Explainer: दिल्ली में जारी संग्राम में जो नीली वर्दी वाले जवान चर्चा में, उनका क्या काम, कैसे लेते हैं एक्शन?
दिल्ली में संसद मार्च के बाद विरोध प्रदर्शनों के बीच नीली वर्दी पहने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। दंगा नियंत्रण के लिए बनाई गई इस विशेष इकाई की तैनाती, कार्रवाई के वीडियो और इससे जुड़े विवादों ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
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विस्तार
बीते कुछ दिनों से दिल्ली की सड़कों पर तनाव है। सोमवार को हुए 'संसद मार्च' से इसकी शुरुआत हुई। इसके बाद कई तरह की बातें, कई तरह के वीडियो और कई तरह के दावे हो रहे हैं। दावे प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प को लेकर भी हो रहे हैं। इन सबके बीच नीली वर्दी पहने सुरक्षाकर्मियों की भी बात हो रही है। ये रैपिड एक्शन फोर्स यानी आरएएफ के जवान हैं। आएएएफ के ये जवान सीआरपीएफ का हिस्सा है।
आखिर ये सीआरपीएफ क्या है? आरएएफ का क्या काम होता है? आरएएफ चर्चा में क्यों है? सोशल मीडिया पर कुछ बिना वर्दी और कुछ वर्दी पर बिना नेम टैग लगाए जवानों के वीडियो भी वायरल हुए हैं। क्या पुलिसकर्मी बिना नेम टैग लगाए ड्यूटी कर सकते हैं? कानून क्या कहता है? आइये जानते हैं...
सबसे पहले समझिए सीआरपीएफ क्या है?
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय अर्धसैनिक बल है। इसकी शुरुआत 27 जुलाई 1939 को ब्रिटिश शासन के दौरान क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस के रूप में हुई थी। आजादी के बाद 28 दिसंबर 1949 को सीआरपीएफ अधिनियम लागू हुआ और इसका नाम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) रखा गया। वक्त के साथ सीआरपीएफ का लगातार विस्तार हुआ और आज यह देश की आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संकट की परिस्थितियों से निपटने वाली सबसे बड़ी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों में शामिल है।
आज सीआरपीएफ के तहत कई विशेष इकाइयां काम करती हैं, जिनमें शामिल हैं,
- 201 जनरल ड्यूटी बटालियन
- 6 महिला बटालियन
- 6 वीआईपी सुरक्षा बटालियन
- 10 कोबरा बटालियन
- 7 सिग्नल बटालियन
- स्पेशल ड्यूटी ग्रुप (SDG)
- रैपिड एक्शन फोर्स (RAF)
सीआरपीएफ का उद्देश्य देश में कानून का शासन बनाए रखना, आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना, संविधान की रक्षा करना और सामाजिक सद्भाव कायम रखना है।
आरएएफ क्या है?
- रैपिड एक्शन फोर्स सीआरपीएफ की विशेष दंगा नियंत्रण इकाई है।
- इसका गठन अक्तूबर 1992 में सांप्रदायिक दंगों, हिंसक प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की गंभीर परिस्थितियों से तेजी से निपटने के लिए किया गया था।
- आरएएफ को जीरो रिस्पांस फोर्स कहा जाता है क्योंकि इसे बहुत कम समय में किसी भी संवेदनशील क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है।
- इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसका नेतृत्व इंस्पेक्टर जनरल (IG) रैंक का अधिकारी करता है।
आरएएफ की संरचना कैसी होती है?
आरएएफ विशेष दंगा नियंत्रण बटालियनों से मिलकर बनी है।
हर बटालियन का नेतृत्व कमांडेंट रैंक का अधिकारी करता है।
आरएएफ की सबसे छोटी परिचालन इकाई एक टीम होती है, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर करता है।
हर टीम तीन हिस्सों में काम करती है;
- दंगा नियंत्रण तत्व
- आंसू गैस तत्व
- अग्नि तत्व
आरएएफ की प्रमुख जिम्मेदारियां क्या है?
