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Karnataka: BJP-JDS क्यों कह रहे कर्नाटक में होगा महाराष्ट्र जैसा बदलाव, क्या दोनों के साथ आने से बदलेगी सरकार?

Himanshu Mishra हिमांशु मिश्रा
Updated Wed, 05 Jul 2023 01:00 PM IST
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सार

पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी और येदियुरप्पा के बयान ने सियासी गलियारे में खलबली मचा दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या सच में कर्नाटक में सरकार गिर सकती है? अगर हां तो ये कैसे होगा? इससे किसका फायदा होगा? आइए समझते हैं... 
 

Why are BJP-JDS saying that there will be a change like Maharashtra in Karnataka?
शिवसेना-एनसीपी के बाद कर्नाटक में कांग्रेस की बारी? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

महाराष्ट्र में एनसीपी पर कब्जे को लेकर शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार की लड़ाई जारी है। इस बीच, कर्नाटक में भी सियासी उठापटक के दावे होने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने दावा किया है कि एक महीने के अंदर महाराष्ट्र की तरह ही कर्नाटक में भी बड़ा उलटफेर होगा। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने भी कहा है कि कर्नाटक में कुछ भी हो सकता है। इसमें अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। 
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कुमारस्वामी और येदियुरप्पा के इस बयान ने सियासी गलियारे में खलबली मचा दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या सच में कर्नाटक में सरकार गिर सकती है? अगर हां तो ये कैसे होगा? इससे किसका फायदा होगा? आइए समझते हैं... 
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पहले पढ़िए वो चार बयान,  जिसने कर्नाटक में सियासी उबाल ला दिया

बयान-1: पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार (3 जुलाई) को कहा, 'महाराष्ट्र में चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद, मुझे आशंका है कि कर्नाटक में अजित पवार के रूप में कौन उभरेगा?' उन्होंने कहा, इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। सालभर के भीतर ही कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी। मैं ये नहीं बताऊंगा कि यहां अजित पवार कौन होगा... लेकिन यह जल्द ही होगा।’ 
    
बयान-2 : पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा ने मंगलवार (4 जुलाई) को कहा, 'एचडी कुमारस्वामी जो भी कह रहे हैं वो एकदम सच है और मैं उनके बयान का समर्थन करना चाहता हूं। भविष्य में कुमारस्वामी और हम साथ मिलकर लड़ेंगे।'
  
बयान-3: येदियुरप्पा के बयान पर कुमारस्वामी ने फिर से प्रतिक्रिया दी। कुमारस्वामी ने मीडिया से कहा, 'मैं विशेषरूप से किसी का नाम नहीं लेना चाहता हूं। (कर्नाटक में) कुछ भी हो सकता है। इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। बहुस संभव है कि इस साल के अंत में या लोकसभा चुनाव के बाद यह होगा। हमें इंतजार करना होगा।'

बयान-4 : बीजेपी और जेडीएस के गठबंधन की अटकलों को जन्म देने वाले अपने बयान पर कुछ ही देर बाद बीएस येदियुरप्पा ने मीडिया में एक और बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया, 'कर्नाटक में कांग्रेस की भ्रष्ट सरकार के खिलाफ मैं एचडी कुमारस्वामी के साथ मिलकर लड़ने के लिए तैयार हूं, इस पर केवल हमारे केंद्रीय नेतृत्व को अनुमति देनी है।'
 

क्या जेडीएस और भाजपा के मिलने से कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी? 
224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 113 का है। इस वक्त भाजपा के 66 और जेडीएस के 19 विधायक हैं। दोनों मिलकर भी कुल 85 के आंकड़े तक पहुंचेंगे। यह आंकड़ा 113 का काफी कम है। ऐसे में भाजपा और जेडीएस का गठबंधन होने कांग्रेस सरकार को कोई खास खतरा नहीं हैं। 
 

फिर क्यों हो रही सरकार गिरने की बात? 
कुमारस्वामी और येदियुरप्पा दोनों ही महाराष्ट्र में एनसीपी की तरह कर्नाटक में कांग्रेस में फूट पड़ने का दावा कर रहे हैं। अगर ऐसा कुछ होता है तो सियासी उटलफेर संभव है। हालांकि, संख्याबल के लिहाज से ये महाराष्ट्र के मुकाबले कठिन होगा। 

कर्नाटक में कांग्रेस के पास 135 विधायक हैं। एक निर्दलीय विधायक ने भी अपना समर्थन दिया है। यहां सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी के पास 113 विधायकों का समर्थन चाहिए होता है। मतलब कांग्रेस के पास अभी बहुमत के आंकड़े से 23 सीटें अधिक हैं।  महाराष्ट्र में जिस तरह का बिखराव शिवसेना के साथ हुआ वैसी टूट के लिए कम से कम 90 विधायकों को बागी खेमे में आना होगा। तभी बागी गुट के विधायक दल-बदल कानून से बच पाएंगे। 

 

जो एचडी कुमारस्वामी के साथ हुआ वैसा भी तो हो सकता है?
2018 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी थी। कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। एक साल बाद ही कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायकों ने बगावत कर दी। बागी विधायकों के इस्तीफे की वजह से कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ गई थी। इसके बाद कुमारस्वामी को इस्तीफा देना पड़ा। और राज्य में भाजपा की सरकार बनी। बागियों ने बाद में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। ज्यादातर को जीत मिली। साथ ही राज्य में भाजपा की सरकार बरकार रही। 

इस बार ऐसा कुछ होने के लिए बहुमत के आंकड़े को कम से कम 89 तक आना होगा। क्योंकि कांग्रेस के अलावा अन्य सभी दलों के विधायकों की संख्या 89 है। ऐसा तभी संभव है जब कांग्रेस के कम से कम 58 विधायक अफनी विधायकी से इस्तीफा दे दें।
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