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Kathua News: दो बैलों की चोरी के 13 साल बाद तीन आरोपी बरी
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सबूत के अभाव में अदालत ने सुनाया फैसला
फरार दो अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी रखने का कोर्ट ने दिया निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दो बैलों की चोरी के मामले में 13 साल बाद साक्ष्यों के अभाव में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा। लिहाजा अदालत ने तीन आरोपियों के जमानती व व्यक्तिगत बांड समाप्त कर उन्हें बरी करने का फैसला सुनाया। इसके अलावा, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में फरार अन्य दो आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी रहेंगे।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में दायर मुकदमा के अनुसार, बैल की चोरी का मामला 16 फरवरी 2013 का है। इसमें पीड़ित वेद राज निवासी पृथीचक ने सुबह सात बजे के करीब नगरी पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़ित ने बताया कि रात के समय उसके पशुशाला से दो बैल चोरी हो गए हैं। बैलों की कीमत करीब 20 हजार रुपये बताई गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में सांबा पुलिस ने नाका चेकिंग के दौरान मानसर मोड़ से एक महिंद्रा लोड कैरियर वाहन को पकड़ा, जिसमें दो सफेद बैल और एक गाय लदी हुई थी।
पुलिस ने वाहन से वली मोहम्मद निवासी चक मुरार, बिश्नाह को गिरफ्तार किया था, जबकि वाहन चालक अमजद निवासी मुरलिया आरएस पुरा मौके से फरार हो गया था। इसके बाद कठुआ पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों मोहम्मद दीन निवासी चम्बे दा बाग कठुआ, रफीक निवासी मग्गर खड्ड और फरमान अली निवासी बेड़ियां पत्तन सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र 28 दिसंबर 2015 को कोर्ट में प्रस्तुत किया था। 22 मार्च 2016 को एक फरार आरोपी अमजद को छोड़कर शेष चार के खिलाफ आरोप तय किए गए।
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इसके बाद वली मोहम्मद भी कोर्ट सुनवाई में पेश नहीं हुआ और कोर्ट ने उसे भी फरार घोषित कर दिया गया। शेष बचे तीन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट सुनवाई की गई। इसमें अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 18 में से 12 गवाह प्रस्तुत किए गए। शिकायतकर्ता वेद राज ने अदालत को बताया कि चोरी से एक दिन पहले कुछ लोग उसके बैल खरीदने आए थे, लेकिन उसने बैल बेचने से इनकार कर दिया था। अगले दिन बैल गायब मिले। उसने यह भी जानकारी नहीं दी थी कि बैल किसके कब्जे से बरामद हुए थे। अन्य गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास सामने आए।
कुछ गवाहों ने आरोपियों की पहचान पहली बार अदालत में करने की बात कही, जबकि कई गवाहों ने कहा कि पुलिस ने केवल उनके हस्ताक्षर लिए थे। इसके बाद कोर्ट ने माना कि सांबा में कथित बरामदगी करने वाली पुलिस पार्टी का कोई सदस्य अदालत में पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि तीन आरोपी चोरी किए गए पशुओं को ले जाने में कोई प्रत्यक्ष संबंध था। न ही यह साबित हुआ कि चोरी किए गए बैल इन्हीं आरोपियों के कब्जे से बरामद हुए थे। इसके बाद अदालत ने तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।
फरार दो अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी रखने का कोर्ट ने दिया निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दो बैलों की चोरी के मामले में 13 साल बाद साक्ष्यों के अभाव में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा। लिहाजा अदालत ने तीन आरोपियों के जमानती व व्यक्तिगत बांड समाप्त कर उन्हें बरी करने का फैसला सुनाया। इसके अलावा, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में फरार अन्य दो आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी रहेंगे।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में दायर मुकदमा के अनुसार, बैल की चोरी का मामला 16 फरवरी 2013 का है। इसमें पीड़ित वेद राज निवासी पृथीचक ने सुबह सात बजे के करीब नगरी पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़ित ने बताया कि रात के समय उसके पशुशाला से दो बैल चोरी हो गए हैं। बैलों की कीमत करीब 20 हजार रुपये बताई गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में सांबा पुलिस ने नाका चेकिंग के दौरान मानसर मोड़ से एक महिंद्रा लोड कैरियर वाहन को पकड़ा, जिसमें दो सफेद बैल और एक गाय लदी हुई थी।
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पुलिस ने वाहन से वली मोहम्मद निवासी चक मुरार, बिश्नाह को गिरफ्तार किया था, जबकि वाहन चालक अमजद निवासी मुरलिया आरएस पुरा मौके से फरार हो गया था। इसके बाद कठुआ पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों मोहम्मद दीन निवासी चम्बे दा बाग कठुआ, रफीक निवासी मग्गर खड्ड और फरमान अली निवासी बेड़ियां पत्तन सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र 28 दिसंबर 2015 को कोर्ट में प्रस्तुत किया था। 22 मार्च 2016 को एक फरार आरोपी अमजद को छोड़कर शेष चार के खिलाफ आरोप तय किए गए।
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इसके बाद वली मोहम्मद भी कोर्ट सुनवाई में पेश नहीं हुआ और कोर्ट ने उसे भी फरार घोषित कर दिया गया। शेष बचे तीन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट सुनवाई की गई। इसमें अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 18 में से 12 गवाह प्रस्तुत किए गए। शिकायतकर्ता वेद राज ने अदालत को बताया कि चोरी से एक दिन पहले कुछ लोग उसके बैल खरीदने आए थे, लेकिन उसने बैल बेचने से इनकार कर दिया था। अगले दिन बैल गायब मिले। उसने यह भी जानकारी नहीं दी थी कि बैल किसके कब्जे से बरामद हुए थे। अन्य गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास सामने आए।
कुछ गवाहों ने आरोपियों की पहचान पहली बार अदालत में करने की बात कही, जबकि कई गवाहों ने कहा कि पुलिस ने केवल उनके हस्ताक्षर लिए थे। इसके बाद कोर्ट ने माना कि सांबा में कथित बरामदगी करने वाली पुलिस पार्टी का कोई सदस्य अदालत में पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि तीन आरोपी चोरी किए गए पशुओं को ले जाने में कोई प्रत्यक्ष संबंध था। न ही यह साबित हुआ कि चोरी किए गए बैल इन्हीं आरोपियों के कब्जे से बरामद हुए थे। इसके बाद अदालत ने तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।