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Rajouri News: गंभीर मुगला-डोरी माल के जंगलों में सेना की भारी गोलाबारी
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राजोेरी में ''ऑपरेशन शेरूवाली'' का छठा दिन, आतंकियों की तलाश जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। राजोरी जिले के मंजाकोट सेक्टर में आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान वीरवार को छठे दिन भी जारी रहा। गंभीर मुगला डोरी माल के घने और कंटीले जंगलों में छिपे दो-तीन आतंकियों को ढेर करने के लिए भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप, पैरा कमांडो और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं।
वीरवार सुबह 7 और 8 बजे के बीच सुरक्षा बलों ने आतंकियों के संभावित ठिकानों को निशाना बनाकर फिर से भारी गोलाबारी की और रॉकेट लांचर दागे, जिससे जंगल के कुछ हिस्सों से धुआं उठता देखा गया। हालांकि, बेहद दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों का फायदा उठाकर आतंकी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं।
सुबह की गोलाबारी से गूंजा पूरा इलाका
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने वीरवार सुबह संदिग्ध ठिकानों की घेराबंदी मजबूत करते हुए स्पेकुलेटिव फायरिंग (संभावित ठिकानों पर गोलाबारी) तेज कर दी है। घने जंगल में अंधेरे का लाभ उठाकर आतंकी जंगल के अंदरूनी हिस्सों में न भाग सकें, इसलिए सेना ने मल्टीपर्पज ग्रेनेड लांचर और मोर्टार का इस्तेमाल किया। धमाकों और गोलियों की गूंज से पूरा मंजाकोट और गंभीर मुगला इलाका दहल उठा, लेकिन फिलहाल आतंकियों की तरफ से जवाबी फायरिंग की कोई खबर नहीं है।
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मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियां बनीं बड़ी चुनौती : सुरक्षा बलों के लिए यह सर्च ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। स्थानीय निवासियों और सैन्य सूत्रों के अनुसार घने जंगल और ऊंची पहाड़ियां, पीर पंजाल बेल्ट का यह हिस्सा बेहद घने जंगलों, प्राकृतिक गुफाओं और खड़ी चट्टानों से भरा है, जहां पैदल मूवमेंट करना बेहद जोखिम भरा है।
हाईटेक गैजेट्स का इस्तेमाल : आतंकियों को ढूंढने के लिए सेना हेलीकॉप्टर, नाइट-विज़न कैमरों से लैस ड्रोन, पैरा कमांडो और स्निफर डॉग्स की मदद ले रही है लेकिन फिलहाल कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। राजोरी जिले के मंजाकोट सेक्टर में आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान वीरवार को छठे दिन भी जारी रहा। गंभीर मुगला डोरी माल के घने और कंटीले जंगलों में छिपे दो-तीन आतंकियों को ढेर करने के लिए भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप, पैरा कमांडो और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं।
वीरवार सुबह 7 और 8 बजे के बीच सुरक्षा बलों ने आतंकियों के संभावित ठिकानों को निशाना बनाकर फिर से भारी गोलाबारी की और रॉकेट लांचर दागे, जिससे जंगल के कुछ हिस्सों से धुआं उठता देखा गया। हालांकि, बेहद दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों का फायदा उठाकर आतंकी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं।
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सुबह की गोलाबारी से गूंजा पूरा इलाका
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने वीरवार सुबह संदिग्ध ठिकानों की घेराबंदी मजबूत करते हुए स्पेकुलेटिव फायरिंग (संभावित ठिकानों पर गोलाबारी) तेज कर दी है। घने जंगल में अंधेरे का लाभ उठाकर आतंकी जंगल के अंदरूनी हिस्सों में न भाग सकें, इसलिए सेना ने मल्टीपर्पज ग्रेनेड लांचर और मोर्टार का इस्तेमाल किया। धमाकों और गोलियों की गूंज से पूरा मंजाकोट और गंभीर मुगला इलाका दहल उठा, लेकिन फिलहाल आतंकियों की तरफ से जवाबी फायरिंग की कोई खबर नहीं है।
मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियां बनीं बड़ी चुनौती : सुरक्षा बलों के लिए यह सर्च ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। स्थानीय निवासियों और सैन्य सूत्रों के अनुसार घने जंगल और ऊंची पहाड़ियां, पीर पंजाल बेल्ट का यह हिस्सा बेहद घने जंगलों, प्राकृतिक गुफाओं और खड़ी चट्टानों से भरा है, जहां पैदल मूवमेंट करना बेहद जोखिम भरा है।
हाईटेक गैजेट्स का इस्तेमाल : आतंकियों को ढूंढने के लिए सेना हेलीकॉप्टर, नाइट-विज़न कैमरों से लैस ड्रोन, पैरा कमांडो और स्निफर डॉग्स की मदद ले रही है लेकिन फिलहाल कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।