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Kathua News: धर्मानुसार जीवन जीना ही मनुष्य का कर्तव्य
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 23 Mar 2026 01:21 AM IST
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भल्लड़ पंदराड़ गांव के माता श्री बाला सुंदरी मंदिर में श्रीमद् देवी भागवत कथा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नवरात्र के पावन अवसर पर भल्लड़ पंदराड़ गांव के माता श्री बाला सुंदरी मंदिर में श्रीमद् देवी भागवत कथा जारी है। कथा के चौथे दिन संत सुभाष शास्त्री ने माता रानी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शांति का महत्व वही समझ सकता है जो अशांति का अनुभव कर रहा हो।
उन्होंने ईरान में चल रहे युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि विश्व के राष्ट्राध्यक्ष अपने-अपने धर्म की मूल शिक्षा का पालन करें तो सभी को यही संदेश मिलेगा कि शांति सर्वोपरि है। लेकिन तेल का लोभ और विस्तारवादी मानसिकता के कारण बीते 10–12 दिनों में हजारों नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है और बारूद के प्रयोग से पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है।
शास्त्री जी ने इस संदर्भ में श्रीकृष्ण द्वारा कौरवों को दिए गए शांति प्रस्ताव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन को समझाया था कि अहंकार और अधर्म का मार्ग अंततः विनाश की ओर ले जाता है। राजा का धर्म है कि वह न्याय करे, सभी को समान दृष्टि से देखे और लाभ व क्रोध पर नियंत्रण रखे। अन्याय और हठ पर अड़े रहने से न राज्य बचेगा और न ही कुल।
उन्होंने कहा कि धर्मानुसार जीवन जीना ही मनुष्य का कर्तव्य है। गलत कार्य और दृष्टि से बचकर सत्यप्रियता एवं संयम को अपनाना चाहिए, जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए उपयोगी है। महात्मा बुद्ध की शिक्षा भी यही है कि सत्य और दया का आदान-प्रदान करो, शांति स्वयं प्राप्त हो जाएगी।
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कठुआ। नवरात्र के पावन अवसर पर भल्लड़ पंदराड़ गांव के माता श्री बाला सुंदरी मंदिर में श्रीमद् देवी भागवत कथा जारी है। कथा के चौथे दिन संत सुभाष शास्त्री ने माता रानी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शांति का महत्व वही समझ सकता है जो अशांति का अनुभव कर रहा हो।
उन्होंने ईरान में चल रहे युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि विश्व के राष्ट्राध्यक्ष अपने-अपने धर्म की मूल शिक्षा का पालन करें तो सभी को यही संदेश मिलेगा कि शांति सर्वोपरि है। लेकिन तेल का लोभ और विस्तारवादी मानसिकता के कारण बीते 10–12 दिनों में हजारों नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है और बारूद के प्रयोग से पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है।
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शास्त्री जी ने इस संदर्भ में श्रीकृष्ण द्वारा कौरवों को दिए गए शांति प्रस्ताव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन को समझाया था कि अहंकार और अधर्म का मार्ग अंततः विनाश की ओर ले जाता है। राजा का धर्म है कि वह न्याय करे, सभी को समान दृष्टि से देखे और लाभ व क्रोध पर नियंत्रण रखे। अन्याय और हठ पर अड़े रहने से न राज्य बचेगा और न ही कुल।
उन्होंने कहा कि धर्मानुसार जीवन जीना ही मनुष्य का कर्तव्य है। गलत कार्य और दृष्टि से बचकर सत्यप्रियता एवं संयम को अपनाना चाहिए, जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए उपयोगी है। महात्मा बुद्ध की शिक्षा भी यही है कि सत्य और दया का आदान-प्रदान करो, शांति स्वयं प्राप्त हो जाएगी।