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संसद में संग्राम: राज्यसभा से सीएपीएफ बिल पास, जानिए क्यों मचा है इस पर बवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 01 Apr 2026 05:11 PM IST
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सार
'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026' को राज्यसभा से मंजूरी मिल गई है। इस बिल का मकसद सभी सात सीएपीएफ बलों के लिए एक समान नियम बनाना है, जिसमें शीर्ष पदों पर आईपीएस अफसरों के लिए बड़ा कोटा तय किया गया है। विपक्ष ने बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग पूरी न होने पर सदन से वॉकआउट कर दिया।
राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा
- फोटो : ANI
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विस्तार
बुधवार को संसद में सियासी घमासान देखने को मिला। दरअसल, राज्यसभा में 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026' को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसके बाद, विपक्ष ने बिल को आनन-फानन में पास करने का आरोप लगाया है। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट भी कर दिया।
बिल में ऐसा क्या है?
अभी तक देश के अलग-अलग अर्धसैनिक बलों के लिए सेवा और प्रशासन के नियम भी अलग-अलग थे। यह बिल उन सभी को हटाकर एक सिंगल सिस्टम लागू करेगा। लेकिन असली पेंच फंसा है आईपीएस अफसरों की तैनाती को लेकर। इस नए कानून के तहत, सीएपीएफ में आईजी रैंक के 50 फीसदी पद और एडीजी रैंक के कम से कम 67 फीसदी पद आईपीएस अधिकारियों के लिए रिजर्व रहेंगे।
विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है। पिछले ही साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने एक रिव्यू पिटीशन खारिज करते हुए कहा था कि अर्धसैनिक बलों में आईपीएस अफसरों की संख्या धीरे-धीरे कम की जाए, जिससे वहां बरसों से काम कर रहे कैडर अधिकारियों को प्रमोशन मिल सके। अब विपक्ष इसी का हवाला देते हुए इस बिल का विरोध कर रहा है।
यह भी पढ़ें: 'यह हमारी जंग नहीं है': ईरान युद्ध के बीच ब्रिटेन ने भी छोड़ा ट्रंप का साथ! होर्मुज पर बुलाई 35 देशों की बैठक
सदन में जमकर हुई बहस
सदन में बहस का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने साफ कहा कि यह बिल देश के संघीय ढांचे को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत करता है। इससे भर्ती प्रक्रिया बेहतर होगी और जवानों का मनोबल बढ़ेगा।
दूसरी ओर, विपक्ष ने मांग की कि इस बिल को संसद की प्रवर समिति के पास भेजा जाए। जब सरकार ने यह मांग नहीं मानी, तो नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में समूचा विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। इस पर भाजपा नेता जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष का संसदीय मर्यादाओं और चर्चा में कोई भरोसा ही नहीं रह गया है।
सीएपीएफ में सात सुरक्षा बल शामिल
भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में कुल सात मुख्य सुरक्षा बल शामिल हैं, जो गृह मंत्रालय के अधीन काम करते हैं। इनमें बीएसएफ मुख्य रूप से पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा करता है, जबकि आईटीबीपी चीन सीमा और एसएसबी नेपाल व भूटान सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी संभालते हैं। सीआरपीएफ देश के भीतर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे आगे रहता है। वहीं, सीआईएसएफ हवाई अड्डों, मेट्रो और औद्योगिक केंद्रों को सुरक्षा देता है। इसके अलावा, असम राइफल्स पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद से लड़ता है, जबकि NSG केवल गंभीर आतंकवादी हमलों और विशेष वीआईपी सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है।
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बिल में ऐसा क्या है?
अभी तक देश के अलग-अलग अर्धसैनिक बलों के लिए सेवा और प्रशासन के नियम भी अलग-अलग थे। यह बिल उन सभी को हटाकर एक सिंगल सिस्टम लागू करेगा। लेकिन असली पेंच फंसा है आईपीएस अफसरों की तैनाती को लेकर। इस नए कानून के तहत, सीएपीएफ में आईजी रैंक के 50 फीसदी पद और एडीजी रैंक के कम से कम 67 फीसदी पद आईपीएस अधिकारियों के लिए रिजर्व रहेंगे।
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विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है। पिछले ही साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने एक रिव्यू पिटीशन खारिज करते हुए कहा था कि अर्धसैनिक बलों में आईपीएस अफसरों की संख्या धीरे-धीरे कम की जाए, जिससे वहां बरसों से काम कर रहे कैडर अधिकारियों को प्रमोशन मिल सके। अब विपक्ष इसी का हवाला देते हुए इस बिल का विरोध कर रहा है।
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सदन में जमकर हुई बहस
सदन में बहस का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने साफ कहा कि यह बिल देश के संघीय ढांचे को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत करता है। इससे भर्ती प्रक्रिया बेहतर होगी और जवानों का मनोबल बढ़ेगा।
दूसरी ओर, विपक्ष ने मांग की कि इस बिल को संसद की प्रवर समिति के पास भेजा जाए। जब सरकार ने यह मांग नहीं मानी, तो नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में समूचा विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। इस पर भाजपा नेता जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष का संसदीय मर्यादाओं और चर्चा में कोई भरोसा ही नहीं रह गया है।
सीएपीएफ में सात सुरक्षा बल शामिल
भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में कुल सात मुख्य सुरक्षा बल शामिल हैं, जो गृह मंत्रालय के अधीन काम करते हैं। इनमें बीएसएफ मुख्य रूप से पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा करता है, जबकि आईटीबीपी चीन सीमा और एसएसबी नेपाल व भूटान सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी संभालते हैं। सीआरपीएफ देश के भीतर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे आगे रहता है। वहीं, सीआईएसएफ हवाई अड्डों, मेट्रो और औद्योगिक केंद्रों को सुरक्षा देता है। इसके अलावा, असम राइफल्स पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद से लड़ता है, जबकि NSG केवल गंभीर आतंकवादी हमलों और विशेष वीआईपी सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है।
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