{"_id":"69c303bb40efcb61630cf571","slug":"jammu-kashmir-news-kathua-news-c-201-1-knt1006-130300-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया चैती छठ पर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया चैती छठ पर्व
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 25 Mar 2026 03:05 AM IST
विज्ञापन
चैती छठ के लिए सामग्री खरीदते लोगसंवाद
विज्ञापन
सभी परंपराओं का पालन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सूर्यदेव की उपासना को समर्पित चैती छठ पर्व कठुआ जिले में भी धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। व्रतियों ने पर्व की सभी परंपराओं का पालन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पर्व के अवसर पर कठुआ से सटे औद्योगिक क्षेत्र में सजे बाजारों में प्रसाद के रूप में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की खरीदारी भी खूब हुई।
22 मार्च को नहाय-खाय के साथ शुरू वाले पर्व में 23 मार्च को षष्ठी व्रत एवं खरना, 24 मार्च को सायंकालीन अर्घ्य और 25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन हुआ। व्रती महिला सरोज गुप्ता बताया कि वह पूरे विधिविधान से व्रत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह व्रत परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। 36 घंटे का निर्जल उपवास कठिन जरूर है लेकिन श्रद्धा और आस्था से सब सहज हो जाता है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि महाभारत काल में द्रौपदी और पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान सूर्यदेव की आराधना की थी। लोक कथाओं और सूर्य पुराण में भी छठ व्रत की उत्पत्ति का उल्लेख मिलता है।
श्रद्धालु रिंकू सिंह ने बताया कि आमतौर पर यह आयोजन कठुआ के बरमोरा क्षेत्र में नहर किनारे किया जाता रहा है। इस बार नहर में पानी न होने के कारण इसे चिनाब टेक्सटाइल मिल परिसर में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि मिल प्रबंधन ने इसके लिए विशेष इंतजाम किए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सूर्यदेव की उपासना को समर्पित चैती छठ पर्व कठुआ जिले में भी धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। व्रतियों ने पर्व की सभी परंपराओं का पालन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पर्व के अवसर पर कठुआ से सटे औद्योगिक क्षेत्र में सजे बाजारों में प्रसाद के रूप में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की खरीदारी भी खूब हुई।
22 मार्च को नहाय-खाय के साथ शुरू वाले पर्व में 23 मार्च को षष्ठी व्रत एवं खरना, 24 मार्च को सायंकालीन अर्घ्य और 25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन हुआ। व्रती महिला सरोज गुप्ता बताया कि वह पूरे विधिविधान से व्रत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह व्रत परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। 36 घंटे का निर्जल उपवास कठिन जरूर है लेकिन श्रद्धा और आस्था से सब सहज हो जाता है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि महाभारत काल में द्रौपदी और पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान सूर्यदेव की आराधना की थी। लोक कथाओं और सूर्य पुराण में भी छठ व्रत की उत्पत्ति का उल्लेख मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रद्धालु रिंकू सिंह ने बताया कि आमतौर पर यह आयोजन कठुआ के बरमोरा क्षेत्र में नहर किनारे किया जाता रहा है। इस बार नहर में पानी न होने के कारण इसे चिनाब टेक्सटाइल मिल परिसर में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि मिल प्रबंधन ने इसके लिए विशेष इंतजाम किए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।