आरएएफ को विशेष रूप से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में तैनात किया जाता है।इसकी प्रमुख जिम्मेदारियां हैं;
- सांप्रदायिक दंगों पर तेजी से नियंत्रण करना।
- हिंसक भीड़ और प्रदर्शनों का प्रबंधन करना।
- कानून-व्यवस्था बनाए रखना।
- संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च।
- चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना।
- प्राकृतिक आपदाओं में राहत और बचाव कार्य करना।
- संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए प्रशिक्षण और तैनाती भी दी जाती है।
आरएएफ की पहचान क्या है?
- आरएएफ की सबसे बड़ी पहचान इसकी नीले रंग की वर्दी है। इसे इसलिए चुना गया ताकि भीड़ के बीच आरएएफ के जवानों की पहचान आसानी से हो सके।
- जवानों को दंगा नियंत्रण, भीड़ के मनोविज्ञान, मानवाधिकार और न्यूनतम बल प्रयोग की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
- हर कंपनी में महिला जवानों की अलग टीम होती है।
- इसका आदर्श वाक्य है- संवेदनशील पुलिसिंग के माध्यम से मानवता की सेवा।
- 7 अक्तूबर 2003 को तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को उसकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 'राष्ट्रपति कलर' से सम्मानित किया था। यह किसी भी सैन्य या पुलिस बल को राष्ट्र के प्रति उसकी बेहतरीन और असाधारण सेवा के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
आरएएफ किन उपकरणों का इस्तेमाल करती है?
दंगा नियंत्रण के दौरान आरएएफ मुख्य रूप से कम घातक उपकरणों का इस्तेमाल करती है। इनमें शामिल हैं;- दंगा-रोधी ढाल
- हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर
- लाठी
- आंसू गैस
- वॉटर कैनन
- नॉन-लीथल हथियार
- संचार और निगरानी उपकरण
आरएएफ चर्चा में क्यों है?
संसद चलो मार्च के दौरान आरएएफ के जवान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करते हुए और आंसू गैस छोड़ते हुए नजर आए। इसी बीच कुछ जवान घायल अवस्था में भी देखे गए। एक असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत के कई वीडियो और उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी भी चर्चा में रही। सीजेपी ने आरोप लगाया कि इस पोस्ट के जरिए प्रदर्शनकारियों का अपमान किया गया। वायरल स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर लिखा था, "जो खुद को नहीं सुधार सकते, वे देश को सुधारने निकले हैं। बताया गया कि बाद में यह इंस्टाग्राम स्टोरी हटा दी गई। हालांकि, इस पोस्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच 21 जुलाई 2026 की रात दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में आरएएफ के एक जवान के साथ भीड़ द्वारा कथित मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
बिना वर्दी और नेम टैग हटाने का विवाद क्या है?
विरोध प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें कुछ लोग सादे कपड़ों में हाथ में पुलिस की लाठी लिए प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते दिखाई दिए। वहीं, कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में थे, लेकिन उनकी वर्दी पर लगा नेम टैग नहीं दिखाई दे रहा था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए जानबूझकर नेम टैग हटा लिया था।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सादे कपड़ों में लाठी लेकर कार्रवाई करने वाले लोग कौन थे। पार्टी ने आरोप लगाया कि इन लोगों ने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की। इन वीडियो और आरोपों के बाद 22 जुलाई को दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी किया कि प्रदर्शन स्थल पर तैनात सभी पुलिसकर्मी अनिवार्य रूप से वर्दी पहनकर ड्यूटी करेंगे।
कानून क्या कहता है?
भीड़ नियंत्रण या प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के लिए वर्दी पहनना या नेम टैग लगाना अनिवार्य है या नहीं, इसे लेकर कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे खुफिया जानकारी जुटाने या गुप्त अभियान में पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में काम करने या अपनी पहचान छिपाने की अनुमति हो सकती है। कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के अध्याय-11 में यह स्पष्ट नहीं लिखा गया है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में पुलिस अधिकारी को अपनी पहचान किस तरह प्रदर्शित करनी होगी।
दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?
दिल्ली पुलिस ने सादे कपड़ों में कार्रवाई करने या पुलिसकर्मियों द्वारा नेम टैग हटाने के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई पुलिसकर्मियों पर पथराव किया, पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस का कहना है कि उसने स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की।