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पश्चिम बंगाल में मीर जाफर के वंशजों की अनदेखी?: SIR में 346 लोगों के नाम कटे, प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: Rahul Kumar
Updated Wed, 01 Apr 2026 05:09 PM IST
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सार
मुर्शिदाबाद में चुनाव आयोग ने मीर जाफर के वंश से जुड़े करीब 346 लोगों के नाम वोटर सूची से हटा दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद अब इस पूर्व शाही परिवार के सदस्यों पर अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर
- फोटो : डीडी न्यूज
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से सामने आया एक मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। बंगाल के पूर्व नवाब मीर जाफर के वंशजों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत की गई कार्रवाई में नवाबी खानदान के करीब 346 सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इस घटनाक्रम ने न केवल राज्य की राजनीति में हलचल मचाई है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मतदाता अधिकारों और पहचान से जुड़े मुद्दों को लेकर बहस तेज कर दी है।
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परिवार के कई सदस्यों के नाम गायब
प्रभावित परिवार 15वीं और 16वीं पीढ़ी से संबंधित बताया जा रहा है, जिससे यह मामला ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से भी अहम हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि लंबे समय से सूची में शामिल लोगों के नाम अचानक कैसे हटाए गए और इसके पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
मुर्शिदाबाद के लालबाग क्षेत्र में स्थित नव आदर्श हाई स्कूल के बूथ संख्या 121 से नवाबी परिवार के कई सदस्यों के नाम गायब पाए गए हैं। इनमें 82 वर्षीय सैयद रजा अली मिर्जा (छोटे नवाब) और उनके पुत्र सैयद मोहम्मद फहीम मिर्जा शामिल हैं। फहीम मिर्जा तृणमूल कांग्रेस से जुड़े पार्षद हैं।
फहीम मिर्जा ने दावा किया कि उनका नाम वर्ष 2002 से मतदाता सूची में था, लेकिन इस बार सुनवाई के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। नवाब परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम को “ऐतिहासिक विडंबना” बताते हुए नाराजगी जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, इस मुद्दे ने देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया, पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।
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