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बंगाल विधानसभा में हंगामा: भाजपा विधायक का कुणाल घोष के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव, क्या होगी कार्रवाई?
Fri, 24 Jul 2026 03:47 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 24 Jul 2026 03:47 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान टीएमसी और भाजपा विधायकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। स्पीकर के अधिकार का अवमानना करने के आरोप में कुणाल घोष के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया गया है। मामला फिलहाल स्पीकर के विचाराधीन है और वे जांच के बाद ही इस पर अंतिम फैसला सुनाएंगे।
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कुणाल घोष, टीएमसी विधायक
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायक शंकर घोष ने टीएमसी विधायक कुणाल घोष के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुणाल घोष ने सदन में अमर्यादित व्यवहार किया और विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार का अनादर किया।
विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने कहा कि वह फैसला लेने से पहले पूरे मामले की जांच करेंगे। दूसरी तरफ टीएमसी के कुणाल घोष ने साफ किया कि उनका इरादा अध्यक्ष का अपमान करने का नहीं था। फिर भी अगर उनके व्यवहार से किसी को ठेस पहुंची है, तो वह खेद व्यक्त करते हैं।
क्यों शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
यह पूरा मामला बजट पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ। टीएमसी विधायक कुणाल घोष और शोभनदेब चट्टोपाध्याय पश्चिम बंगाल विधानसभा के वेल में उतर आए। वे 22 जुलाई को हुई घटना को अध्यक्ष द्वारा कलंकित अध्याय कहे जाने का विरोध कर रहे थे।
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22 जुलाई को गृह विभाग के बजट पर बहस चल रही थी। उस दौरान हुए हंगामे के कारण कुणाल घोष को एक दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद भाजपा विधायक की ओर से दिए गए नोटिस में आरोप लगाया गया कि कुणाल घोष का आचरण सदन की गरिमा के खिलाफ था।
यह भी पढ़ें: CJP Protest: राहुल का दावा- प्रदर्शन में युवक पर चलाई गई पैलेट गन, धर्मेंद्र प्रधान 'अपराधी शिक्षा मंत्री'
भाजपा का क्या है आरोप?
प्रस्ताव पेश करते हुए शंकर घोष ने कहा कि पूर्व राज्यसभा सांसद और पत्रकार रह चुके कुणाल घोष के इस कदम ने सदन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष सदन के संरक्षक होते हैं। उनका मजाक उड़ाने का प्रयास सीधे तौर पर विशेषाधिकार का हनन और सदन की अवमानना है। यह गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कड़ी कार्रवाई के लायक है।
सफाई में कुणाल घोष ने कहा, 'अध्यक्ष का अपमान करना मेरा मकसद कभी नहीं था। फिर भी अगर मेरे व्यवहार से ठेस पहुंची है, तो मैं दिल से खेद व्यक्त करता हूं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के मुख्य सचेतक द्वारा बार-बार वक्ताओं की सूची से उनका नाम हटा दिया जाता था, जिससे वे नाराज थे।
घटनाक्रम की पांच बड़ी बातें
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विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने कहा कि वह फैसला लेने से पहले पूरे मामले की जांच करेंगे। दूसरी तरफ टीएमसी के कुणाल घोष ने साफ किया कि उनका इरादा अध्यक्ष का अपमान करने का नहीं था। फिर भी अगर उनके व्यवहार से किसी को ठेस पहुंची है, तो वह खेद व्यक्त करते हैं।
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क्यों शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
यह पूरा मामला बजट पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ। टीएमसी विधायक कुणाल घोष और शोभनदेब चट्टोपाध्याय पश्चिम बंगाल विधानसभा के वेल में उतर आए। वे 22 जुलाई को हुई घटना को अध्यक्ष द्वारा कलंकित अध्याय कहे जाने का विरोध कर रहे थे।
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22 जुलाई को गृह विभाग के बजट पर बहस चल रही थी। उस दौरान हुए हंगामे के कारण कुणाल घोष को एक दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद भाजपा विधायक की ओर से दिए गए नोटिस में आरोप लगाया गया कि कुणाल घोष का आचरण सदन की गरिमा के खिलाफ था।
यह भी पढ़ें: CJP Protest: राहुल का दावा- प्रदर्शन में युवक पर चलाई गई पैलेट गन, धर्मेंद्र प्रधान 'अपराधी शिक्षा मंत्री'
भाजपा का क्या है आरोप?
प्रस्ताव पेश करते हुए शंकर घोष ने कहा कि पूर्व राज्यसभा सांसद और पत्रकार रह चुके कुणाल घोष के इस कदम ने सदन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष सदन के संरक्षक होते हैं। उनका मजाक उड़ाने का प्रयास सीधे तौर पर विशेषाधिकार का हनन और सदन की अवमानना है। यह गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कड़ी कार्रवाई के लायक है।
सफाई में कुणाल घोष ने कहा, 'अध्यक्ष का अपमान करना मेरा मकसद कभी नहीं था। फिर भी अगर मेरे व्यवहार से ठेस पहुंची है, तो मैं दिल से खेद व्यक्त करता हूं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के मुख्य सचेतक द्वारा बार-बार वक्ताओं की सूची से उनका नाम हटा दिया जाता था, जिससे वे नाराज थे।
घटनाक्रम की पांच बड़ी बातें
- भाजपा विधायक शंकर घोष ने टीएमसी विधायक कुणाल घोष के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया।
- विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने मामले की समीक्षा के बाद फैसला देने की बात कही।
- कुणाल घोष ने कहा कि उनका इरादा स्पीकर का अपमान करने का नहीं था, लेकिन स्थिति के लिए खेद जताया।
- गृह विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान कुणाल घोष को एक दिन के लिए निष्कासित किया गया था।
- कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि विपक्ष के चीफ व्हिप बार-बार उनका नाम सूची से काट देते थे।