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Rajouri News: एलपीजी वितरकों ने डिलीवरी नियमों में तत्काल राहत की मांग की

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एलपीजी वितरकों ने डिलीवरी नियमों में तत्काल राहत की मांग को लेकर ज्ञापन सौंप। - फोटो : rajori news
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राजोरी। जिला राजोरी के एलपीजी वितरकों ने सहायक निदेशक खाद्य एवं आपूर्ति को एक ज्ञापन सौंपते हुए गंभीर परिचालन चुनौतियों को उजागर किया है। जिले भर में निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डिलीवरी नियमों में राहत की मांग की है।
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इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का प्रतिनिधित्व करने वाले वितरकों ने पिछले एक से दो महीनों के दौरान विशेषकर दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में सुचारू डिलीवरी बनाए रखने में आ रही बढ़ती कठिनाइयों पर चिंता व्यक्त की है।
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ज्ञापन में उठाया गया एक प्रमुख मुद्दा ओटीपी आधारित डिलीवरी प्रणाली की अव्यावहारिकता है। वितरकों ने बताया कि डिलीवरी को केवल ओटीपी प्रमाणीकरण के बाद ही पूर्ण माना जाता है जो खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में अत्यंत चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ओटीपी प्राप्त करने में देरी और सत्यापन के दौरान अमान्य ओटीपी के कारण वास्तविक डिलीवरी होने के बावजूद रिकॉर्ड में विसंगतियां उत्पन्न हो रही हैं।
इस संदर्भ में वितरकों ने परिचालन दबाव को कम करने के लिए डीएसी आधारित रिफिल में 50 फीसदी छूट की विशेष मांग की है। ज्ञापन में केवाईसी अनुपालन में आने वाली बड़ी बाधाओं का भी उल्लेख किया गया है। वितरकों का कहना है कि कई उपभोक्ता बार-बार केवाईसी प्रक्रिया का विरोध करते हैं। खासकर तब जब कनेक्शन के समय पहले ही दस्तावेज जमा किए जा चुके हों। साथ ही वितरकों के पास अनुपालन लागू करवाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जिससे सेवा बाधित होती है और उपभोक्ताओं के साथ संबंधों में तनाव उत्पन्न होता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को लेकर भी चिंता जताई गई है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की कई वृद्ध महिलाओं के पास मोबाइल फोन नहीं है, जिससे ओटीपी आधारित प्रणाली उनके लिए अनुपयोगी हो जाती है और वे आवश्यक एलपीजी सेवाओं से वंचित रह जाती हैं। राजोरी जिले की भौगोलिक और स्थलाकृतिक परिस्थितियां, जैसे सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्र डिलीवरी समय को और जटिल बनाते हैं। इसके साथ ही सख्त रिपोर्टिंग आवश्यकताएं और बार-बार बदलते दिशानिर्देश भी समस्याओं को बढ़ाते हैं। बढ़ते दबाव और अव्यावहारिक नियमों के कारण कार्यबल से जुड़ी समस्याएं भी सामने आई हैं, जिनमें कर्मचारियों का नौकरी छोड़ना शामिल है। नए कर्मचारियों की भर्ती और प्रशिक्षण में समय लगता है। इससे वितरकों और कर्मचारियों दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
वित्तीय स्थिरता भी एक गंभीर चिंता के रूप में उभरी है। वितरक न्यूनतम कमीशन पर कार्य कर रहे हैं और रिफिल चक्र में 25–45 दिनों की देरी तथा रिपोर्टिंग संबंधी बाधाएं उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रही हैं। कई वितरकों ने चेतावनी दी है कि वर्तमान प्रणाली आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रह गई है।
इन चुनौतियों के बावजूद वितरकों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और बताया कि उन्होंने कोविड 19 महामारी और सीमा क्षेत्रों में तनावपूर्ण परिस्थितियों के दौरान भी अग्रिम पंक्ति के सेवा प्रदाता के रूप में कार्य किया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियां उनकी परिचालन क्षमता से बाहर हो चुकी हैं।
वितरकों ने प्रशासन की सकारात्मक भूमिका को भी स्वीकार किया और कहा कि सहायक निदेशक, खाद्य एवं आपूर्ति रोहित कुमार ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना है। उन्होंने कठिन समय में जिला प्रशासन द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की और वर्तमान स्थिति में शीघ्र हस्तक्षेप की आशा व्यक्त की।
ज्ञापन सौंपने वाले एलपीजी वितरकों के प्रतिनिधिमंडल में नितीश महाजन, मोहम्मद फारूक, लियाकत अली, यशुवर्धन सिंह ठाकुर, मोहम्मद असलम, उमर खान, राजा अहमद लोन और निलेश महाजन शामिल थे।
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