West Asia Crisis: पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से की बात, पश्चिम एशिया में तनाव पर की चर्चा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।
विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच अहम बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बिगड़ते हालात पर चिंता जताई और कहा कि हालात को संभालने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाना जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता जल्द बहाल होना बेहद जरूरी है। इस बातचीत को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने अपने मित्र फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है। दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि वे क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए एक-दूसरे के साथ संपर्क बनाए रखेंगे और जरूरी समन्वय करेंगे ताकि हालात को जल्द सामान्य किया जा सके।
Spoke with my friend President Emmanuel Macron today. We discussed our shared concerns over the evolving situation in West Asia and the need for a return to dialogue and diplomacy. We will continue to engage closely and coordinate efforts towards the early restoration of peace…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 5, 2026
फ्रांस ने बदली सैन्य रणनीति
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल को बाल्टिक सागर से भूमध्यसागर की ओर भेजने का आदेश दिया है। इस युद्धपोत के साथ कई फ्रिगेट जहाज भी तैनात किए जा रहे हैं। इसके अलावा इस जहाज के एयर विंग के साथ लड़ाकू विमान भी तैनात किए गए हैं ताकि सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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राफेल और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात
फ्रांस ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि राफेल लड़ाकू विमान, एयर डिफेंस सिस्टम और हवाई निगरानी के लिए विशेष रडार प्लेटफॉर्म पहले ही तैनात किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर फ्रांस अपने सहयोगी देशों की रक्षा के लिए और कदम भी उठा सकता है। हालांकि फ्रांस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में सीधे शामिल नहीं है।
ड्रोन हमलों को मार गिराने का दावा
मैक्रों ने कहा कि संघर्ष की शुरुआत के समय फ्रांसीसी सेना ने आत्मरक्षा में कई ड्रोन को मार गिराया था। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई सहयोगी देशों के हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए की गई थी। हालांकि उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई के बारे में ज्यादा तकनीकी जानकारी साझा नहीं की। फ्रांस ने यह भी कहा कि उसके सहयोगी देश जानते हैं कि जरूरत पड़ने पर फ्रांस उनके साथ खड़ा रहेगा।
अमेरिका के विमानों को सीमित अनुमति
फ्रांस ने अपने कुछ सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी विमानों को अस्थायी रूप से तैनात रहने की अनुमति दी है। फ्रांसीसी रक्षा अधिकारियों ने कहा कि यह अनुमति केवल क्षेत्र में सहयोगी देशों की सुरक्षा के समर्थन के लिए दी गई है। उन्होंने साफ किया कि फ्रांस ने यह शर्त रखी है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी हमले के लिए नहीं किया जाएगा। फ्रांस का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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