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Kathua News: रात के अंधेरे में कटाई, नालों-झाड़ियों में छिपाई खैर की लकड़ी

संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Mon, 04 May 2026 02:20 AM IST
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पुलिस द्वारा पकड़ी गई खैर की लकड़ी। संवाद
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पुष्पा स्टाइल में खैर तस्करी
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पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने बरामद की

संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। हीरानगर सब डिवीजन खैर तस्करी का गढ़ बन चुका है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खैर तस्करों ने जहां लोगों की निजी जमीनों से खैर की जमकर चोरी की है वहीं विभागों की नाक तले बड़े पैमाने पर संपदा को नुकसान पहुंचाया गया है। पिछले चार से पांच साल में कंडी के इलाकों में खैर पर तस्करों की आरी रोकने में वन, राजस्व और पुलिस तीनों की महकमे पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। हालात यह हैं कि बॉलीवुड फिल्म पुष्पा की तरह हीरानगर में खैर तस्करी का सिंडीकेट पूरी तरह से सक्रिय है। ताजा एक मामले ने इनके बुलंद होसलों की एक और पोल खोल दी है।
हीरानगर के बट्ठल चक नर्सरी से सामने आए एक सनसनीखेज मामले में तस्करों ने ठीक फिल्म पुष्पा की तर्ज पर खैर की अवैध कटाई कर लकड़ी को अलग-अलग जगहों पर छिपा दिया। जानकारी के अनुसार, तस्करों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए पहले खैर के पेड़ों की कटाई की और फिर पकड़े जाने से बचने के लिए लकड़ी को छोटे-छोटे टुकड़ों में अलग-अलग नालों, झाड़ियों और पराली के नीचे छिपा दिया। तस्करों की यह चालाकी इतनी शातिर थी कि पहली नजर में किसी को शक तक न हो। हालांकि सूचना मिलने के बाद इस बार वन विभाग और पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। जांच में तस्करों की इस ‘पुष्पा स्टाइल’ तस्करी का पर्दाफाश कर दिया। मढ़ीन पुलिस ने करीब 20 से 25 क्विंटल अवैध खैर लकड़ी को बरामद किया है। बरामद की गई लकड़ी को कब्जे में लेकर हरियाचक नर्सरी में वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में पहले भी अवैध कटाई के मामले सामने आ चुके हैं, बावजूद इसके तस्करों के हौसले कम नहीं हो रहे। फिलहाल, संबंधित विभागों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और तस्करों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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हीरानगर से पंजाब की सीमा में ले जाने के लिए तय किए हैं कई ठिकाने

लकड़ी तस्करों ने हीरानगर सब डिवीजन के पंजाब की ओर जाने वाले रूट पर कई ठिकाने तय कर रखे हैं। सिर्फ कठुआ जिले ही नहीं बल्कि संभाग के अलग अलग जगह से आने वाली वैध कटी लकड़ी को पहुुंचाने का दस्तावेजों में ठिकाना भी अक्सर कठुआ जिले की इकाईयों और आरा मिल को दिखाया जाता है। चूंकि यहां से सतर्कता हटते ही इसे पंजाब तस्करी किया जा सकता है ऐसे में यह खेल नियमित रूप से जारी है। हाल फिलहाल में वन विभाग, पुलिस ने कई ऐसे मामलों का भंडाफोड़ भी किया है।
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