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Leh-Ladakh: लद्दाख में हरियाली की नई शुरुआत, 800 एकड़ बंजर भूमि होगी पुनर्जीवित

अमर उजाला नेटवर्क, लेह Published by: Nikita Gupta Updated Mon, 25 May 2026 12:28 PM IST
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सार

लद्दाख में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने स्पितुक के पास 800 एकड़ बंजर भूमि को पुनर्जीवित करने के लिए पारिस्थितिक पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की है, जिसमें अतिरिक्त नहर जल से भूजल पुनर्भरण और हरियाली बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

In Ladakh, Lieutenant Governor VK Saxena launched an ecological restoration project near Spituk.
लेह में बंजर भूमि का निरीक्षण करते हुए लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख में बढ़ते भूमि क्षरण से निपटने के लिए स्पितुक के निकट लगभग 800 एकड़ बंजर भूमि को पुनर्जीवित करने हेतु एक महत्वाकांक्षी पारिस्थितिक पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की है।



यह पायलट परियोजना नवीन मीठे जल पुनर्भरण तकनीकों के माध्यम से शीत मरुस्थलीय क्षेत्र को एक उत्पादक पारिस्थितिकी तंत्र में बदलने का प्रयास है। सदियों से बंजर पड़ी इस भूमि को हाल ही में पुनर्स्थापित की गई इगू–फे सिंचाई नहर के अतिरिक्त जल से पुनर्जीवित किया जाएगा।
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इस पहल के तहत नहर के अतिरिक्त पानी को अस्थायी चैनलों तथा ट्रैक्टरों और अन्य मशीनों की सहायता से किए गए छोटे भू-कार्य हस्तक्षेपों के माध्यम से बंजर भूमि पर फैलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना का उद्देश्य मिट्टी में नमी बढ़ाना, भूजल पुनर्भरण करना और प्राकृतिक वनस्पति के विकास को प्रोत्साहित करना है। लद्दाख में वार्षिक वर्षा 100 मिमी से भी कम होने के कारण यह क्षेत्र मुख्य रूप से हिमनदों के पिघले जल पर निर्भर है। हालांकि शुरुआती वसंत में तेज बहाव के कारण मिट्टी का कटाव और भूजल पुनर्भरण में कमी होती है, जिससे उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर मरुस्थल में बदल जाती है।
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परियोजना का मुख्य उद्देश्य मीठे पानी को भूमि में ठहरने और रिसने देना है, जिससे सूख चुके जलभंडार पुनर्भरित होंगे और पारिस्थितिक संतुलन बहाल होगा। प्रशासन का मानना है कि इससे वनस्पति विकास को बढ़ावा मिलेगा, मिट्टी का कटाव कम होगा, हानिकारक लवण बाहर निकलेंगे और भविष्य में कृषि तथा वनीकरण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी। अधिकारियों के अनुसार मिट्टी में नमी बढ़ने पर बंजर भूमि में मौजूद सुप्त बीज अंकुरित होने लगेंगे, जिससे पहले घास और झाड़ियां उगेंगी तथा बाद में बड़ी वनस्पतियां विकसित होंगी। 

यह पहल पौधों की जड़ों के माध्यम से मिट्टी को मजबूती प्रदान कर भूमि क्षरण को रोकने में भी  मदद करेगी। प्रशासन ने कहा कि यह परियोजना मिट्टी की उर्वरता बहाल कर और सिंचाई के विश्वसनीय स्रोत तैयार कर कृषि तथा पशुपालन के लिए दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान कर सकती है। इस पहल पर बोलते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह परियोजना लद्दाख में टिकाऊ सिंचाई विस्तार, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और कृषि उत्पादकता का एक मॉडल बन सकती है। यह परियोजना ‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ के सफल क्रियान्वयन और इगू–फे नहर की बहाली के बाद शुरू की गई है जिसे 15 मई को पुनः चालू किया गया था। यह नहर लद्दाख के कई गांवों की 4,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई के लिए बनाई गई है।

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