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Uttar Pradesh: बीते आठ साल में उत्तर प्रदेश में कितनी बदली कानून व्यवस्था, किन कदमों से लगी माफियाराज पर लगाम?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 24 Jan 2026 07:56 PM IST
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सार
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने किस तरह माफिया संस्कृति पर लगाम लगाई? इसके लिए सरकार की तरफ से क्या कदम उठाए गए? पुलिस ने कैसे अपराधियों से लेकर जमीन पर कब्जा करने वाले माफियाओं को 'मिट्टी में मिलाया'? आइये जानते हैं...
योगी शासन में कानून व्यवस्था।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद काफी परिवर्तन देखा गया है। राज्य में अपराध के रिकॉर्ड्स में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में शपथ लेने के साथ ही एलान किया था कि राज्य में उनका एक अहम मकसद गुंडों और माफियाओं के राज को खत्म करना होगा। प्रदेश की कानून व्यवस्था में आए बदलाव को लेकर हमने वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार से बात की। इस बताचीत में उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश ने देश के लिए मॉडल पेश किया है कि जहां शासन और अपराध पर्याय हो गया हो, जहां कि पुलिस माफियाओं को छूने से इसलिए डरती थी, क्योंकि उन्हें सत्ता का संरक्षण मिला था, उस पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। हमारी पुलिस मशीनरी राजनीतिक नेतृत्व की सोच के तहत काम करती है। तो एक बार पॉलिटिकल लीडरशिप ने सोच लिया कि हमें अपराधियों को खत्म करना है तो पुलिस को जो स्वतंत्रता मिलती है, उसके परिणाम जरूर सामने आते हैं। हालांकि, इसके कुछ नकारात्मक असर भी देखने को मिलते हैं।"
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आंकड़े क्या कहते हैं?
2017 से लेकर अब तक के सरकारी आंकड़ों को देखें तो बीते करीब नौ वर्षों में पुलिस ने करीब 15 हजार से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं, जिनमें 256 अपराधियों की मौत हुई है। इसके अलावा 10 हजार से ज्यादा अपराधी इन मुठभेड़ों में घायल हुए। करीब 32 हजार अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं। अगर जोन वार आंकड़ों को देखा जाए तो सामने आता है कि सबसे ज्यादा एनकाउंटर मेरठ जोन में हुए, जिसे एक समय पश्चिमी यूपी में माफियाओं का गढ़ कहा जाता था। यहां 4453 एनकाउंटर हुए, जिसमें तीन हजार से ज्यादा अपराधी घायल हुए और 85 की मौत हुई। इसके बाद वाराणसी का नंबर आता है, जहां पुलिस ने क्षेत्र को अपराध मुक्त बनाने के लिए 1100 से ज्यादा एनकाउंटर किए। इनमें 27 अपराधी मारे गए, 688 घायल हुए। इसी तरह आगरा, लखनऊ और प्रयागराज में भी पुलिस ने माफियाराज खत्म करने के लिए सख्त अभियान चलाए और एनएसए जैसे कठोर कानूनों के जरिए अपराधियों पर लगाम लगाई।
2017 से लेकर अब तक के सरकारी आंकड़ों को देखें तो बीते करीब नौ वर्षों में पुलिस ने करीब 15 हजार से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं, जिनमें 256 अपराधियों की मौत हुई है। इसके अलावा 10 हजार से ज्यादा अपराधी इन मुठभेड़ों में घायल हुए। करीब 32 हजार अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं। अगर जोन वार आंकड़ों को देखा जाए तो सामने आता है कि सबसे ज्यादा एनकाउंटर मेरठ जोन में हुए, जिसे एक समय पश्चिमी यूपी में माफियाओं का गढ़ कहा जाता था। यहां 4453 एनकाउंटर हुए, जिसमें तीन हजार से ज्यादा अपराधी घायल हुए और 85 की मौत हुई। इसके बाद वाराणसी का नंबर आता है, जहां पुलिस ने क्षेत्र को अपराध मुक्त बनाने के लिए 1100 से ज्यादा एनकाउंटर किए। इनमें 27 अपराधी मारे गए, 688 घायल हुए। इसी तरह आगरा, लखनऊ और प्रयागराज में भी पुलिस ने माफियाराज खत्म करने के लिए सख्त अभियान चलाए और एनएसए जैसे कठोर कानूनों के जरिए अपराधियों पर लगाम लगाई।
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नशे पर लगाम के लिए विशेष अभियान
