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Rajouri News: टीईटी को इन-सर्विस शिक्षकों के लिए अनिवार्य करने का विरोध
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राजोेरी। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जिला राजोेरी इकाई ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर इन-सर्विस शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की है। इस संबंध में संगठन के जिला अध्यक्ष देवेंद्र खजूरिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त राजोेरी से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2010 में संशोधन कर पहले से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग की गई है। इसके अलावा पत्रकार सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने इन-सर्विस शिक्षकों के लिए टीईटी को अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण बताया। पत्रकार सम्मेलन को जिला अध्यक्ष देवेंद्र खजूरिया, जिला संगठन सचिव भारत भूषण तथा एबीआरएसएम के प्रदेश महासचिव गुलशन रैना ने संबोधित किया।
इस अवसर पर गुलशन रैना ने कहा कि टीईटी भर्ती के समय एक बुनियादी योग्यता हो सकती है, लेकिन वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए इसे अनिवार्य बनाना शिक्षकों की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि आरटीई अधिनियम का समय पर क्रियान्वयन नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की है, न कि शिक्षकों की।
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उन्होंने कहा कि एबीआरएसएम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के हर प्रयास का समर्थन करता है लेकिन यह कार्यरत शिक्षकों के भविष्य की कीमत पर नहीं होना चाहिए। रैना ने कहा कि अपने कॅरिअर के उच्च स्तर तक पहुंच चुके शिक्षकों की योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं है। संगठन ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए इन-सर्विस शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की है।
ज्ञापन में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2010 में संशोधन कर पहले से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग की गई है। इसके अलावा पत्रकार सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने इन-सर्विस शिक्षकों के लिए टीईटी को अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण बताया। पत्रकार सम्मेलन को जिला अध्यक्ष देवेंद्र खजूरिया, जिला संगठन सचिव भारत भूषण तथा एबीआरएसएम के प्रदेश महासचिव गुलशन रैना ने संबोधित किया।
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इस अवसर पर गुलशन रैना ने कहा कि टीईटी भर्ती के समय एक बुनियादी योग्यता हो सकती है, लेकिन वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए इसे अनिवार्य बनाना शिक्षकों की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि आरटीई अधिनियम का समय पर क्रियान्वयन नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की है, न कि शिक्षकों की।
उन्होंने कहा कि एबीआरएसएम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के हर प्रयास का समर्थन करता है लेकिन यह कार्यरत शिक्षकों के भविष्य की कीमत पर नहीं होना चाहिए। रैना ने कहा कि अपने कॅरिअर के उच्च स्तर तक पहुंच चुके शिक्षकों की योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं है। संगठन ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए इन-सर्विस शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की है।