनी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
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अमर उजाला के विशेष पॉडकास्ट अनम्यूट भारत में स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि भगवान राम के नाम पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने जिस विश्वास के साथ दान दिया, उसी विश्वास को चोट पहुंची है। हम बहुत आहत हैं। पूरा समाज उद्वेलित है। जिन लोगों पर भगवान की निधि और श्रद्धालुओं के दान की सुरक्षा का दायित्व था, उन्हीं के रहते ऐसी बातें सामने आना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि केवल चोरी करने वालों को पकड़ लेना पर्याप्त नहीं होगा। जिन लोगों के संरक्षण, नियंत्रण और निगरानी में पूरी व्यवस्था संचालित हो रही थी, उन्हें भी यह स्वीकार करना चाहिए कि उनके आलस्य, प्रमाद और अनदेखी ने पूरे हिंदू समाज को छला हुआ महसूस कराया है। यह केवल चूक नहीं है, बड़ा पाप हुआ है। इसका प्रायश्चित होना चाहिए और भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर व्यवस्था भी बननी चाहिए।
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अयोध्या सनातन का सर्वोच्च प्रतिमान
स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा और सनातन चेतना का सर्वोच्च प्रतिमान है। भगवान राम के नाम पर बने मंदिर में यदि पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं तो उसका असर केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया भर के हिंदुओं की आस्था पर पड़ता है। उन्होंने कहा, राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय आस्था केंद्र में अब ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हो।

सरकार सीधे हस्तक्षेप करे : स्वामी ने कहा कि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार को सीधे हस्तक्षेप कर पूरी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने एक ऐसे पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र की वकालत की, जिसमें वित्तीय प्रबंधन से लेकर निगरानी तक हर स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय हो। उन्होंने प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता और सीएम योगी की तत्परता का उल्लेख करते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व निश्चित रूप से ऐसा समाधान निकालेगा, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो।


भक्ति प्रदर्शन नहीं, आचरण से सिद्ध होती है
स्वामी अवधेशानंद ने आज की धार्मिक प्रवृत्तियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मंदिरों और तीर्थों में उमड़ती भीड़ स्वागतयोग्य है, लेकिन यदि श्रद्धालु वहां गंदगी फैलाते हैं, सोशल मीडिया पर प्रदर्शन को ही भक्ति समझने लगते हैं या तीर्थों की गरिमा और व्यवस्था की अनदेखी करते हैं, तो यह धर्म नहीं,धर्म का आडंबर है। उन्होंने तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे जहां भी जाएं, वहां की पवित्रता, स्वच्छता और पर्यावरण का ध्यान रखें। गंगा, यमुना, वृक्ष और प्रकृति की पूजा तभी सार्थक है, जब उनके संरक्षण का संकल्प भी साथ हो। उन्होंने कहा कि नदियों को प्रदूषित कर और वृक्षों का विनाश कर कोई भी व्यक्ति सच्चे अर्थों में धार्मिक नहीं हो सकता।

युवाओं को संदेश...पॉजिटिव नहीं, रियलिस्टिक बनिए
आज के युवाओं की मानसिक चुनौतियों पर बात करते हुए स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि तत्काल सफलता की चाह ने नई पीढ़ी को अधीर बना दिया है। सोशल मीडिया ने स्वतंत्र चिंतन को कमजोर किया है। उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन योग, पर्याप्त नींद, प्राकृतिक आहार और अच्छे ग्रंथों के अध्ययन को जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि केवल सकारात्मक सोच नहीं, बल्कि यथार्थवादी दृष्टि ही जीवन में स्थायी सफलता दिला सकती है।
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