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Kathua News: साइबर ठगी के शिकार पीड़ित को कोर्ट से मिली राहत, फ्रीज 10 लाख रुपये लौटाने का आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
अदालत से .................
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) साइबर ठगी के शिकार पीड़ित को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साइबर सेल द्वारा फ्रीज की कराई गई 10 लाख की राशि को उसके बैंक खाते में वापस जमा करने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह राशि शिकायतकर्ता की है और इसे वापस करने से जांच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में की गई। कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, ऑनलाइन ठगी करने वालों ने शिकायतकर्ता दिलदार सिंह निवासी महाराजपुर कठुआ के साइबर सेल में एक शिकायत गत दो जुलाई को दर्ज करवाई गई। इसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वालों ने उसके जेके बैंक की शाखा हरिया चक से 10 लाख की राशि निकाल ली है। यह राशि दो पांच-पांच लाख रुपये की दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए निकालकर एक्सिस बैंक, चांदपुर (उत्तर प्रदेश) के एक खाते में भेजे गई थी। साइबर पुलिस ने शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक के सहयोग से उक्त खाते को डेबिट फ्रीज करवा दिया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। साथ ही यह भी कहा कि आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए हैं और अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। अदालत ने दोनों दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पुलिस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया फ्रीज की गई 10 लाख रुपये की राशि शिकायतकर्ता की प्रतीत होती है। इसके बाद अदालत ने एक्सिस बैंक की चांदपुर शाखा के शाखा प्रबंधक को निर्देश दिया कि उक्त राशि शिकायतकर्ता के जेएंडके बैंक खाते में स्थानांतरित की जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि शिकायतकर्ता को राशि जारी होने से पहले इंडेम्निटी बॉन्ड (क्षतिपूर्ति बांड) दाखिल करना होगा। यदि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति इस राशि पर बेहतर दावा सिद्ध करता है, तो उसकी भरपाई की जाएगी।
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अदालत से .................
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) साइबर ठगी के शिकार पीड़ित को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साइबर सेल द्वारा फ्रीज की कराई गई 10 लाख की राशि को उसके बैंक खाते में वापस जमा करने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह राशि शिकायतकर्ता की है और इसे वापस करने से जांच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में की गई। कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, ऑनलाइन ठगी करने वालों ने शिकायतकर्ता दिलदार सिंह निवासी महाराजपुर कठुआ के साइबर सेल में एक शिकायत गत दो जुलाई को दर्ज करवाई गई। इसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वालों ने उसके जेके बैंक की शाखा हरिया चक से 10 लाख की राशि निकाल ली है। यह राशि दो पांच-पांच लाख रुपये की दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए निकालकर एक्सिस बैंक, चांदपुर (उत्तर प्रदेश) के एक खाते में भेजे गई थी। साइबर पुलिस ने शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक के सहयोग से उक्त खाते को डेबिट फ्रीज करवा दिया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। साथ ही यह भी कहा कि आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए हैं और अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। अदालत ने दोनों दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पुलिस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया फ्रीज की गई 10 लाख रुपये की राशि शिकायतकर्ता की प्रतीत होती है। इसके बाद अदालत ने एक्सिस बैंक की चांदपुर शाखा के शाखा प्रबंधक को निर्देश दिया कि उक्त राशि शिकायतकर्ता के जेएंडके बैंक खाते में स्थानांतरित की जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि शिकायतकर्ता को राशि जारी होने से पहले इंडेम्निटी बॉन्ड (क्षतिपूर्ति बांड) दाखिल करना होगा। यदि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति इस राशि पर बेहतर दावा सिद्ध करता है, तो उसकी भरपाई की जाएगी।
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