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Kathua: भद्रवाह-बनी मार्ग पर ट्राउट फार्म बना पर्यटकों का नया आकर्षण केंद्र, इस सीजन तैयार आठ हजार मछलियां

अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 03 Jun 2026 03:36 PM IST
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सार

बनी-भद्रवाह मार्ग स्थित खुड़वा सरकारी ट्राउट फार्म में पर्यटन सीजन के लिए करीब 8 हजार ट्राउट मछलियां तैयार की जा रही हैं, जो अगले डेढ़ से दो महीने में 600 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी। यह फार्म न सिर्फ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, बल्कि ट्राउट पालन के जरिए स्थानीय रोजगार और बाजार को भी बढ़ावा दे रहा है।
 

Eight thousand trout fishes are being prepared for the tourism season.
ट्राउट मछली पालन - फोटो : संवाद
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विस्तार

बर्फीले पानी की मछली ट्राउट के जरिए पर्यटकों को आकर्षित करने और इन मछलियां का स्थानीय बाजार तलाशने के लिए विभाग ने कवायद तेज कर दी है। इस समय खुडवा ट्राउट फार्म में लगभग 8 हजार मछलियों को तैयार किया जा रहा है। जो अगले डेढ़ से दो महीने में बिक्री के लिए तैयार हो जाएंगी।



बीते साल आई बाढ़ के चलते रेस वे को नुकसान के चलते ट्राउट मछलियों को भी नुकसान हुआ था। हालांकि इसके बाद विभाग ने रेस वे की मरम्मत और साफ सफाई के काम के अलावा फार्म को सुचारू करने के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित कर ली हैं।
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बनी भद्रवाह मार्ग से सटा सरकारी यह ट्राउट मछली पालन केंद्र न सिर्फ मछली के शौकीन लोगों को यहां आकर्षित करता रहा है बल्कि सरथल, भद्रवाह की ओर जाने वाले पर्यटक भी इस मछली पालन से संबंधित जानकारी यहां लेते रहे हैं। बनी और आसपास के स्थानीय बाजार में इस महंगी मछली की अधिक मांग नहीं है, जबकि जम्मू और पठानकोट के होटलों में यह मछली हाथों हाथ बिकती है। यहां दाम भी अच्छे मिलते हैं, जिसे देखते हुए मत्स्य पालन विभाग जम्मू और पठानकोट में व्यापारियों से भी संपर्क बनाए हुए है। उधर, स्थानीय पर्यटक भी इसका जायका लेने के लिए पहुंचते हैं।
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लजीज व्यंजनों की शान बनी ट्राउट मछली को जिले में एक नई पहचान दिलाने के साथ ही विभाग ने स्थानीय युवाओं को भी अवसर दिए हैं। विभाग के सहायक निदेशक ने बताया कि जो युवा ट्राउट पालन से अच्छी आमदनी हासिल करना चाहते हैं वे इसे व्यवसाय के रूप में शुरू कर सकते हैं। अधिकारी ने बताया कि ताजे पानी की इस मछली के पालन से स्वरोजगार के नए विकल्प खुलने भी तय हैं। मछली पालन की ओर युवाओं का रुझान भी बढ़ा है। दुनिया में बेहतरीन मछलियों में शुमार ट्राउट पालन में राज्य के मछली पालन के आंकड़े इसे बेहतरीन पायदान पर खड़ा करने की क्षमता रखते हैं। बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बनी में आधा दर्जन के लगभग ट्राउट फार्म सक्रिय हुए है। बनी के खुड़वा फार्म में ट्राउट मछली के प्रति किलो दाम छह सौ रुपए है।

1899 में जम्मू-कश्मीर में लाई गई थी पहली ट्राउट
जम्मू कश्मीर में ओवा ट्राउट मछली के बीज को सबसे पहले 1899 में लाया गया, लेकिन हवाई यातायात की उपलब्धता न होने से पहला बीज सफल प्रयोग में नहीं लाया जा सका। 19 दिसंबर, 1900 को लाई गई ट्राउट का कश्मीर के दच्छीगाम में पालन किया गया। 1901 में कश्मीर के बाहरी इलाके हरवन में पहली ट्राउट हैचरी खोली गई। यूके से मंगवाई गई इस मछली को राज्य में उपयुक्त माहौल मिला। यूरोपियन संघ के सहयोग से कश्मीर के कोकरनाग में इसे बीते दो दशकों में व्यापक स्तर पर तैयार किया जाता है। विभाग द्वारा लारीबल और कठुआ जिले के लोवांग से सटे खुर्डवा में भी वर्तमान में ट्राउट का पालन किया जा रहा है। प्रदेश में पैदा की जाने वाली ट्राउट में रेनबो ट्राउट और ब्राउन ट्राउट प्रमुख हैं। हॉलैंड से मंगवाई गई ट्राउट फीड से इस मछली को जीवन कालों के दौरान संरक्षण में सहायता मिली है

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