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Poonch News: ऑपरेशन सिंदूर के पीड़ितों ने पाकिस्तान से बातचीत की पैरवी करने वालों पर साधा निशाना
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कहा - सियासी लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हुए हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। ऑपरेशन सिंदूर के पीड़ितों और पाकिस्तानी गोलाबारी में जान गंवाने वालों के रिश्तेदारों ने भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत करने का समर्थन करने वालों पर निशाना साधा हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों डॉ. फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित अन्य सियासी लोग इसी बहाने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में अपने भतीजे को गंवाने वाले सुरजन सिंह, बेटा गंवाने वाले संजीव कुमार, पाकिस्तानी गोलीबारी में बेटा गंवाने वाले मोहम्मद बशीर आदि का कहना है कि जो नेता लोग पत्र लिखकर पाकिस्तान से बातचीत करने की मांग कर रहे हैं, वह अपना निजी हित देख रहे हैं। पाकिस्तान से किसी प्रकार की बातचीत नहीं होनी चाहिए क्योंकि जब-जब भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की, तभी पाकिस्तान ने निहत्थे लोगों पर हमला कर हमारी पीठ में छुरा घोंपा है। चाहे वह कारगिल हो, पुलवामा हो, पहलगाम हो।
पाकिस्तान से बातचीत एवं दोस्ती करने की बात करने वाले एक भी नेता ने पाकिस्तानी गोलाबारी अथवा आतंकवाद में अपने किसी सगे रिश्तेदार को नहीं खोया है। पाकिस्तान उन लोगों का नहीं हो सका, जो अपना सब कुछ छोड़ पाकिस्तान चले गए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। ऑपरेशन सिंदूर के पीड़ितों और पाकिस्तानी गोलाबारी में जान गंवाने वालों के रिश्तेदारों ने भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत करने का समर्थन करने वालों पर निशाना साधा हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों डॉ. फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित अन्य सियासी लोग इसी बहाने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में अपने भतीजे को गंवाने वाले सुरजन सिंह, बेटा गंवाने वाले संजीव कुमार, पाकिस्तानी गोलीबारी में बेटा गंवाने वाले मोहम्मद बशीर आदि का कहना है कि जो नेता लोग पत्र लिखकर पाकिस्तान से बातचीत करने की मांग कर रहे हैं, वह अपना निजी हित देख रहे हैं। पाकिस्तान से किसी प्रकार की बातचीत नहीं होनी चाहिए क्योंकि जब-जब भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की, तभी पाकिस्तान ने निहत्थे लोगों पर हमला कर हमारी पीठ में छुरा घोंपा है। चाहे वह कारगिल हो, पुलवामा हो, पहलगाम हो।
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पाकिस्तान से बातचीत एवं दोस्ती करने की बात करने वाले एक भी नेता ने पाकिस्तानी गोलाबारी अथवा आतंकवाद में अपने किसी सगे रिश्तेदार को नहीं खोया है। पाकिस्तान उन लोगों का नहीं हो सका, जो अपना सब कुछ छोड़ पाकिस्तान चले गए।
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