सरहद बनी दीवार: भाई का जनाजा इस पार...बिलखती रहीं बहनें उस पार, अपनों को आखिरी बार छू भी न सके; वीडियो
केरन सेक्टर में एलओसी के पास एक जनाजे के दौरान भावुक दृश्य सामने आया जहां किशनगंगा नदी के इस पार अंतिम विदाई दी जा रही थी। नदी के उस पार पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में खड़े परिजन रोते-बिलखते रहे, लेकिन सरहद की पाबंदियों के कारण शामिल नहीं हो सके।
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कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे केरन सेक्टर में रविवार को एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने सरहदों के बीच बंटे परिवारों की बेबसी को उजागर कर दिया। किशनगंगा नदी के इस पार जहां एक व्यक्ति का जनाजा उठाया जा रहा था, वहीं नदी के उस पार पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में खड़े उसके परिजन रोते-बिलखते नजर आए।
जानकारी के अनुसार, केरन निवासी राजा लियाकत अली खान जो राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत थे और गांदरबल में तैनात थे जिनका हाल ही में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनका इलाज शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में चल रहा था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
रविवार को जब उनका जनाजा उनके गांव लाया गया तो बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। जनाजे को कुछ समय के लिए किशनगंगा नदी के किनारे लाया गया, जहां नमाज-ए-जनाजा अदा की गई। इसी दौरान नदी के पार पीओके में खड़े उनके भाई-बहन और अन्य रिश्तेदार भी इकट्ठा हो गए। दोनों ओर से लोग एक-दूसरे को देखते रहे, लेकिन सरहद की पाबंदियों के कारण पास नहीं आ सके। यह दृश्य बेहद मार्मिक था और दोनों तरफ लोगों की आंखें नम थीं।
स्थानीय लोगों के अनुसार राजा लियाकत के परिवार के कुछ सदस्य 1990 के दशक की शुरुआत में पीओके चले गए थे और वह अपनी मां के पास वापस लौट आए थे। आज भी उनके कई करीबी रिश्तेदार एलओसी के उस पार रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मौके बेहद पीड़ादायक होते हैं, जब कुछ मीटर की दूरी पर खड़े अपने ही लोग चाहकर भी जनाजे में शामिल नहीं हो पाते।
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