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Rajouri News: पशुपालकों और युवाओं को पशुधन के विकास व स्वरोजगार योजनाओं के बारे में बताया
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राजोरी। पशुपालन विभाग जम्मू की तरफ से वीरवार को राजोेरी जिले के केवल क्षेत्र में एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें पशुपालकों, किसानों तथा बेरोजगार युवाओं को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न पशुधन विकास एवं स्वरोजगार योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विभाग की प्रमुख योजनाओं होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एचएडीपी) और इंटीग्रेटेड डेयरी डेवलपमेंट स्कीम (आईडीडीएस) के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से डेयरी, भेड़ पालन, बकरी पालन, पोल्ट्री तथा अन्य पशुधन आधारित उद्यम स्थापित करने और उनका विस्तार करने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। युवाओं और किसानों से इन योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार के अवसर पैदा करने और अपनी आय बढ़ाने का आह्वान किया गया।
शिविर में पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों, उनके बचाव, टीकाकरण, उपचार और नियंत्रण संबंधी उपायों पर भी विशेष जानकारी दी गई। पशुपालकों को पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाने के लिए जागरूक किया गया। इस अवसर पर उपस्थित पशुपालकों को विभाग की ओर से निःशुल्क दवाइयों का भी वितरण किया गया।
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कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के प्रचार प्रकोष्ठ के एक्सटेंशन ऑफिसर डॉ. सज्जाद ने विभागीय योजनाओं तथा पशुधन प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। वहीं डॉ. गुलाब सिंह (वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन) और डॉ. जमील (वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन) ने भी उपस्थित लोगों को पशु स्वास्थ्य सेवाओं, रोग नियंत्रण तथा वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
इस अवसर पर पूर्व सरपंच केवल मोहम्मद फारूक इंकलाबी ने पशुपालन विभाग की सराहना करते हुए कहा कि विभाग द्वारा गांव स्तर पर इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि यह योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा किसानों और पशुपालकों की आजीविका में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं और पशुपालकों से अपील की कि वे सरकार की इन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें और उनका अधिक से अधिक लाभ उठाकर स्वरोजगार के नए अवसर स्थापित करें। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंच सके।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विभाग की प्रमुख योजनाओं होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एचएडीपी) और इंटीग्रेटेड डेयरी डेवलपमेंट स्कीम (आईडीडीएस) के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से डेयरी, भेड़ पालन, बकरी पालन, पोल्ट्री तथा अन्य पशुधन आधारित उद्यम स्थापित करने और उनका विस्तार करने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। युवाओं और किसानों से इन योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार के अवसर पैदा करने और अपनी आय बढ़ाने का आह्वान किया गया।
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शिविर में पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों, उनके बचाव, टीकाकरण, उपचार और नियंत्रण संबंधी उपायों पर भी विशेष जानकारी दी गई। पशुपालकों को पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाने के लिए जागरूक किया गया। इस अवसर पर उपस्थित पशुपालकों को विभाग की ओर से निःशुल्क दवाइयों का भी वितरण किया गया।
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के प्रचार प्रकोष्ठ के एक्सटेंशन ऑफिसर डॉ. सज्जाद ने विभागीय योजनाओं तथा पशुधन प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। वहीं डॉ. गुलाब सिंह (वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन) और डॉ. जमील (वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन) ने भी उपस्थित लोगों को पशु स्वास्थ्य सेवाओं, रोग नियंत्रण तथा वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
इस अवसर पर पूर्व सरपंच केवल मोहम्मद फारूक इंकलाबी ने पशुपालन विभाग की सराहना करते हुए कहा कि विभाग द्वारा गांव स्तर पर इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि यह योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा किसानों और पशुपालकों की आजीविका में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं और पशुपालकों से अपील की कि वे सरकार की इन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें और उनका अधिक से अधिक लाभ उठाकर स्वरोजगार के नए अवसर स्थापित करें। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंच सके।