12 साल बाद फिर टूटा राजोरी पर कुदरत का कहर: 2014 की बाढ़ की दर्दनाक यादें हुईं ताजा, बदल दिया शहर का मंजर
राजोरी में 2026 की फ्लैश फ्लड ने 2014 की विनाशकारी बाढ़ की यादें ताजा कर दीं, जहां भारी बारिश से शहर और आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई।
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करीब 12 वर्ष पहले 2014 में आई विनाशकारी बाढ़ की दर्दनाक यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। रविवार देर रात से सोमवार सुबह तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद राजोरी में आई फ्लैश फ्लड ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही मचा दी। कई इलाके जलमग्न हो गए, सैकड़ों वाहन बह गए, मकानों और दुकानों में पानी घुस गया, जबकि कई लोगों की मौत और लापता होने की घटनाओं ने पूरे जिले को शोक में डुबो दिया। प्रशासन, सेना, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
हालांकि वर्ष 2014 की बाढ़ का मुख्य प्रभाव राजोरी के लाम भाटा में हुआ था जहां बरात ले जा रही एक पूरी बस उफनते नाले में समा गई थी और करीब 49 लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था और उस हादसे में लापता हुए कई लोगों के शव आज तक नहीं मिले हैं। उस समय राजोेरी जिले के कई हिस्सों में भी भारी वर्षा, नदियों और नालों के उफान तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था।
उस प्राकृतिक आपदा ने जिले में व्यापक जन-धन की हानि की थी और दर्जनों लोगों की जान गई थी।इस बार वर्ष 2026 की आपदा का सबसे बड़ा असर सीधे राजोेरी शहर पर देखने को मिला। देर रात हुई तेज बारिश के बाद दरहाल और अन्य बरसाती नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। नई बस स्टैंड बेला क्षेत्र, मलिक मार्केट, निचले इलाकों और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में पानी का तेज बहाव घुस आया। पार्किंग में खड़े अनगिनत वाहन देखते ही देखते पानी में बह गए या मलबे के नीचे दब गए। कई परिवारों को रातों-रात सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
फ्लैश फ्लड में कई लोगों के लापता होने की सूचना मिली। राहत अभियान के दौरान कुछ लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि अन्य की तलाश जारी है। जिले के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हो गईं और सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने और मौसम सामान्य होने तक सतर्क रहने की अपील की है।रात में आई तबाही, संभलने तक का मौका नहीं मिला
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वर्ष 2014 के बाद पहली बार उन्होंने राजोरी में इतनी भयावह स्थिति देखी है। रात के अंधेरे में पानी का स्तर अचानक बढ़ा और लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई परिवार सामान छोड़कर जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।प्रशासन नुकसान का आकलन करने में जुटा
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही अत्यधिक वर्षा, अनियोजित निर्माण, नदी-नालों पर बढ़ते अतिक्रमण और जल निकासी व्यवस्था की कमजोर स्थिति ऐसे फ्लैश फ्लड के प्रभाव को और गंभीर बना रही है। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम, समय पर चेतावनी तंत्र और नदी तटों पर अतिक्रमण हटाने जैसे कदम उठाना आवश्यक है। फिलहाल जिला प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रहा है।
राहत शिविर स्थापित किए गए हैं तथा प्रभावित परिवारों तक भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है। सेना, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। अब सभी की निगाहें राहत, पुनर्वास और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए स्थायी उपायों पर टिकी हैं।