अवधेश कुमार कहते हैं, "नेपाल से लगा होने की वजह से उत्तर प्रदेश में नारकोटिक्स (नशीले पदार्थों) की तस्करी बड़ी समस्या रही है। राज्य में बांग्लादेश से नेपाल के रास्ते ड्रग्स पहुंच रहा था। इससे निपटने के लिए एएनटीएफ थाने खोले गए। इसकी लखनऊ, मेरठ, आदि शहरों में शाखाएं बनाई गईं। ड्रग्स माफियाओं को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं। पिछले साल आठ सितंबर तक 2833 संदिग्ध आरोपियों को पकड़ा गया। इनमें 2479 के खिलाफ कार्रवाई हुई। करीब 40 करोड़ रुपये की बरामदगी हुई और इनकी 35.5 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई है। इन मामलों से जुड़े 188 लोगों को सजा दी गई। इसी तरह सरकार ने अवैध शराब बनाने वालों पर नकेल कसी। इन मामलों से जुड़ी 11 हजार से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ मुकदमे हुए। इनमें से कई के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धाराएं लगाई गईं।"
अवधेश कुमार कहते हैं, "नेपाल से लगा होने की वजह से उत्तर प्रदेश में नारकोटिक्स (नशीले पदार्थों) की तस्करी बड़ी समस्या रही है। राज्य में बांग्लादेश से नेपाल के रास्ते ड्रग्स पहुंच रहा था। इससे निपटने के लिए एएनटीएफ थाने खोले गए। इसकी लखनऊ, मेरठ, आदि शहरों में शाखाएं बनाई गईं। ड्रग्स माफियाओं को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं। पिछले साल आठ सितंबर तक 2833 संदिग्ध आरोपियों को पकड़ा गया। इनमें 2479 के खिलाफ कार्रवाई हुई। करीब 40 करोड़ रुपये की बरामदगी हुई और इनकी 35.5 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई है। इन मामलों से जुड़े 188 लोगों को सजा दी गई। इसी तरह सरकार ने अवैध शराब बनाने वालों पर नकेल कसी। इन मामलों से जुड़ी 11 हजार से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ मुकदमे हुए। इनमें से कई के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धाराएं लगाई गईं।"
अपराधियों-भू-माफियाओं की भी नकेल कसी
योगी सरकार के आने के बाद भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए एक अलग माफिया टास्क फोर्स के गठन का भी एलान किया गया था। सरकार ने इसके पीछे का मकसद माफियाओं के सभी वित्तीय साधन काटना था। योगी सरकार की तरफ से पुलिस को भू-माफियाओं की जांच और उन्हें कानून के दायरे में लाने का आदेश दिया गया। इसके लिए सरकार ने एक वेब पोर्टल भी तैयार किया, जहां आम लोग न सिर्फ जमीन पर कब्जे की शिकायत कर सकते हैं, बल्कि इसके निवारण से जुड़ा डाटा भी ट्रैक कर सकते हैं।
2023 में अतीक अहमद से जुड़े एक मामले में गवाह उमेश पाल की हत्या के बाद योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में एलान किया कि उनकी सरकार में माफिया मिट्टी में मिला दिए जाएंगे। यहां से माफियाओं के खिलाफ सरकार के अभियान में नई तेजी आई। यूपी पुलिस की ओर से दिए गए डाटा के मुताबिक, योगी सरकार ने गंभीर अपराध में शामिल माफियाओं की संपत्तियों को जब्त करने का सिलसिला भी जारी रखा और मई 2025 तक माफियाओं की 4000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
योगी सरकार के आने के बाद भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए एक अलग माफिया टास्क फोर्स के गठन का भी एलान किया गया था। सरकार ने इसके पीछे का मकसद माफियाओं के सभी वित्तीय साधन काटना था। योगी सरकार की तरफ से पुलिस को भू-माफियाओं की जांच और उन्हें कानून के दायरे में लाने का आदेश दिया गया। इसके लिए सरकार ने एक वेब पोर्टल भी तैयार किया, जहां आम लोग न सिर्फ जमीन पर कब्जे की शिकायत कर सकते हैं, बल्कि इसके निवारण से जुड़ा डाटा भी ट्रैक कर सकते हैं।
2023 में अतीक अहमद से जुड़े एक मामले में गवाह उमेश पाल की हत्या के बाद योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में एलान किया कि उनकी सरकार में माफिया मिट्टी में मिला दिए जाएंगे। यहां से माफियाओं के खिलाफ सरकार के अभियान में नई तेजी आई। यूपी पुलिस की ओर से दिए गए डाटा के मुताबिक, योगी सरकार ने गंभीर अपराध में शामिल माफियाओं की संपत्तियों को जब्त करने का सिलसिला भी जारी रखा और मई 2025 तक माफियाओं की 4000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
माफियाओं-अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर बना न्याय का पर्याय
