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Kathua News: बिना इंश्योरेंस दौड़ रहे सरकारी वाहन, नियमों की खुली अनदेखी
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 07 Apr 2026 02:43 AM IST
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जीएमसी कठुआ के परिसर में खड़ी और अक्सर सड़कों पर दौड़ने वाली बिना इंश्योरेंस के एंबुलेंस
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जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल की पांच एंबुलेंस और दो कॉलेज बसों के अलावा प्रधानाचार्य के वाहन भी बिना इंश्योरेंस
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जम्मू-कश्मीर में कई सरकारी वाहन बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे यातायात नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। कठुआ जिले में एंबुलेंस और अन्य विभागीय वाहन भी बिना जरूरी दस्तावेजों के चलते पाए गए जिससे हादसे की स्थिति में मुआवजे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कठुआ जिले में जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल की पांच एंबुलेंस, दो कॉलेज बसों के अलावा प्रधानाचार्य के वाहन भी बिना इंश्योरेंस हैं। स्थिति यहीं तक नहीं है इसके अलावा भी कई सरकारी विभागों में हालात ऐसे ही हैं। कायदे से इन्हें थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाना चाहिए। जीएमसी में वर्ष 2022 से ही पांच एंबुलेंस ऐसी हैं जो मरीजों को लेकर रुटीन में सड़कों पर उतरती तो हैं लेकिन यातायात नियमों के अनुसार उचित दस्तावेजों के साथ नहीं हैं। मरीजों से लेकर तीमारदारों और साथ ही चालकों को भी हादसे के बाद मिलने वाले मुआवजे में सरकार की झोली पर ही देखना होगा। इंश्योरेंस नियम पूरे नहीं होने पर मुआवजा मिलना मुश्किल होता है। इसके अलावा जीएमसी कठुआ के छात्रों के लिए इस्तेमाल होने वाली दो कॉलेज बसों का भी इंश्योरेंस नहीं है।
कोट
इस संबंध में पहले भी वित्त विभाग के समक्ष मामला उठाया गया है। ऑडिट के दौरान इंश्योरेंस को लेकर आपत्ति आई थी। फिलहाल इस मद में राशि ही जारी नहीं हो रही है। ऐसे में कई वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। एक बार फिर मामला विभाग के समक्ष रखा जाएगा।
- डॉ. सुरेंद्र अत्री, प्रधानाचार्य जीएमसी कठुआ
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कठुआ। जम्मू-कश्मीर में कई सरकारी वाहन बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे यातायात नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। कठुआ जिले में एंबुलेंस और अन्य विभागीय वाहन भी बिना जरूरी दस्तावेजों के चलते पाए गए जिससे हादसे की स्थिति में मुआवजे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कठुआ जिले में जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल की पांच एंबुलेंस, दो कॉलेज बसों के अलावा प्रधानाचार्य के वाहन भी बिना इंश्योरेंस हैं। स्थिति यहीं तक नहीं है इसके अलावा भी कई सरकारी विभागों में हालात ऐसे ही हैं। कायदे से इन्हें थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाना चाहिए। जीएमसी में वर्ष 2022 से ही पांच एंबुलेंस ऐसी हैं जो मरीजों को लेकर रुटीन में सड़कों पर उतरती तो हैं लेकिन यातायात नियमों के अनुसार उचित दस्तावेजों के साथ नहीं हैं। मरीजों से लेकर तीमारदारों और साथ ही चालकों को भी हादसे के बाद मिलने वाले मुआवजे में सरकार की झोली पर ही देखना होगा। इंश्योरेंस नियम पूरे नहीं होने पर मुआवजा मिलना मुश्किल होता है। इसके अलावा जीएमसी कठुआ के छात्रों के लिए इस्तेमाल होने वाली दो कॉलेज बसों का भी इंश्योरेंस नहीं है।
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इस संबंध में पहले भी वित्त विभाग के समक्ष मामला उठाया गया है। ऑडिट के दौरान इंश्योरेंस को लेकर आपत्ति आई थी। फिलहाल इस मद में राशि ही जारी नहीं हो रही है। ऐसे में कई वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। एक बार फिर मामला विभाग के समक्ष रखा जाएगा।
- डॉ. सुरेंद्र अत्री, प्रधानाचार्य जीएमसी कठुआ