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Kathua News: जम्मू संभाग में जोनल शिक्षा अधिकारियों के 62 फीसदी पद रिक्त
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 07 Apr 2026 02:56 AM IST
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रामबन में 83, सांबा में 80, जम्मू में 79 और कठुआ में 75 फीसदी पद खाली
हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्य प्रभारी बनकर दे रहे सेवाएं, शिक्षा व प्रशासनिक कामकाज प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जम्मू संभाग में शिक्षा व्यवस्था इस समय गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही है। पूरे संभाग में जोनल शिक्षा अधिकारी (जेडईओ) के करीब 62 फीसदी पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिसके चलते स्कूलों के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
आधिकारियों के अनुसार ये पद मुख्य रूप से समय-समय पर अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के कारण खाली हुए हैं लेकिन सरकार अब तक इन पदों को स्थायी रूप से भरने में असफल रही है। 31 मार्च को कई जगह जोनल शिक्षा अधिकारी पदों पर तैनात अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद यह संख्या और बढ़ गई है। जिलावार स्थिति पर नजर डालें तो रामबन में सबसे अधिक करीब 83 फीसदी पद रिक्त हैं। इसके अलावा सांबा में 80 फीसदी, जम्मू में 79 फीसदी और कठुआ में लगभग 75 फीसदी जोनल शिक्षा अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं। इस स्थिति में शिक्षा विभाग को अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे कामकाज चलाना पड़ रहा है।
पदों की कमी के चलते हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को प्रभारी बनाकर जोनल शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे प्रधानाचार्यों का ने केवल कार्यभार बढ़ गया है, बल्कि इसका सीधा असर स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जोनल शिक्षा अधिकारी स्कूलों की निगरानी, शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।
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समय पर पदोन्नति न होने है मुख्य वजह
शिक्षा विभाग पर समय-समय पर डीपीसी आयोजित न करने से शिक्षकों को मास्टर पद की पदोन्नति नहीं हो रही है। जिसके कारण न तो स्कूलों में विषय विशेष के मास्टर मिल पा रहे है और न ही जोनल शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति हो पा रही है। अगर पदोन्नति कर इन पदों को भरा भी जाता है, तो मात्र छह माह के भीतर यह सारे पद दोबारा रिक्त हो जाते है और यह सिलसिला पिछले कई सालों से जारी है। जिसका खामियाजा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें शैक्षणिक सत्र के दौरान विषय विशेष के शिक्षक नहीं मिल पा रहे है। सबसे ज्यादा प्रभावित पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्र हो रहे है, यहां न तो शिक्षक और न स्कूलों में बुनियादी सुविधा।
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संभाग स्तर पर जेडईओ की स्थित
जिला स्वीकृत पद भरे पद खाली पद
1. जम्मू 14 03 11
2. उधमपुर 11 05 06
3. कठुआ 12 03 09
4. सांबा 05 01 04
5. रियासी 06 03 03
6. रामबन 06 01 05
7. डोडा 10 04 06
8. किश्तवाड़ 07 03 04
9. राजोरी 15 07 08
10. पूंछ 12 07 05
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98 32 61
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हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्य प्रभारी बनकर दे रहे सेवाएं, शिक्षा व प्रशासनिक कामकाज प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जम्मू संभाग में शिक्षा व्यवस्था इस समय गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही है। पूरे संभाग में जोनल शिक्षा अधिकारी (जेडईओ) के करीब 62 फीसदी पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिसके चलते स्कूलों के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
आधिकारियों के अनुसार ये पद मुख्य रूप से समय-समय पर अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के कारण खाली हुए हैं लेकिन सरकार अब तक इन पदों को स्थायी रूप से भरने में असफल रही है। 31 मार्च को कई जगह जोनल शिक्षा अधिकारी पदों पर तैनात अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद यह संख्या और बढ़ गई है। जिलावार स्थिति पर नजर डालें तो रामबन में सबसे अधिक करीब 83 फीसदी पद रिक्त हैं। इसके अलावा सांबा में 80 फीसदी, जम्मू में 79 फीसदी और कठुआ में लगभग 75 फीसदी जोनल शिक्षा अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं। इस स्थिति में शिक्षा विभाग को अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे कामकाज चलाना पड़ रहा है।
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पदों की कमी के चलते हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को प्रभारी बनाकर जोनल शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे प्रधानाचार्यों का ने केवल कार्यभार बढ़ गया है, बल्कि इसका सीधा असर स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जोनल शिक्षा अधिकारी स्कूलों की निगरानी, शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।
समय पर पदोन्नति न होने है मुख्य वजह
शिक्षा विभाग पर समय-समय पर डीपीसी आयोजित न करने से शिक्षकों को मास्टर पद की पदोन्नति नहीं हो रही है। जिसके कारण न तो स्कूलों में विषय विशेष के मास्टर मिल पा रहे है और न ही जोनल शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति हो पा रही है। अगर पदोन्नति कर इन पदों को भरा भी जाता है, तो मात्र छह माह के भीतर यह सारे पद दोबारा रिक्त हो जाते है और यह सिलसिला पिछले कई सालों से जारी है। जिसका खामियाजा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें शैक्षणिक सत्र के दौरान विषय विशेष के शिक्षक नहीं मिल पा रहे है। सबसे ज्यादा प्रभावित पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्र हो रहे है, यहां न तो शिक्षक और न स्कूलों में बुनियादी सुविधा।
संभाग स्तर पर जेडईओ की स्थित
जिला स्वीकृत पद भरे पद खाली पद
1. जम्मू 14 03 11
2. उधमपुर 11 05 06
3. कठुआ 12 03 09
4. सांबा 05 01 04
5. रियासी 06 03 03
6. रामबन 06 01 05
7. डोडा 10 04 06
8. किश्तवाड़ 07 03 04
9. राजोरी 15 07 08
10. पूंछ 12 07 05
98 32 61