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Srinagar News: शोपियां में वन भूमि वापसी अभियान के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन
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शोपियां। भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने शोपियां में चल रहे वन भूमि वापसी अभियान के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने अभियान के कामकाज में भेदभाव और अनियमितताओं का आरोप लगाया। वरिष्ठ भाजपा नेता जावेद कादरी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी शोपियां में जमा हुए और उपराज्यपाल कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की।
हालांकि पुलिस ने मार्च को रोक दिया और कई प्रदर्शनकारियों को मौके पर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। हिरासत के बावजूद भाजपा नेताओं ने प्रदर्शन जारी रखा और वन विभाग पर भूमि वापसी अभियान में चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों ने शोपियां के मंडल वन अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों के तबादले की मांग की। उनका आरोप है कि अभियान भेदभावपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है। सभा को संबोधित करते हुए कादरी ने कहा कि भाजपा अतिक्रमित वन भूमि की वापसी का समर्थन करती है लेकिन प्रक्रिया निष्पक्ष और समान रूप से होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से वन भूमि पर कब्जा जमाए प्रभावशाली लोगों को भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रभाव के चलते छोड़ा जा रहा है जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नोटिस और बेदखली की कार्रवाई का निशाना बनाया जा रहा है।
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उन्होंने कहा, कानून सब पर बराबर लागू होना चाहिए। अधिकारियों की कोई भी कार्रवाई पारदर्शी, भेदभाव रहित और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। भाजपा नेता ने शिक्षा विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुक्त सचिव के 2024 के आदेश में तबादलों पर रोक के बावजूद तबादले किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए नियमों के खिलाफ शिक्षकों का तबादला हो रहा है। इससे स्कूलों में प्रशासनिक असंतुलन पैदा हो रहा है।
कादरी ने दावा किया कि कुछ संस्थानों में एक ही विषय के कई शिक्षक हैं जबकि अन्य में कमी है, जो तबादला नीतियों की खराब योजना और अनियमित क्रियान्वयन को दर्शाता है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाले प्रशासन से अपील करते हुए कादरी ने वन और शिक्षा विभाग दोनों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं और वन भूमि वापसी अभियान से प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिलता तब तक वे शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे।
हालांकि पुलिस ने मार्च को रोक दिया और कई प्रदर्शनकारियों को मौके पर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। हिरासत के बावजूद भाजपा नेताओं ने प्रदर्शन जारी रखा और वन विभाग पर भूमि वापसी अभियान में चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाया।
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प्रदर्शनकारियों ने शोपियां के मंडल वन अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों के तबादले की मांग की। उनका आरोप है कि अभियान भेदभावपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है। सभा को संबोधित करते हुए कादरी ने कहा कि भाजपा अतिक्रमित वन भूमि की वापसी का समर्थन करती है लेकिन प्रक्रिया निष्पक्ष और समान रूप से होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से वन भूमि पर कब्जा जमाए प्रभावशाली लोगों को भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रभाव के चलते छोड़ा जा रहा है जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नोटिस और बेदखली की कार्रवाई का निशाना बनाया जा रहा है।
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उन्होंने कहा, कानून सब पर बराबर लागू होना चाहिए। अधिकारियों की कोई भी कार्रवाई पारदर्शी, भेदभाव रहित और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। भाजपा नेता ने शिक्षा विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुक्त सचिव के 2024 के आदेश में तबादलों पर रोक के बावजूद तबादले किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए नियमों के खिलाफ शिक्षकों का तबादला हो रहा है। इससे स्कूलों में प्रशासनिक असंतुलन पैदा हो रहा है।
कादरी ने दावा किया कि कुछ संस्थानों में एक ही विषय के कई शिक्षक हैं जबकि अन्य में कमी है, जो तबादला नीतियों की खराब योजना और अनियमित क्रियान्वयन को दर्शाता है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाले प्रशासन से अपील करते हुए कादरी ने वन और शिक्षा विभाग दोनों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं और वन भूमि वापसी अभियान से प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिलता तब तक वे शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे।