Amar Ujala Medhavi Award: बच्चों की कामयाबी देख गर्व से खिले मां-बाप के चेहरे, टॉपर्स ने साझा किए सक्सेस टिप्स
Amar Ujala Medhavi Chhatra Samman 2026: अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह में 12वीं के टॉपर्स ने मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी साझा की। कई ने मुश्किल हालात और परिवार की बीमारी को पार किया। अभिभावकों के चेहरे गर्व से खिल उठे, बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस बनने के सपने देख रहे हैं।
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बेटियों के हाथ में मेडल और प्रमाणपत्र थे जबकि उनके साथ पहुंचे पिताओं के चेहरों पर खुशी और गर्व साफ नजर आ रहा था। सम्मान समारोह में बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावकों के लिए भी यह दिन खास रहा। किसी ने भरोसे को ताकत बताया तो किसी ने अनुशासन को सफलता की कुंजी माना। पेशे से शिक्षक गुलजार अहमद (ऐशमुकाम से) के लिए यह दिन इसलिए खास रहा क्योंकि उनकी बेटी फलक गुलजार ने 12वीं विज्ञान में 99 फीसदी अंक हासिल किए हैं। वह अब डॉक्टर बनने के लिए नीट की तैयारी कर रहीं हैं। गुलजार अहमद मानते हैं कि बच्चों पर अंकों का दबाव बनाने के बजाय उन पर भरोसा करना ज्यादा जरूरी है। उनके अनुसार फलक ने हमेशा पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता में रखा और लक्ष्य तय करने के बाद उसी पर ध्यान दिया।
विपरीत हालात को मात दे हौसलों से छुआ सफलता का आसमान
किसी के घर में मां गंभीर बीमारी से जूझ रही थी तो किसी के घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बुलंदियों को छू लें। उन्हें अपना पसंदीदा विषय चुनने के लिए घर से लेकर बाहर तक तमाम बातें सुननी पड़ीं लेकिन बोर्ड परीक्षा के दौरान अपने ऊपर कोई तनाव हावी नहीं होने दिया। हालात हर किसी के लिए अलग थे लेकिन लक्ष्य एक...। इसी आत्मविश्वास ने कश्मीर संभाग में 12वीं कक्षा के साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स और होम साइंस के टॉपर्स को हजारों विद्यार्थियों के बीच में अलग पहचान दी। मेधावियों ने साबित किया कि सफलता संसाधनों या परिस्थितियों की मोहताज नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास बड़ा आधार होते हैं। सोमवार को श्रीनगर के एसकेआईसीसी में टॉपर्स ने अपनी कामयाबी की कहानी साझा की।
बेटियों की कामयाबी पर क्या बोले पिता
बेटी लोन जैनब-उन-निसा की इस उपलब्धि पर हिलाल लोन (गांदरबल से) खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। जैनब ने 10वीं में 100 फीसदी अंक हासिल किए हैं और आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना चाहतीं हैं। लोन के मुताबिक सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जैनब ने पूरे साल नियमित पढ़ाई की और समय का सही इस्तेमाल किया। लगातार मेहनत और अनुशासन ही बच्चों को बड़ी सफलता तक पहुंचाते हैं।
श्रीनगर के तारिक अली बताते हैं कि उन्होंने हमेशा बेटी जुहा को अपनी पसंद और रुचि के मुताबिक आगे बढ़ने की आजादी दी। जुहा ने 12वीं विज्ञान में 99% अंक हासिल किए हैं और अब इंजीनियर बनना चाहती हैं। उनके अनुसार हर बच्चे की अपनी अलग काबिलियत होती है, इसलिए उसको तुलना किसी दूसरे से नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे सम्मान बच्चों को यह भरोसा देते हैं कि उनकी मेहनत सही दिशा में जा रही है।
बच्चों की कामयाबी देख गर्व से खिले माता-पिता के चेहरे
अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह ने माता-पिता और बच्चों के रिश्ते की खूबसूरती को बयां किया। कई मेधावी किसी कारणवश समारोह में शामिल नहीं हो सके। उनकी जगह माता-पिता ने मंच पर सम्मान ग्रहण किया। बच्चों की उपलब्धि पर उनके चेहरों पर गर्व और संतोष साफ झलक रहा था। हब्बाकदल के सज्जाद अहमद बेटे अब्दुल हादी कुरैशी की ओर से सम्मान लेने पहुंचे।
अब्दुल 12वीं कक्षा के छात्र थे और इन दिनों चंडीगढ़ में आईईएलटीएस परीक्षा देने गए हैं। सज्जाद अहमद ने बताया कि बेटे की मेहनत का सम्मान मिलना पूरे परिवार के लिए खुशी और गर्व की बात है। कुलगाम के दूरदराज सरनू से आईं मसूद अख्तर ने बेटी लुमत-उर-नूर की ओर से सम्मान ग्रहण किया। 12वीं कक्षा की छात्रा किसी कारण से समारोह में शामिल नहीं हो सकीं। मां ने कहा, बेटी की सफलता ने परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
अभिभावकों ने साझा की खुशी
काजीगुंड के कुरीगाम से पहुंचीं तोहीदा जान ने बेटे फुखरान जहांगीर की ओर से सम्मान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि बेटे की उपलब्धि सबसे बड़ा पुरस्कार है। उपराज्यपाल के हाथों बेटे को सम्मानित होना देखना चाहती थी लेकिन वह नहीं पहुंच पाया। यह पुरस्कार हमेशा एक अच्छी याद होगी।
दूसरों की सलाह नहीं, अपनी रुचि को दी प्राथमिकता
श्रीनगर की अदीबा याकूब ने होम साइंस में 96 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉप किया है। बताती हैं कि 11वीं कक्षा में अंक अच्छे नहीं थे लेकिन 12वीं में टॉपर बनने का लक्ष्य बनाया था। अमूनन लोग होम साइंस को खाना बनाने का विषय समझते हैं जबकि यह स्वास्थ्य, पोषण और जीवन कौशल से जुड़ा विषय है। कहा कि विद्यार्थियों को समाज की धारणाओं से प्रभावित होने के बजाय अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनना चाहिए।
मुश्किल हालात ने कामयाबी का इरादा किया और मजबूत
अनंतनाग के बीएचएसएस मट्टन के छात्र ताबिन रियाज ने 12वीं में 500 में 500 अंक हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि 12वीं कक्षा के दौरान मां हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रही थीं। परिवार मानसिक तनाव में था। ऐसे समय में पढ़ाई में लय बनाए रखना आसान नहीं था लेकिन परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। नियमित पढ़ाई की। एआई का उपयोग किया जिसने तैयारी और आसान कर दी। तकनीक का सही इस्तेमाल छात्रों के लिए नई संभावनाएं बनाता है।
कश्मीर हार्वर्ड स्कूल नसीम बाग की हफ्सा शेख मकसूद ने साइंस स्ट्रीम में 500 में से 500 अंक हासिल किए हैं। उन्होंने 10वीं और 11वीं में भी 98 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। हफ्सा का कहना है कि बोर्ड परीक्षा को लेकर छात्रों में अनावश्यक डर होता है। यदि नियमित और योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई की जाए तो अच्छे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने परीक्षा की तैयारी के दौरान ऑनलाइन अध्ययन सामग्री का भी भरपूर उपयोग किया।
रुचि और लक्ष्य के अनुसार करें विषय का चयन
कश्मीर हार्वर्ड स्कूल की सौलिहा नबी वानी ने कॉमर्स स्ट्रीम में 498 अंक (99.6 प्रतिशत) प्राप्त किए हैं। कहती हैं कि विद्यार्थियों को विषय का चयन अंकों या दूसरों की सलाह पर नहीं अपनी रुचि और भविष्य के लक्ष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। परीक्षा के दौरान मुख्य विषयों पर फोकस और समय का सही प्रबंधन अच्छे परिणाम दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।