माफियाओं की अवैध संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई की वृहद स्तर पर शुरुआत सितंबर 2017 में हुई, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चेतावनी दी कि वे आम लोगों को परेशान करने वाले लोगों को छोड़ेंगे नहीं। बताया जाता है कि इसके बाद 2020 तक यूपी पुलिस ने करीब दो हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया। इनमें हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का घर भी शामिल था। इतना ही नहीं माफिया मुख्तार अंसारी और उनके बेटे की संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलाया गया। इस कार्रवाई की जद में अतीक अहमद की अवैध संपत्तियां भी आईं और इन संपत्तियों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया।
हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर के जरिए अवैध संपत्तियों को गिराने के मामले का संज्ञान लिया और सरकार और अधिकारियों को सभी एहतियात और जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ऐसी कार्रवाई करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए। इसके बाद सरकार ने इन निर्देशों के आधार पर कई क्षेत्रों में अवैध संपत्तियों को बुलडोजर कार्रवाई के जरिए ध्वस्त किया है। इनमें एक उदाहरण धर्मांतरण रैकेट चलाने वाले छांगुर बाबा की प्रयागराज स्थित संपत्तियों को जमींदोज करने से जुड़ा है। इसके अलावा बहराइच से लेकर संभल तक बुलडोजर गरजा है।
माफियाओं की अवैध संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई की वृहद स्तर पर शुरुआत सितंबर 2017 में हुई, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चेतावनी दी कि वे आम लोगों को परेशान करने वाले लोगों को छोड़ेंगे नहीं। बताया जाता है कि इसके बाद 2020 तक यूपी पुलिस ने करीब दो हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया। इनमें हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का घर भी शामिल था। इतना ही नहीं माफिया मुख्तार अंसारी और उनके बेटे की संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलाया गया। इस कार्रवाई की जद में अतीक अहमद की अवैध संपत्तियां भी आईं और इन संपत्तियों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया।
हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर के जरिए अवैध संपत्तियों को गिराने के मामले का संज्ञान लिया और सरकार और अधिकारियों को सभी एहतियात और जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ऐसी कार्रवाई करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए। इसके बाद सरकार ने इन निर्देशों के आधार पर कई क्षेत्रों में अवैध संपत्तियों को बुलडोजर कार्रवाई के जरिए ध्वस्त किया है। इनमें एक उदाहरण धर्मांतरण रैकेट चलाने वाले छांगुर बाबा की प्रयागराज स्थित संपत्तियों को जमींदोज करने से जुड़ा है। इसके अलावा बहराइच से लेकर संभल तक बुलडोजर गरजा है।
पुलिस व्यवस्था में बेहतरी
पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने बजट और भर्तियों पर विशेष ध्यान दिया है।
पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने बजट और भर्तियों पर विशेष ध्यान दिया है।
- बजट में बढ़ोत्तरी: वर्ष 2017-18 में पुलिस का बजट जो 16,115 रुपये करोड़ था, वह 2024-25 तक बढ़कर लगभग 35,000 रुपये करोड़ हो गया है, जो कि सवा दो गुना से अधिक की बढ़ोतरी है।
- नई नियुक्तियां: पुलिस विभाग में लगभग 1,53,869 नई भर्तियां की गई हैं। इसके अलावा, सात नए जिलों में पुलिस लाइनों की स्थापना भी की गई है।
- विशिष्ट इकाइयों और तकनीक का गठन: अपराध के विभिन्न रूपों से लड़ने के लिए कई नई और आधुनिक इकाइयों का गठन किया गया। इनमें...
- नारकोटिक्स तस्करी रोकने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का गठन किया गया और गाजीपुर व बाराबंकी जैसे क्षेत्रों में थाने खोले गए।
- साइबर अपराध से निपटने के लिए 1,531 थानों में साइबर हेल्प डेस्क और क्षेत्रीय स्तर पर साइबर क्राइम थानों की स्थापना की गई है।
- आतंकवाद और गंभीर अपराधों के लिए देवबंद, बहराइच, अलीगढ़ और कानपुर जैसे जिलों में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) की नई फील्ड यूनिट्स और अयोध्या में एसटीएफ की अलग इकाई गठित की गई है।
- इसके साथ ही स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (एसएसएफ) और ई-प्रॉसीक्यूशन मोबाइल एप जैसी तकनीकी सुविधाओं की शुरुआत की गई है।